मथुरा में कांग्रेस ने मनाई भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ, ‘नफरत हिंसा भारत छोड़ो’ का लिया संकल्प

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा: सेठबाड़ा स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में रविवार को भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कांग्रेस ने इस दिन को ‘नफरत हिंसा भारत छोड़ो’ दिवस के रूप में मनाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर ने की। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों को याद किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारत छोड़ो आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। साथ ही, वर्तमान समय में सामाजिक सौहार्द, लोकतांत्रिक मूल्यों और देश की एकता को मजबूत करने की जरूरत पर अपने विचार रखे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े मूल्यों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन देश के स्वतंत्रता संघर्ष का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है और यह दिन देशवासियों को स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष और त्याग की याद दिलाता है।

उन्होंने अपने संबोधन में भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता, शोषण और शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच अपनी आवाज उठाती रहेगी।

मुकेश धनगर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में नफरत और हिंसा की राजनीति के खिलाफ राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संघर्ष जारी रखने की बात कही। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक तरीके से जनता के मुद्दों को उठाने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।

भारत छोड़ो आंदोलन के इतिहास पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सांप्रदायिकता विरोधी समिति के जिला अध्यक्ष शिवदत्त चतुर्वेदी रहे। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि और उसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक चरणों में से एक था। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी को बढ़ावा दिया और स्वतंत्रता की मांग को नई गति मिली।

शिवदत्त चतुर्वेदी ने वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव के लिए सांप्रदायिक नफरत और हिंसा जैसी प्रवृत्तियों का विरोध जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे के मूल्यों से भी जुड़ी हुई है।

कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सद्भाव पर दिया जोर

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया था।

ऐसे में वर्तमान समय में भी समाज में आपसी सहयोग और संवाद को बढ़ावा देना आवश्यक है। नेताओं ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन सामाजिक सौहार्द और नागरिकों के बीच सम्मान की भावना को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

इसके अलावा, वक्ताओं ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उनका कहना था कि विद्यार्थियों के हित में पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

9 अगस्त के ऐतिहासिक महत्व को किया रेखांकित

कार्यक्रम में पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष विक्रम वाल्मीकि, उमेश शर्मा, जिला उपाध्यक्ष आदित्य तिवारी एडवोकेट, अशोक सैनी, धर्मेंद्र सिंह प्रधान, अर्पित जादौन और गीता दिवाकर समेत अन्य नेताओं ने भी विचार रखे।

वक्ताओं ने 9 अगस्त के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष में जनभागीदारी की भावना को मजबूत किया था। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन की घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि युवा देश के लोकतांत्रिक और ऐतिहासिक विकास को बेहतर ढंग से समझ सकें।

नेताओं ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की। इस दौरान कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की गतिविधियों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया गया।

संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर चर्चा

कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संगठन को और सक्रिय बनाने का आह्वान किया गया। नेताओं ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़े मुद्दों को समझना और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से उठाना चाहिए।

इसके साथ ही, पार्टी की नीतियों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विचारों को आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि संगठन की मजबूती के लिए कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।

इस दौरान विभिन्न सामाजिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर लोगों के बीच संवाद बढ़ाने की बात भी कही गई।

कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री ने किया

कार्यक्रम का संचालन कांग्रेस के जिला महामंत्री वैद्य मनोज गौड़ ने किया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया तथा भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को याद करने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक दिवस केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इनके माध्यम से नई पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।

बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद

कार्यक्रम में कांग्रेस से जुड़े कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें अमित दीक्षित, निशू यादव एडवोकेट, अनिल खरे, सुशील गौतम, ललित शर्मा, भोले, मोनू कुरैशी, राजेश धनगर और सुरेश शर्मा समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत छोड़ो आंदोलन के मूल्यों को याद किया। इसके बाद वक्ताओं ने देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश

भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह कार्यक्रम कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। एक ओर जहां नेताओं ने 1942 के आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया, वहीं दूसरी ओर वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

मथुरा जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भारत छोड़ो आंदोलन के इतिहास, महात्मा गांधी के विचारों और सामाजिक सद्भाव की आवश्यकता पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया। साथ ही, पार्टी संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने पर भी जोर दिया गया।

इस अवसर पर नेताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समझना और उसके मूल्यों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना आज भी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम इसी संदेश के साथ संपन्न हुआ।

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