रमणरेती आश्रम पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, 3-4 दिन प्रवास की जताई इच्छा

9

रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा: धर्म और अध्यात्म की नगरी मथुरा में स्थित प्रसिद्ध उदासीन कार्ष्णि रमणरेती आश्रम में देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न रामनाथ कोविंद के आगमन से आश्रम परिसर में उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

पूर्व राष्ट्रपति के आगमन पर आश्रम को फूलों और दीपों से सजाया गया। संतों और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया और उनके सम्मान में वैदिक मंत्रोच्चार तथा शंखनाद किया गया।

रमणरेती आश्रम पहुंचने के बाद रामनाथ कोविंद ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने आश्रम की गौशाला में पहुंचकर गायों को गुड़ खिलाया और गौसेवा की। बाद में उन्होंने आश्रम के पीठाधीश्वर गुरुदेव गुरु शरणानंद जी महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया।

इस दौरान दोनों के बीच करीब 30 मिनट तक आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा हुई। आश्रम के शांत वातावरण और प्राकृतिक परिवेश से प्रभावित पूर्व राष्ट्रपति ने यहां कुछ दिन प्रवास करने की इच्छा भी व्यक्त की।

संतों और गजराज ने किया पूर्व राष्ट्रपति का स्वागत

रामनाथ कोविंद के आश्रम पहुंचने पर संतों और आश्रम के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान आश्रम परिसर में विशेष आध्यात्मिक माहौल रहा। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच उन्हें आश्रम परिसर में ले जाया गया।

स्वागत की विशेष बात यह रही कि आश्रम में मौजूद गजराज हाथी ने भी पूर्व राष्ट्रपति के स्वागत में हिस्सा लिया। धार्मिक वातावरण और पारंपरिक स्वागत से आश्रम में मौजूद श्रद्धालुओं में भी उत्साह देखने को मिला।

आश्रम परिसर को इस अवसर के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों और दीपों से सजे परिसर में संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और विशेष बना दिया।

श्री रमन बिहारी भगवान के किए दर्शन

आश्रम पहुंचने के बाद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सबसे पहले श्री रमन बिहारी भगवान के दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।

मथुरा-वृंदावन क्षेत्र अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। ऐसे में रमणरेती आश्रम में पूर्व राष्ट्रपति का दर्शन-पूजन करना उनके आध्यात्मिक प्रवास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

पूजा के बाद उन्होंने आश्रम के अन्य धार्मिक स्थलों और व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। इस दौरान आश्रम से जुड़े संत और पदाधिकारी उनके साथ मौजूद रहे।

गौशाला पहुंचकर की गौसेवा

दर्शन-पूजन के बाद रामनाथ कोविंद आश्रम की गौशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गायों को गुड़ खिलाया और गौसेवा की। आश्रम में गौसेवा को धार्मिक और सेवा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

पूर्व राष्ट्रपति को गौशाला में देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं और आश्रम के सेवकों में भी उत्साह नजर आया। उन्होंने गौशाला की व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली।

गौसेवा के बाद उन्होंने आश्रम की धार्मिक और सेवा गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान आश्रम से जुड़े संत और पदाधिकारी भी उनके साथ रहे।

गुरुदेव गुरु शरणानंद से हुई आध्यात्मिक चर्चा

इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति ने रमणरेती आश्रम के पीठाधीश्वर गुरुदेव गुरु शरणानंद जी महाराज से भेंट की। उन्होंने गुरुदेव का आशीर्वाद लिया। दोनों के बीच करीब 30 मिनट तक आध्यात्मिक चर्चा हुई।

इस मुलाकात के दौरान आश्रम के वातावरण, आध्यात्मिक साधना, प्रकृति और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई। गुरुदेव से मुलाकात के बाद रामनाथ कोविंद ने आश्रम के वातावरण की सराहना की।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आश्रम में आकर उन्हें प्रकृति और परमात्मा दोनों की अनुभूति हुई। उन्होंने यहां के शांत और पवित्र वातावरण को मन को शांति देने वाला बताया।

उन्होंने गुरुदेव के दर्शन को अपने लिए सौभाग्य की बात बताते हुए कहा कि यहां आकर वह स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।

3 से 4 दिन प्रवास की जताई इच्छा

रमणरेती आश्रम के वातावरण से प्रभावित रामनाथ कोविंद ने यहां 3 से 4 दिन प्रवास करने की इच्छा भी व्यक्त की। उनके इस भाव से आश्रम के संतों और पदाधिकारियों में प्रसन्नता का माहौल रहा।

आश्रम का प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण लंबे समय से साधकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा है। ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति की ओर से कुछ दिनों तक यहां ठहरने की इच्छा व्यक्त करना आश्रम के लिए भी विशेष अवसर माना जा रहा है।

यदि उनका प्रवास तय होता है, तो इस दौरान वह आश्रम की धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक वातावरण का और करीब से अनुभव कर सकेंगे।

आश्रम में खुशी का माहौल

पूर्व राष्ट्रपति के आगमन के बाद रमणरेती आश्रम और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल देखने को मिला। संतों ने उनके आगमन को आश्रम के लिए गौरव का विषय बताया।

आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, रामनाथ कोविंद का धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के प्रति लगाव उनके इस दौरे में भी दिखाई दिया। उन्होंने आश्रम की परंपराओं और धार्मिक गतिविधियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

इस दौरान आश्रम के वरिष्ठ संत, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने पूर्व राष्ट्रपति के आगमन का स्वागत किया और उनके साथ कुछ समय बिताया।

मथुरा की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव

मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और ब्रज संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थित विभिन्न आश्रम, मंदिर और धार्मिक स्थल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। रमणरेती आश्रम भी ब्रज क्षेत्र की प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का रमणरेती आश्रम पहुंचना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दर्शन-पूजन, गौसेवा और संतों से मुलाकात के माध्यम से उनके दौरे में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की झलक देखने को मिली।

प्रकृति और अध्यात्म के संगम से प्रभावित हुए कोविंद

रामनाथ कोविंद ने आश्रम के वातावरण की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने प्रकृति और परमात्मा की अनुभूति का उल्लेख करते हुए यहां की शांति को महत्वपूर्ण बताया।

आश्रम का वातावरण धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ प्राकृतिक परिवेश के लिए भी जाना जाता है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु और साधक कुछ समय शांत वातावरण में बिताना पसंद करते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति द्वारा 3 से 4 दिन प्रवास की इच्छा व्यक्त किए जाने से यह संकेत मिलता है कि उन्हें आश्रम का वातावरण काफी पसंद आया।

श्रद्धालुओं के लिए भी रहा विशेष अवसर

रामनाथ कोविंद के आगमन के दौरान आश्रम में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए भी यह विशेष अवसर रहा। पूर्व राष्ट्रपति को धार्मिक अनुष्ठानों और गौसेवा में शामिल होते हुए देखने के साथ उन्हें संतों का आशीर्वाद लेते हुए देखा गया।

रमणरेती आश्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का आगमन धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ा विशेष अवसर रहा। उन्होंने श्री रमन बिहारी भगवान के दर्शन किए, पूजा-अर्चना की, गौसेवा की और गुरुदेव गुरु शरणानंद जी महाराज से आध्यात्मिक चर्चा की।

आश्रम के शांत वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने 3 से 4 दिन प्रवास की इच्छा जताई। उनके आगमन से आश्रम परिसर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा। संतों और श्रद्धालुओं ने इसे आश्रम के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया।

You may have missed