वाराणसी में पकड़ लिया गया फर्जी दरोगा, नौकरी दिलाने का देता था झांसा – पुलिस कर रही है क़ानूनी कार्रवाई

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रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय 

वाराणसी: वाराणसी कमिश्नरेट की चोलापुर पुलिस ने कथित रूप से फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देने और अवैध रूप से धन वसूलने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत की गई। आरोपी के कब्जे से पुलिस वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, कथित नियुक्ति पत्र, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री बरामद होने का दावा किया गया है।

पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने किन-किन लोगों को अपना शिकार बनाया तथा क्या इस प्रकरण में अन्य व्यक्तियों की भी कोई भूमिका है।

ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत हुई कार्रवाई

चोलापुर थाना पुलिस ने अपराध नियंत्रण और धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई के उद्देश्य से चलाए जा रहे ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी हुई थी।

इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति स्वयं को पुलिस का दरोगा बताकर लोगों से संपर्क कर रहा है और नौकरी दिलाने सहित अन्य कार्यों के नाम पर धन की मांग कर रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

जानिए आरोपी की पहचान और यह हुई बरामदगी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजन प्रजापति के रूप में हुई है।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कथित रूप से निम्नलिखित सामग्री बरामद की—

  • पुलिस की खाकी वर्दी
  • स्टार, बैज, बेल्ट और कैप
  • तीन कथित फर्जी पुलिस पहचान पत्र
  • कथित फर्जी नियुक्ति पत्र
  • दो मोबाइल फोन
  • 1200 रुपये नकद
  • अन्य संबंधित सामग्री

पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका उपयोग किन-किन मामलों में किया गया।

नौकरी दिलाने का झांसा देने का आरोप

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों पर प्रभाव डालता था।

आरोप है कि वह पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर लोगों से धन लेता था। इसके अलावा वह कथित रूप से चेकिंग अभियान का हवाला देकर भी लोगों से अवैध रूप से पैसे वसूलने का प्रयास करता था।

हालांकि, आरोपी के कथित स्वीकारोक्ति बयान का मूल्यांकन न्यायिक प्रक्रिया के दौरान संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।

एक लाख रुपये ठगने का दावा

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने सिंधौरा क्षेत्र के एक युवक से कथित रूप से एक लाख रुपये लेने की बात स्वीकार की है।

हालांकि, इस दावे की विस्तृत जांच अभी जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या ऐसे अन्य पीड़ित भी हैं जिन्होंने आरोपी को धनराशि दी थी।

यदि जांच में अतिरिक्त शिकायतें सामने आती हैं, तो उन्हें भी विवेचना में शामिल किया जाएगा।

फर्जी दस्तावेजों की जांच जारी

पुलिस ने आरोपी से बरामद कथित फर्जी पहचान पत्र और नियुक्ति पत्रों को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है।

अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों की तकनीक और विधिक जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्हें किस प्रकार तैयार किया गया और उनका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया।

पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच

जांच एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि आरोपी अकेले कार्य कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे। यदि जांच में किसी संगठित गिरोह या अन्य सहयोगियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एडीसीपी वरुणा जोन की जानकारी

एडीसीपी वरुणा जोन लिपि नागायच के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है तथा सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की अपील

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को धनराशि न दें।

यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर नौकरी दिलाने, भर्ती कराने या अन्य किसी सरकारी कार्य के नाम पर पैसे की मांग करता है, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित विभाग को दें।

पुलिस का कहना है कि सरकारी भर्तियां केवल निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाती हैं।

सतर्कता से रोकी जा सकती हैं ऐसी घटनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंट के झांसे में नहीं आना चाहिए।

सरकारी भर्ती से संबंधित जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइटों और संबंधित विभागों के माध्यम से ही प्राप्त करनी चाहिए। इससे धोखाधड़ी की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है।

वाराणसी कमिश्नरेट की चोलापुर पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई को कथित नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि आरोपी फर्जी दरोगा बनकर लोगों को गुमराह करता था और उनसे धन वसूलता था।

फिलहाल आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच जारी है। पुलिस पूरे मामले से जुड़े अन्य संभावित पीड़ितों और साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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