कर्नाटक में SC छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 3 साल में 1,178.20 करोड़ रुपये जारी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा को आर्थिक सहायता देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले तीन वित्त वर्षों में 1,178.20 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है। यह राशि केंद्र प्रायोजित पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को सहायता देने के लिए जारी की गई।

सरकार ने यह जानकारी राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कर्नाटक में अनुसूचित जाति कल्याण के लिए जारी केंद्रीय निधि से संबंधित प्रश्न के जवाब में योजना और इसके तहत जारी राशि का विवरण साझा किया।

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में कर्नाटक के लिए 421.08 करोड़ रुपये, 2024-25 में 422.90 करोड़ रुपये और 2025-26 में 334.22 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की गई। इस प्रकार तीन वित्त वर्षों में कुल राशि 1,178.20 करोड़ रुपये पहुंच गई।

तीन वर्षों में कितनी राशि जारी हुई?

कर्नाटक में अनुसूचित जाति विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत केंद्र सरकार की ओर से जारी राशि का वित्त वर्षवार विवरण इस प्रकार है:

वित्त वर्ष केंद्रीय हिस्सेदारी
2023-24 ₹421.08 करोड़
2024-25 ₹422.90 करोड़
2025-26 ₹334.22 करोड़
कुल ₹1,178.20 करोड़

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की ओर से इस योजना के तहत कर्नाटक में पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति सहायता उपलब्ध कराने के लिए लगातार केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की गई है।

उच्च शिक्षा में आर्थिक सहायता देने का उद्देश्य

पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र विद्यार्थियों को मैट्रिक के बाद की पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति सहायता दी जाती है।

इस तरह की सहायता विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा की राह आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में छात्रवृत्ति के माध्यम से मिलने वाली सहायता उनकी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग कर सकती है।

इसके अलावा, योजना का व्यापक उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है।

केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू होती है छात्रवृत्ति

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग इस योजना को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के माध्यम से लागू करता है।

यानी योजना के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है। केंद्र सरकार अपनी निर्धारित हिस्सेदारी जारी करती है, जबकि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन योजना के तहत विद्यार्थियों से संबंधित प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था को आगे बढ़ाते हैं।

इस व्यवस्था के कारण योजना का संचालन राज्यों के स्तर पर किया जाता है, जबकि केंद्र सरकार इसकी केंद्रीय हिस्सेदारी उपलब्ध कराती है।

2021-22 से DBT के जरिए हो रहा भुगतान

पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को वर्ष 2021-22 से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से लागू किया जा रहा है। DBT व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सहायता को सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना है।

इसके लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को अपने स्तर पर भुगतान किए गए और अंतिम रूप से सत्यापित लाभार्थी डेटा को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर साझा करना होता है।

केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति हिस्सेदारी जारी करने की प्रक्रिया इसी सत्यापित डेटा से जुड़ी है। अर्थात, पात्र विद्यार्थियों के भुगतान और संबंधित आंकड़ों के अंतिम सत्यापन के बाद ही केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की जाती है।

इस प्रक्रिया से छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता और लाभार्थियों की पहचान को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलती है।

मांग-आधारित है योजना

सरकार के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना मांग-आधारित है। इसका अर्थ है कि यह देशभर के मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वाले सभी पात्र विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है और पात्रता के आधार पर विद्यार्थियों को इसका लाभ दिया जाता है।

इसमें कर्नाटक सहित देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पात्र अनुसूचित जाति विद्यार्थी शामिल हैं।

मांग-आधारित व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र विद्यार्थी योजना के निर्धारित मानकों को पूरा करने पर छात्रवृत्ति सहायता के लिए आवेदन कर सकें। इसके लिए विद्यार्थियों के आवेदन और संबंधित जानकारी की प्रक्रिया राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल तथा राज्य स्तर की व्यवस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाई जाती है।

सत्यापित डेटा के आधार पर जारी होती है केंद्रीय हिस्सेदारी

सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया में डेटा सत्यापन को महत्वपूर्ण बताया है। केंद्रीय हिस्सेदारी तब जारी की जाती है, जब संबंधित राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन विद्यार्थियों से संबंधित भुगतान और अंतिम रूप से सत्यापित डेटा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर उपलब्ध कराता है।

इस व्यवस्था के कारण केंद्र से जारी होने वाली राशि को वास्तविक लाभार्थियों के सत्यापित रिकॉर्ड से जोड़ने में मदद मिलती है। साथ ही, DBT के माध्यम से भुगतान होने के कारण सहायता सीधे लाभार्थी तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

अनुसूचित जातियों के विकास के लिए DAPSC का प्रावधान

सरकार ने राज्यसभा में अपने जवाब के दौरान अनुसूचित जातियों के लिए विकास कार्य योजना (DAPSC) का भी उल्लेख किया। नीति आयोग ने वर्ष 2017 में DAPSC के तहत निधि निर्धारित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे।

इन दिशानिर्देशों के अनुसार संबंधित मंत्रालय और विभाग अपनी योजनाओं के माध्यम से अनुसूचित जातियों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए DAPSC के तहत निधि निर्धारित करते हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। इसके तहत शिक्षा, सामाजिक कल्याण और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाने का प्रावधान रहता है।

राज्यों को संबंधित मंत्रालयों की योजनाओं के अनुसार मिलता है आवंटन

DAPSC के तहत संबंधित मंत्रालय और विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के दिशानिर्देशों के अनुसार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निधि आवंटित करते हैं। कर्नाटक भी इसी व्यवस्था के तहत संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त करता है।

सरकार के अनुसार, DAPSC के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की ओर से आवंटित राशि को केंद्रीय बजट के व्यय प्रोफाइल के विवरण 10ए में दर्शाया जाता है।

इससे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए किए जाने वाले वित्तीय प्रावधानों को बजट दस्तावेजों में प्रदर्शित किया जाता है।

शिक्षा के जरिए सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर

कर्नाटक में पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान जारी 1,178.20 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी अनुसूचित जाति विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा में आर्थिक सहायता के महत्व को रेखांकित करती है।

वहीं, DBT और राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल आधारित प्रक्रिया के कारण योजना के क्रियान्वयन को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इससे लाभार्थियों के सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलती है।

कर्नाटक में अनुसूचित जाति विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत केंद्र की ओर से जारी 1,178.20 करोड़ रुपये की राशि शिक्षा के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता है।

मांग-आधारित व्यवस्था, सत्यापित डेटा और DBT के माध्यम से योजना का संचालन विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति पहुंचाने की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर केंद्रित है। इसके साथ ही DAPSC के माध्यम से अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं में वित्तीय प्रावधान किए जा रहे हैं।