गुरु पूर्णिमा 2026: गोवर्धन में गुरु पूजा के लिए उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, शिष्यों ने लिया सुख-समृद्धि और सदाचार का आशीर्वाद

4a505ea8-49c7-42c6-988a-49aa7324ec38

रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा/गोवर्धन: ब्रजभूमि के पावन धाम गोवर्धन में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। गिरिराज महाराज की तलहटी स्थित प्राचीन एवं आधुनिक आश्रमों, मठों और मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों का विधि-विधान से पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और जीवन में सदाचार, सेवा तथा आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

पूरे दिन गिरिराज परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अनेक स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही गिरिराज महाराज की परिक्रमा करने वालों का भी लगातार तांता लगा रहा। धार्मिक वातावरण और भक्ति भाव से पूरा गोवर्धन क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।

गुरु-शिष्य परंपरा का दिखा अद्भुत स्वरूप

भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन का मार्गदर्शक माना गया है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्यों ने अपने गुरुजनों के चरणों में पुष्प अर्पित कर उनका पूजन किया और आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर विभिन्न आश्रमों में गुरुओं ने अपने शिष्यों को आध्यात्मिक जीवन के महत्व, संयम, सेवा और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने समाज में सद्भाव, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा भी दी।

गिरिराज तलहटी के आश्रमों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गिरिराज तलहटी स्थित अनेक प्रमुख आश्रमों और मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने सुबह से ही दर्शन, पूजन और गुरु वंदना में भाग लिया।

विशेष रूप से बड़ी परिक्रमा मार्ग स्थित संकटहरण योगाश्रम में श्री महंत श्रीश्री 1008 योगीराज रामआसरेदास त्यागी जी महाराज के सान्निध्य में गुरु पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विनोद अग्रवाल सहित अनेक सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया और गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित की।

कई प्रमुख मंदिरों और आश्रमों में हुए धार्मिक आयोजन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोवर्धन के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • चकलेश्वर स्थित राधा श्याम सुंदर मंदिर
  • महंत रामकृष्ण दास महाराज का आश्रम
  • लक्ष्मणजी मंदिर
  • महंत अशोक दास महाराज
  • निर्मोही अखाड़ा
  • महंत सीताराम दास
  • गुर्जर आश्रम
  • महंत बलराम दास जी महाराज

सहित अनेक धार्मिक स्थलों पर गुरु पूजन, भजन-कीर्तन, सत्संग और आशीर्वाद समारोह आयोजित किए गए।

सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ली गुरु दीक्षा

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विभिन्न संत-महात्माओं से गुरु दीक्षा भी ग्रहण की। गुरुओं ने अपने शिष्यों को गुरु मंत्र प्रदान करते हुए ईश्वर भक्ति, सत्य, सेवा, अनुशासन और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

धार्मिक मान्यता है कि गुरु दीक्षा व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत मानी जाती है। इसी कारण इस दिन दीक्षा ग्रहण करने का विशेष महत्व माना जाता है।

गुरुओं ने दिया आध्यात्मिक जीवन का संदेश

संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग दिखाने वाला प्रेरणास्रोत भी होता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों को मजबूत बनाने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व और भी बढ़ गया है।

इसके अलावा उन्होंने युवाओं से नशामुक्ति, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा जैसे विषयों पर भी सकारात्मक योगदान देने की अपील की।

भंडारों में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गिरिराज परिक्रमा मार्ग सहित कई स्थानों पर सेवाभावियों द्वारा विशाल भंडारों का आयोजन किया गया।

श्रद्धालुओं ने दर्शन और परिक्रमा के बाद प्रसाद ग्रहण किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया।

परिक्रमा मार्ग पर दिनभर रही चहल-पहल

गुरु पूर्णिमा के कारण गोवर्धन में दिनभर श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रही। गिरिराज महाराज की सात कोसी परिक्रमा करने के लिए दूर-दराज़ से आए भक्त सुबह से ही परिक्रमा मार्ग पर दिखाई दिए।

हालांकि प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने श्रद्धालुओं की सुविधा, पेयजल, चिकित्सा सहायता तथा यातायात व्यवस्था को लेकर आवश्यक प्रबंध किए, जिससे दर्शन और परिक्रमा सुचारु रूप से संपन्न हो सकी।

गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, ज्ञान प्राप्त करने और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेने की परंपरा है।

मान्यता है कि गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति अज्ञान से ज्ञान की ओर अग्रसर होता है। इसलिए भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान सम्मान दिया गया है।

गोवर्धन में गुरु पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष भी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। गिरिराज तलहटी के विभिन्न आश्रमों, मंदिरों और मठों में हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर सुख-समृद्धि और सदाचार का आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु दीक्षा, भजन-कीर्तन, सत्संग, भंडारों और गिरिराज परिक्रमा के माध्यम से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। यह आयोजन भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

You may have missed