मगरासा में जलभराव और गंदगी से ग्रामीण नाराज, प्रधानपति के बयान पर उठे सवाल
रिपोर्ट- अमन सिंह
कानपुर: बिधनू ब्लॉक की ग्राम पंचायत मगरासा में विकास कार्यों और साफ-सफाई की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। गांव के युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से जलभराव, गंदगी से भरी नालियों, खराब सड़कों और सार्वजनिक सुविधाओं के आसपास फैली अव्यवस्था की तस्वीरें और वीडियो साझा कर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर खींचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बारिश के दौरान गांव की कई गलियां जलभराव की समस्या से जूझती हैं और नियमित सफाई नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस बीच ग्राम प्रधान के पति मनोज साहू का यह कथित बयान कि “शहर में भी जलभराव है तो गांव में भी होगा”, स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, एडीओ पंचायत बिधनू राघवेंद्र प्रताप सिंह ने टीम भेजकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की बात कही है। ऐसे में अब ग्रामीणों को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।
गांव की गलियों में जलभराव का आरोप
मगरासा के ग्रामीणों के मुताबिक गांव की कई गलियों में जल निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। बारिश होने के बाद पानी सड़कों और गलियों में जमा हो जाता है। इसके चलते पैदल आवागमन के साथ-साथ रोजमर्रा के कामों के लिए लोगों को परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण उनमें कचरा जमा है। परिणामस्वरूप बारिश का पानी आसानी से निकल नहीं पाता और जलभराव की स्थिति बन जाती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पंचायत स्तर पर नालियों की सफाई के साथ-साथ जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि हर बारिश में लोगों को इसी समस्या का सामना न करना पड़े।
टूटी सड़कों और सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी
ग्रामीणों की नाराजगी केवल जलभराव तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि गांव के कुछ हिस्सों में सड़कें खराब हैं और जगह-जगह रास्तों की स्थिति ठीक नहीं है। इससे आवागमन प्रभावित होता है। ग्रामीणों के मुताबिक यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत और नालियों की सफाई करा दी जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
युवाओं का कहना है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों और साफ-सफाई को लेकर लगातार ध्यान दिलाया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया। इसी वजह से अब उन्होंने सोशल मीडिया को अपनी आवाज उठाने का माध्यम बनाया है।
आयुष्मान भवन के आसपास भी सफाई की मांग
ग्रामीणों ने आयुष्मान भवन के आसपास की साफ-सफाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े भवन के आसपास स्वच्छ वातावरण होना जरूरी है। इसके बावजूद वहां सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि पंचायत और संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करें और यदि कहीं गंदगी या जलभराव की समस्या है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाए। साथ ही, सार्वजनिक भवनों के आसपास नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, जिससे ग्रामीणों को बेहतर माहौल मिल सके।
प्रधानपति के बयान से बढ़ी चर्चा
ग्राम पंचायत में महिला प्रधान सीमा साहू हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत से जुड़े कई कार्यों में उनके पति मनोज साहू की सक्रिय भूमिका रहती है। गांव की स्थिति को लेकर सवाल पूछे जाने पर मनोज साहू ने कथित तौर पर कहा कि जलभराव की समस्या केवल मगरासा में नहीं है, बल्कि पूरे कानपुर में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। उन्होंने शहर की बड़ी सड़कों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर गांव में भी कहीं समस्या है तो यह कोई बड़ी बात नहीं है।
मनोज साहू ने गांव में सफाई व्यवस्था को लेकर यह भी दावा किया कि गांव के अंदर विशेष गंदगी नहीं है और साफ-सफाई ठीक है। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए फोटो और वीडियो के बाद इस दावे को लेकर स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है।
यहां यह भी जरूरी है कि किसी भी आरोप या दावे की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन मौके के निरीक्षण और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
एडीओ पंचायत ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मामले को लेकर एडीओ पंचायत बिधनू राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि टीम भेजकर गांव में साफ-सफाई कराई जाएगी, ताकि ग्रामीणों को परेशानी न हो। विभाग की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही मौके पर निरीक्षण किया जाएगा और समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल एक बार सफाई कराने के बजाय नियमित सफाई व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। इसके अलावा जल निकासी के रास्तों की भी जांच होनी चाहिए, ताकि बारिश के समय पानी जमा होने की समस्या दोबारा न बने।
सोशल मीडिया पर युवाओं ने उठाई आवाज
मगरासा के युवाओं ने गांव की समस्याओं को सोशल मीडिया पर सामने लाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है। उनके द्वारा साझा किए गए पोस्ट में गांव की गलियों, नालियों और जलभराव से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया गया है।
युवाओं का कहना है कि जब स्थानीय स्तर पर शिकायतों का अपेक्षित समाधान नहीं होता तो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखना उनके लिए एक प्रभावी माध्यम बन गया है। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान कराना है।
उन्होंने जिला प्रशासन और विकास विभाग के अधिकारियों से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही नालियों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था, खराब रास्तों की मरम्मत और सार्वजनिक भवनों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित कराने की अपील की है।
विकास कार्यों की जांच की मांग
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता और खर्च की जांच कराने की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि कागजों पर विकास कार्यों का उल्लेख होने के बावजूद जमीन पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं देता।
हालांकि, विकास कार्यों में अनियमितता या धन के दुरुपयोग संबंधी किसी भी आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर कार्यों का भौतिक सत्यापन करें और यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
मगरासा की स्थिति को लेकर अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। एक ओर ग्रामीण जलभराव, गंदगी और सड़कों की समस्या दूर कराने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायत स्तर से गांव की सफाई व्यवस्था ठीक होने का दावा किया गया है।
ऐसे में स्थलीय निरीक्षण के बाद ही स्थिति की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एडीओ पंचायत की ओर से टीम भेजकर सफाई कराने का आश्वासन दिया गया है।
ग्रामीणों की उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी केवल तत्काल सफाई तक सीमित न रहते हुए जल निकासी की स्थायी व्यवस्था, नालियों की नियमित सफाई और खराब रास्तों की मरम्मत की दिशा में भी कदम उठाएंगे। इसके साथ ही यदि विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें हैं तो उनका भी नियमानुसार सत्यापन कराया जाए।
कुल मिलाकर, मगरासा में सामने आई शिकायतों ने गांवों में बुनियादी सुविधाओं और नियमित सफाई व्यवस्था की जरूरत को एक बार फिर सामने रखा है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक टीम के निरीक्षण के बाद गांव की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और ग्रामीणों को कब तक राहत मिलती है।

