श्रावस्ती में खाद गड्ढा भूमि पर गहराया अतिक्रमण का विवाद: जांच प्रक्रिया और कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

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रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला 

श्रावस्ती: जनपद श्रावस्ती के ग्राम सभा सुविखा में स्थित खाद गड्ढा भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में न्यायालय के निर्देश होने के बावजूद पूरी कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही उन्होंने आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दर्ज शिकायत के निस्तारण और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की पुनः निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग या जांच अधिकारी की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

खाद गड्ढा भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद

जानकारी के अनुसार विवाद ग्राम सभा सुविखा की खाद गड्ढा भूमि से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की इस भूमि पर कथित रूप से अवैध अतिक्रमण किया गया है।

उनका आरोप है कि इस मामले में पूर्व में न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन अब तक संपूर्ण कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी कारण उन्होंने प्रशासन से दोबारा प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

आईजीआरएस शिकायत के निस्तारण पर उठाए सवाल

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने मामले को लेकर आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।

उनका आरोप है कि शिकायत के निस्तारण में वास्तविक तथ्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया और जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया गया। उनका कहना है कि पोर्टल पर शिकायत का निस्तारण दिखा दिया गया, जबकि मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ।

जांच प्रक्रिया को लेकर लगाए गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान जिन लोगों के बयान दर्ज किए गए, वे विवादित ग्राम सभा से संबंधित नहीं थे। उनका दावा है कि जहां विवाद ग्राम सभा सुविखा का है, वहीं कथित रूप से शाहपुर कठौतिया गांव के लोगों के बयान गवाह के रूप में दर्ज किए गए।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो जांच की निष्पक्षता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

फर्जी रिपोर्ट लगाने का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जांच के दौरान वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप रिपोर्ट तैयार नहीं की गई। उनका कहना है कि कथित रूप से ऐसे व्यक्तियों के बयान और हस्ताक्षर दर्ज किए गए, जिनका विवादित भूमि से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

इसी आधार पर उन्होंने जांच रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही संभव होगी।

निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि यदि जांच पारदर्शी तरीके से कराई जाती है, तो पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि जांच प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शी जांच और तथ्यात्मक रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

यदि किसी पक्ष को जांच प्रक्रिया पर आपत्ति होती है, तो संबंधित विभाग द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर पुनः परीक्षण किया जाना प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करता है।

सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा का महत्व

खाद गड्ढा, चरागाह, तालाब और अन्य ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमि ग्रामीण विकास और सामुदायिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। विभागीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी भूमि से जुड़े विवादों का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान आवश्यक है, ताकि सार्वजनिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

अधिकारियों से कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने संबंधित जांच अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि सामने आती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

आधिकारिक पक्ष का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग की ओर से शिकायतकर्ता के आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी। ऐसी स्थिति में मामले के सभी तथ्यों की पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

श्रावस्ती के ग्राम सभा सुविखा में खाद गड्ढा भूमि पर कथित अतिक्रमण और आईजीआरएस शिकायत के निस्तारण को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुनः निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, प्रशासनिक दृष्टि से यह आवश्यक होगा कि मामले की जांच उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर निष्पक्ष ढंग से की जाए। अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

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