डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: कांडला बंदरगाह पर पाकिस्तान से जुड़े सूखे खजूर की खेप जब्त, जांच तेज

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने भारत द्वारा पाकिस्तान से आयात पर लगाए गए प्रतिबंध के कथित उल्लंघन से जुड़े एक मामले का खुलासा किया है। केंद्रीय एजेंसी ने गुजरात के कांडला बंदरगाह पर सूखे खजूर से भरे 13 कंटेनरों को जब्त किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस खेप का बाजार मूल्य लगभग 3 करोड़ रुपये आंका गया है।

डीआरआई का कहना है कि आयात दस्तावेजों में माल को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आया हुआ बताया गया था, जबकि जांच में इसके पाकिस्तान से जुड़े होने की बात सामने आई। मामले में सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

डीआरआई के अनुसार, यह कार्रवाई विशेष खुफिया सूचना मिलने के बाद की गई। अधिकारियों ने कांडला बंदरगाह पर पहुंचे 13 कंटेनरों की जांच की, जिनमें सूखे खजूर की खेप थी।

जांच के दौरान दस्तावेजों और माल की आवाजाही का विश्लेषण किया गया। एजेंसी का दावा है कि आयात से जुड़े दस्तावेजों में मूल देश के संबंध में गलत जानकारी दी गई थी।

तीसरे देश के माध्यम से भेजे जाने का आरोप

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि खजूर पहले पाकिस्तान से दुबई भेजे गए। इसके बाद कथित रूप से उन्हें दूसरे कंटेनरों में स्थानांतरित कर भारत के लिए निर्यात किया गया।

डीआरआई के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य माल के वास्तविक मूल देश को छिपाना और लागू आयात प्रतिबंधों से बचने का प्रयास करना था।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि आयातकों ने मूल देश से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर दस्तावेजों में गलत घोषणा की।

सीमा शुल्क अधिनियम के तहत जब्ती

जांच के बाद पूरी खेप को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की संबंधित धाराओं के तहत जब्त कर लिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दस्तावेजों, आयात प्रक्रिया तथा संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जा रही है।

तूतीकोरिन बंदरगाह पर भी हुई थी कार्रवाई

डीआरआई ने बताया कि पिछले सप्ताह भी इसी प्रकार का एक मामला सामने आया था। तमिलनाडु के तूतीकोरिन बंदरगाह पर लगभग 1.4 करोड़ रुपये मूल्य की कथित पाकिस्तानी गुग्गुल राल की खेप जब्त की गई थी।

उस मामले में माल को सोमालिया से उत्पन्न प्राकृतिक राल के रूप में घोषित किया गया था, जबकि जांच में उसके पाकिस्तान से जुड़े होने का दावा किया गया।

दो लोगों की हुई गिरफ्तारी

गुग्गुल राल मामले में डीआरआई ने जांच के दौरान दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

एजेंसी के अनुसार, जांच में कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के माध्यम से माल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने का प्रयास सामने आया था। मामले की जांच अभी भी जारी है।

क्या है गुग्गुल राल का महत्व?

गुग्गुल राल (Commiphora Resin) भारत और पाकिस्तान के शुष्क क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण वन उत्पाद प्रजाति है।

इसे CITES Appendix-II में सूचीबद्ध किया गया है, जबकि IUCN Red List में इसे “अत्यंत संकटग्रस्त” श्रेणी में रखा गया है।

इसी कारण इस उत्पाद के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर विशेष निगरानी रखी जाती है।

पाकिस्तान से आयात पर लागू है प्रतिबंध

भारत सरकार ने विदेश व्यापार नीति 2023 में संशोधन करते हुए 2 मई 2025 से पाकिस्तान से उत्पन्न अथवा वहां से निर्यात किए जाने वाले सभी सामानों के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष आयात तथा पारगमन पर प्रतिबंध लागू किया है।

यह प्रतिबंध डीजीएफटी अधिसूचना संख्या 06/2025-26 के तहत लागू किया गया था।

डीआरआई का कहना है कि वर्तमान जांच में सामने आए दोनों मामले इसी प्रतिबंध के संभावित उल्लंघन से जुड़े पाए गए हैं।

तस्करी और सीमा शुल्क धोखाधड़ी पर विशेष निगरानी

डीआरआई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दौरान गलत घोषणा, जाली दस्तावेजों और प्रतिबंधित आयात से जुड़े मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

एजेंसी का उद्देश्य ऐसे संगठित नेटवर्क की पहचान करना है जो कथित रूप से सीमा शुल्क नियमों का उल्लंघन कर अवैध व्यापार करने का प्रयास करते हैं।

जांच अभी जारी

अधिकारियों के अनुसार, मामले में दस्तावेजों की जांच, माल की उत्पत्ति की पुष्टि और संबंधित पक्षों की भूमिका का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है।

यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कांडला बंदरगाह पर डीआरआई की कार्रवाई भारत के आयात नियमों के अनुपालन और सीमा शुल्क निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

एजेंसी के अनुसार, सूखे खजूर की खेप के मूल देश से संबंधित कथित गलत घोषणा की जांच जारी है। इससे पहले तूतीकोरिन बंदरगाह पर भी इसी प्रकार का मामला सामने आ चुका है। दोनों मामलों की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम कानूनी निष्कर्ष सामने आएंगे।

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