कानपुर में भगवान राजा दक्ष प्रजापति जयंती धूमधाम से मनाई गई, प्रजापति महासभा ने समाज की एकता पर दिया जोर

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: नगर के बर्रा बाईपास चौराहा स्थित दिव्यांशी गार्डन में मंगलवार को प्रजापति महासभा कानपुर, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में भगवान राजा दक्ष प्रजापति जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान राजा दक्ष प्रजापति की प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चारण एवं विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित पदाधिकारियों एवं समाज के लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा एक-दूसरे को मिष्ठान खिलाकर जयंती की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने भगवान राजा दक्ष प्रजापति के जीवन, उनके योगदान तथा समाज के प्रति उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और संगठन की मजबूती पर भी विशेष जोर दिया गया।

वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

जयंती समारोह का शुभारंभ पंडित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण और विधिवत पूजन के साथ किया गया। इसके पश्चात प्रजापति महासभा के पदाधिकारियों ने भगवान राजा दक्ष प्रजापति की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की।

कार्यक्रम का संचालन प्रमुख महासचिव मदनपाल प्रजापति ने किया। उन्होंने समाज के लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने का माध्यम बनते हैं।

भगवान राजा दक्ष प्रजापति के जीवन पर डाला प्रकाश

समारोह को संबोधित करते हुए प्रजापति महासभा के अध्यक्ष विनोद कुमार प्रजापति ने भगवान राजा दक्ष प्रजापति के जीवन और धार्मिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राजा दक्ष प्रजापति ब्रह्मा जी के मानस पुत्र माने जाते हैं।

उन्होंने बताया कि उनका विवाह प्रस्तुति एवं बीरणी से हुआ था तथा उनकी अनेक पुत्रियों का विवाह विभिन्न ऋषियों और देवताओं से हुआ, जिनके माध्यम से सृष्टि के विस्तार का उल्लेख पुराणों में मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान राजा दक्ष प्रजापति भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और समाज को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत पर जोर

वक्ताओं ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए संगठन, शिक्षा और सामाजिक समरसता आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से समाज की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने तथा शिक्षा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के आह्वान का किया उल्लेख

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा 29 जुलाई को प्रदेशभर में भगवान राजा दक्ष प्रजापति जयंती मनाने के आह्वान का भी उल्लेख किया।

प्रजापति महासभा के पदाधिकारियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे समाज के सम्मान और पहचान को मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस संबंध में अपने विचार भी रखे।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी की अपील

समारोह के दौरान कुछ वक्ताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी राजनीतिक राय व्यक्त की और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। यह विचार संबंधित वक्ताओं के व्यक्तिगत एवं संगठनात्मक वक्तव्य थे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भगवान राजा दक्ष प्रजापति की जयंती मनाना, समाज को संगठित करना और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश देना रहा।

बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे उपस्थित

जयंती समारोह में समाज के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। प्रमुख रूप से विनोद कुमार प्रजापति, मदनपाल प्रजापति, मुकेश वर्मा प्रजापति, लाल प्रजापति, आलोक प्रजापति, सरोज प्रजापति, राजेश प्रजापति, बृजमोहन प्रजापति, अनूप प्रजापति, आकाश प्रजापति, शोभित प्रजापति, प्रेम प्रकाश दुबे, संगम लाल कुरील, सौरभ कटियार, मनोज प्रजापति सहित बड़ी संख्या में युवा और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कानपुर के दिव्यांशी गार्डन में आयोजित भगवान राजा दक्ष प्रजापति जयंती समारोह श्रद्धा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। कार्यक्रम में भगवान राजा दक्ष प्रजापति के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालने के साथ समाज को संगठित रहने, शिक्षा को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया गया। वहीं, आयोजन में विभिन्न सामाजिक और सार्वजनिक विषयों पर भी वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए, जिससे यह कार्यक्रम धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया।

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