कानपुर की बंद मिलों को फिर शुरू कराने की मांग, राष्ट्रीय व्यापारी दिवस पर कानून मंत्री को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
नई दिल्ली/कानपुर। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल द्वारा नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब, सांसद मार्ग में 45वां राष्ट्रीय व्यापारी दिवस, व्यापारी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए व्यापारियों और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने छोटे व्यापारियों की समस्याओं, ऑनलाइन व्यापार से बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू कराने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने की, जबकि संचालन राष्ट्रीय महासचिव मुकुल स्वरूप मिश्रा ने किया। सम्मेलन में व्यापारियों ने सरकार से छोटे और मध्यम व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत स्तर पर आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
ऑनलाइन व्यापार से छोटे दुकानदारों की बढ़ी चुनौती
व्यापारी सम्मेलन में वक्ताओं ने ऑनलाइन व्यापार के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों से होने वाली बिक्री ने उपभोक्ताओं के सामने विकल्प तो बढ़ाए हैं, लेकिन दूसरी ओर परंपरागत छोटे दुकानदारों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती भी लगातार बढ़ रही है।
व्यापारियों का कहना था कि स्थानीय बाजार में छोटी दुकान चलाने वाला व्यक्ति अकेले अपने लिए रोजगार नहीं पैदा करता। उसके व्यवसाय से परिवार के सदस्य, कर्मचारी, स्थानीय सप्लायर, परिवहन से जुड़े लोग और कई अन्य छोटे कारोबारी भी जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि छोटी दुकानें लगातार आर्थिक दबाव में आती हैं तो इसका प्रभाव केवल व्यापारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर पड़ता है।
वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि छोटे व्यापारियों को बदलते कारोबारी माहौल के अनुरूप सुविधाएं और संरक्षण उपलब्ध कराया जाए। साथ ही ऑनलाइन और पारंपरिक व्यापार के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए प्रभावी नीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
कानपुर की बंद मिलों का मुद्दा सम्मेलन में प्रमुखता से उठा
राष्ट्रीय व्यापारी दिवस के इस सम्मेलन में कानपुर की वर्षों से बंद पड़ी औद्योगिक मिलों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कानपुर से पहुंचे व्यापारी प्रतिनिधिमंडल ने सुनील बजाज के नेतृत्व में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कानपुर की बंद औद्योगिक मिलों की स्थिति और उनसे जुड़े सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों को विस्तार से सामने रखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शहर की कई औद्योगिक इकाइयां लंबे समय से बंद हैं। इनके बंद होने का सीधा असर हजारों श्रमिकों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका पर पड़ा है।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मिलों के बंद होने से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के स्थायी अवसरों से वंचित हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप कई परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर वर्षों से अनुपयोगी पड़ी औद्योगिक संपत्तियों का भी समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।
पुरानी मशीनरी और जमीन के उपयोग की मांग
ज्ञापन में बंद मिलों की पुरानी मशीनरी, भवनों और जमीन का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी औद्योगिक संपत्तियां धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता खो रही हैं। यदि इनका समय रहते पुनर्विकास या औद्योगिक उपयोग सुनिश्चित किया जाए तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
व्यापारी प्रतिनिधियों ने यह भी चिंता जताई कि लंबे समय से खाली पड़ी औद्योगिक जमीनों पर अवैध कब्जे की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी संपत्तियों का संरक्षण किया जाए और उनका उपयोग कानूनी एवं औद्योगिक गतिविधियों के लिए सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि कानपुर की औद्योगिक पहचान को दोबारा मजबूत करने के लिए बंद मिलों से जुड़े मामलों का व्यावहारिक समाधान आवश्यक है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, बल्कि शहर की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल सकती है।
