कानपुर कचहरी में अधिवक्ताओं की मानव श्रृंखला, मांगों को लेकर लगातार तीसरे बुधवार कार्य बहिष्कार

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कानपुर कचहरी में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। लगातार तीसरे बुधवार को अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया। इसी क्रम में कचहरी परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। मानव श्रृंखला में सैकड़ों अधिवक्ता शामिल हुए और उन्होंने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।

अधिवक्ताओं के इस प्रदर्शन के चलते कचहरी परिसर में दिनभर हलचल बनी रही। प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है। इसके बावजूद अभी तक अपेक्षित स्तर पर समाधान नहीं होने के कारण विरोध का सिलसिला जारी रखा गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए कार्य बहिष्कार और अन्य शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

शताब्दी गेट से आगे तक बनाई मानव श्रृंखला

बुधवार को अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर के शताब्दी गेट से लेकर काफी दूरी तक मानव श्रृंखला बनाई। इसमें सैकड़ों अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। मानव श्रृंखला के माध्यम से अधिवक्ताओं ने एकजुटता का संदेश दिया और अपनी मांगों के समर्थन में सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

मानव श्रृंखला में शामिल अधिवक्ताओं का कहना था कि उनकी मांगें लंबे समय से महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इन पर गंभीरता से विचार कर समाधान की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी।

कार्य बहिष्कार और मानव श्रृंखला के कारण कचहरी में आने वाले लोगों के बीच भी इस प्रदर्शन को लेकर चर्चा रही। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अपनी मांगों को सरकार तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।

लगातार तीसरे बुधवार कार्य बहिष्कार

अधिवक्ताओं की ओर से लगातार तीसरे बुधवार को कार्य बहिष्कार किया गया। इसके पहले भी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है। बुधवार को मानव श्रृंखला के आयोजन के साथ अधिवक्ताओं ने एक बार फिर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।

अधिवक्ताओं का कहना है कि कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तथा सरकार का ध्यान उनकी मांगों की ओर आकर्षित किया जा रहा है। साथ ही, संगठन स्तर पर आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा की जा रही है।

इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता कचहरी परिसर में मौजूद रहे। मानव श्रृंखला में शामिल अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया।

बार एसोसिएशन ने आगे के आंदोलन के दिए संकेत

कानपुर बार एसोसिएशन के महामंत्री विनय मिश्रा ने कहा कि जब तक अधिवक्ताओं की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक समय-समय पर इसी तरह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार का ध्यान अधिवक्ताओं की मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विनय मिश्रा के मुताबिक, अधिवक्ता अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि मांगों पर सकारात्मक पहल होने की उम्मीद है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इसके बावजूद अधिवक्ताओं की मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। उनके अनुसार, प्रदेश के अधिवक्ता विधानसभा का घेराव करने का कदम भी उठा सकते हैं।

सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश

अधिवक्ताओं के मुताबिक, मानव श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य सरकार और संबंधित स्तर के अधिकारियों तक उनकी मांगों को पहुंचाना है। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी एकजुटता दिखाई। उनका कहना है कि मांगों के समाधान के लिए सरकार की ओर से ठोस पहल की आवश्यकता है।

वहीं, लगातार कार्य बहिष्कार के कारण कचहरी में न्यायिक और अन्य कार्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, अधिवक्ताओं का कहना है कि वे अपनी मांगों के समाधान के लिए निर्धारित कार्यक्रम के तहत विरोध कर रहे हैं।

बुधवार को आयोजित मानव श्रृंखला में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी से यह स्पष्ट हुआ कि संगठन स्तर पर आंदोलन को लेकर सक्रियता बनी हुई है। आने वाले दिनों में मांगों पर सरकार और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के आधार पर अधिवक्ताओं के अगले कदम को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, कानपुर कचहरी में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। लगातार तीसरे बुधवार को कार्य बहिष्कार और मानव श्रृंखला के जरिए अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।

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