कानपुर में 40 साल पुराने पेड़ काटने का आरोप, प्लॉट मालिक ने नगर निगम कर्मियों पर यह लगाया आरोप

d798deee-8935-48f7-a435-a6be70c05248

रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: शहर के श्याम नगर क्षेत्र में एक प्लॉट पर खड़े करीब 35 से 40 वर्ष पुराने नीम और शीशम के पेड़ों को काटे जाने का मामला सामने आया है। प्लॉट मालिक दशरथ सिंह ने विपक्षी पक्ष पर पेड़ कटवाने, प्लॉट की बाउंड्री गिराने और जबरन कब्जे की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने इस मामले में नगर निगम के कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पीड़ित के मुताबिक, मामला श्याम नगर ब्लॉक स्थित प्लॉट नंबर 337 से जुड़ा है। उनका कहना है कि प्लॉट में लंबे समय से तीन नीम और एक शीशम के पेड़ खड़े थे। इन पेड़ों की उम्र करीब 35 से 40 वर्ष बताई जा रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 6 अगस्त 2026 को इन पेड़ों को कटवा दिया गया। इसके साथ ही प्लॉट की बाउंड्री को भी क्षतिग्रस्त किए जाने की बात कही गई है।

प्लॉट पर पुराने पेड़ होने का दावा

दशरथ सिंह के अनुसार, उनके प्लॉट में मौजूद पेड़ कई वर्षों से खड़े थे। इनमें नीम और शीशम के पेड़ शामिल थे। उनका कहना है कि इन पेड़ों से प्लॉट की हरियाली बनी हुई थी और वे लंबे समय से उनकी संपत्ति का हिस्सा थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे पहले भी वर्ष 2023 में प्लॉट पर कब्जे की नीयत से एक पेड़ काटा गया था। उस समय भी उन्होंने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी दी थी। अब दोबारा पेड़ों की कटाई की घटना सामने आने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, पेड़ों की कटाई को लेकर किस स्तर से अनुमति ली गई थी या नहीं ली गई थी, इसकी स्थिति संबंधित विभाग की जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

6 अगस्त को चार पेड़ काटने का आरोप

शिकायतकर्ता दशरथ सिंह ने आरोप लगाया है कि 6 अगस्त को शाम करीब चार बजे विपक्षी रामेंद्र द्विवेदी ने नगर निगम के कर्मचारियों को मौके पर बुलाया। उनके मुताबिक, इसके बाद प्लॉट में खड़े तीन नीम और एक शीशम समेत चारों पेड़ों को कटवा दिया गया।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि इसी दौरान प्लॉट की बाउंड्री को भी गिरा दिया गया। उन्होंने इसे संपत्ति पर कब्जे की कथित कोशिश से जोड़ते हुए पुलिस और प्रशासन से जांच की मांग की है।

मामले में शिकायतकर्ता ने नगर निगम कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी में पेड़ काटे गए हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए कि उन्हें किस आधार पर मौके पर भेजा गया था और पेड़ों की कटाई के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

सिविल कोर्ट में मामला विचाराधीन होने का दावा

दशरथ सिंह के मुताबिक, संबंधित प्लॉट को लेकर सिविल कोर्ट में विवाद चल रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस मामले में अदालत से स्टे भी प्राप्त है। ऐसे में उनका आरोप है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद प्लॉट पर पेड़ काटने और बाउंड्री गिराने की कार्रवाई की गई।

हालांकि, स्टे आदेश की वास्तविक स्थिति, उसका दायरा और वर्तमान प्रभाव संबंधित न्यायालयी दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकता है। इसलिए इस पहलू की भी जांच आवश्यक है कि अदालत के आदेश में संबंधित संपत्ति को लेकर क्या निर्देश दिए गए हैं।

यदि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में न्यायालय का प्रभावी आदेश मौजूद है, तो उसके अनुपालन से जुड़े पहलू भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

112 पर दी गई पुलिस को सूचना

घटना के बाद दशरथ सिंह ने आपातकालीन नंबर 112 पर पुलिस को सूचना देने की बात कही है। शिकायत के अनुसार, सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वहां मौजूद लोगों से घटना के संबंध में जानकारी ली।

शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही रामेंद्र द्विवेदी मौके से चला गया था। वहीं, मौके पर मौजूद नगर निगम के एक कर्मचारी को पूछताछ के लिए चौकी ले जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

अब पुलिस के सामने यह जांच करना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय मौके पर कौन-कौन लोग मौजूद थे, पेड़ों की कटाई किसके निर्देश पर हुई और क्या इसके लिए किसी विभागीय अनुमति या आदेश का इस्तेमाल किया गया था।

गाली-गलौज और धमकी के भी आरोप

दशरथ सिंह ने अपनी शिकायत में पेड़ों की कटाई और बाउंड्री गिराने के साथ विरोध करने पर गाली-गलौज तथा जान से मारने की धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने पुलिस से इन आरोपों की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें भविष्य में भी दबाव बनाकर प्लॉट या मकान पर कब्जे की कोशिश किए जाने की आशंका है। इसी वजह से उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने और संपत्ति से जुड़े विवाद में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

हालांकि, धमकी और अभद्रता से जुड़े आरोपों की पुष्टि भी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने के साथ-साथ मौके पर मौजूद लोगों से भी जानकारी ले सकती है।

वन विभाग और प्रशासन से जांच की मांग

पेड़ों की कटाई के मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस के साथ-साथ वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पुराने पेड़ों की कटाई के मामले में संबंधित नियमों और अनुमति की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।

इसके अलावा, वह यह भी चाहते हैं कि प्लॉट की बाउंड्री गिराए जाने और कथित कब्जे के प्रयास की अलग से जांच की जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और मौके की स्थिति का सत्यापन किया जाए। साथ ही, प्लॉट से जुड़े न्यायालयी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की भी जांच की जाए, ताकि विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

श्याम नगर में सामने आया यह मामला पेड़ों की कटाई, संपत्ति विवाद और सरकारी कर्मचारियों की कथित भूमिका से जुड़ा हुआ है। इसलिए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। एक ओर जहां प्लॉट मालिक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर आरोपित पक्ष और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

फिलहाल शिकायतकर्ता ने पुलिस, वन विभाग और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि जांच में पेड़ों की कटाई के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्लॉट की बाउंड्री गिराए जाने के आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।

कुल मिलाकर, कानपुर के श्याम नगर में पुराने पेड़ों की कटाई का मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित विभागों से जांच और आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। वहीं, पेड़ों की कटाई और संपत्ति विवाद से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।

You may have missed