बेरोजगारी से सामाजिक समस्याओं पर भी असर
ज्ञापन में बंद मिलों के कारण उत्पन्न बेरोजगारी और आर्थिक कठिनाइयों को व्यापक सामाजिक प्रभाव से भी जोड़कर देखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जब बड़ी संख्या में परिवारों की आय के साधन प्रभावित होते हैं तो उसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और दैनिक जरूरतों पर भी पड़ता है।
व्यापारी नेताओं के अनुसार, रोजगार के अवसरों में कमी से आर्थिक दबाव बढ़ता है और इसका प्रभाव सामाजिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए बंद औद्योगिक इकाइयों का समाधान केवल उद्योग विभाग या श्रम क्षेत्र से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसे शहर के समग्र विकास से जोड़कर देखने की आवश्यकता है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कानपुर की बंद मिलों के संबंध में संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके तहत मिलों की वर्तमान स्थिति, संपत्तियों की उपलब्धता, कानूनी अड़चनों और संभावित पुनरुद्धार की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सकता है।
कानून मंत्री ने समस्या को बताया वाजिब
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, कानून मंत्री ने कानपुर की बंद मिलों से जुड़ी समस्या को वाजिब बताया और इस दिशा में प्रयास करने का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, कानून मंत्री ने कहा कि कानपुर की मिलों से जुड़े विषय पर प्रधानमंत्री से बातचीत की जाएगी और उन्हें दोबारा शुरू कराने की संभावनाओं पर जल्द प्रयास किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद कानपुर से पहुंचे व्यापारिक प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब सरकार के स्तर से सकारात्मक पहल आगे बढ़ेगी।
हालांकि, बंद मिलों को दोबारा शुरू कराने के लिए संपत्ति, वित्तीय स्थिति, कानूनी मामलों, प्रबंधन और श्रमिकों से जुड़े कई पहलुओं पर निर्णय आवश्यक होगा। ऐसे में व्यापारियों की नजर अब आगे होने वाली सरकारी कार्रवाई पर रहेगी।
कानपुर से बड़ी संख्या में व्यापारी प्रतिनिधि शामिल
राष्ट्रीय व्यापारी दिवस एवं व्यापारी सम्मेलन में कानपुर से भी बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में सुनील बजाज, मणिकांत जैन, निर्मल त्रिपाठी, कृपा शंकर त्रिवेदी, सुरेश गुप्ता, संत मिश्रा, नरेश यादव, जितेंद्र अग्रवाल, राजू सुनील गुप्ता, सुशील गुप्ता, अखंड प्रताप सिंह, मनीष जायसवाल, कृष्ण बहादुर सिंह, अतुल सिंह, संजय दुबे, पवन दुबे, विनय अरोड़ा, सरताज अहमद, पवन पांडे, अंकित मिश्रा, हिमांशु गुप्ता, विनीत सिंह चंदेल, सौरभ मिश्रा, रामकुमार सिंह, अशोक कुमार अग्रवाल, उदयभान सिंह, मनीष बाजपेई, शैलेंद्र गुप्ता, प्रमोद पांडे, राजेंद्र सिंह, राकेश राठौर और अमित तिवारी सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
छोटे व्यापारियों की आवाज को नीतिगत समर्थन की उम्मीद
राष्ट्रीय व्यापारी दिवस के इस आयोजन ने छोटे व्यापारियों और उद्योग जगत से जुड़े विभिन्न मुद्दों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान किया। एक तरफ ऑनलाइन व्यापार से उत्पन्न प्रतिस्पर्धा को लेकर व्यापारियों ने अपनी चिंताएं रखीं, वहीं दूसरी तरफ कानपुर की बंद औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करने की मांग भी प्रमुखता से सामने आई।
व्यापारियों का मानना है कि स्थानीय बाजार और उद्योग मजबूत होंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और शहरों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसलिए सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की अपेक्षा की जा रही है, जिनसे छोटे व्यापारियों को प्रतिस्पर्धी माहौल में आगे बढ़ने का अवसर मिले और लंबे समय से बंद औद्योगिक संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो सके।
अब कानपुर के व्यापारिक संगठनों और श्रमिक वर्ग की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बंद मिलों को लेकर केंद्र सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। यदि इस दिशा में ठोस पहल होती है तो इससे कानपुर की औद्योगिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद भी बढ़ सकती है।

