गोरखधाम एक्सप्रेस में महिला ने बेटे को दिया जन्म, महिलाओं ने चादर का घेरा बनाकर कराई डिलीवरी
रिपोर्ट-कृष्णा शर्मा
कानपुर: गोरखधाम सुपरफास्ट एक्सप्रेस में यात्रा कर रही एक गर्भवती महिला ने चलती ट्रेन में सुरक्षित रूप से बेटे को जन्म दिया। इस पूरी घटना में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कोच में मौजूद महिला यात्रियों ने निभाई, जिन्होंने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए चादर का घेरा बनाकर महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। वहीं, रेलवे प्रशासन की तत्परता भी देखने को मिली।
सूचना मिलते ही टीटीई, आरपीएफ और कानपुर सेंट्रल स्टेशन की मेडिकल टीम तुरंत सक्रिय हो गई। बाद में मां और नवजात को उर्सला अस्पताल भेजा गया, जहां दोनों को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया।
यह घटना न केवल मानवीय संवेदनाओं की मिसाल बनी, बल्कि यह भी दिखाती है कि आपात स्थिति में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास से किसी भी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है।
गाजियाबाद और कानपुर के बीच शुरू हुई प्रसव पीड़ा
जानकारी के अनुसार, गोरखधाम सुपरफास्ट एक्सप्रेस पंजाब के भठिंडा से गोरखपुर के बीच नियमित रूप से संचालित होती है। रविवार को जब ट्रेन गाजियाबाद और कानपुर के बीच सफर कर रही थी, तभी एस-1 कोच में यात्रा कर रही गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
शुरुआत में महिला और उसके परिजन काफी घबरा गए। हालांकि, कोच में मौजूद यात्रियों ने तुरंत स्थिति को समझा और बिना समय गंवाए रेलवे कर्मचारियों को इसकी सूचना दी। इसी दौरान टीटीई और आरपीएफ ने रेलवे कंट्रोल को पूरे मामले से अवगत कराया ताकि अगले स्टेशन पर आवश्यक चिकित्सीय व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
महिला यात्रियों ने दिखाई हिम्मत
प्रसव पीड़ा बढ़ने के साथ स्थिति गंभीर होने लगी। ऐसे में कोच में मौजूद महिला यात्रियों ने साहस और समझदारी का परिचय दिया। उन्होंने पुरुष यात्रियों को कुछ समय के लिए बाहर जाने का अनुरोध किया और चादरों की मदद से एक सुरक्षित घेरा तैयार किया, जिससे महिला की निजता भी बनी रही और प्रसव भी सुरक्षित तरीके से कराया जा सका।
इसी दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए सुबह लगभग 5:10 बजे महिला का सफल प्रसव कराया। कुछ ही देर बाद एक स्वस्थ बेटे का जन्म हुआ। बच्चे के जन्म के साथ ही पूरे डिब्बे में खुशी का माहौल बन गया और यात्रियों ने परिवार को शुभकामनाएं दीं।
सहयात्री शीला तिवारी ने निभाई अहम भूमिका
बताया गया कि एस-1 कोच की सीट नंबर 32 पर यात्रा कर रही गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर बस्ती निवासी सहयात्री शीला तिवारी ने सबसे पहले इसकी जानकारी टीटीई को दी।
इसके बाद टीटीई ने तत्काल आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर महिला को सीट उपलब्ध कराई, ताकि प्रसव के दौरान उसे किसी प्रकार की असुविधा न हो। वहीं, महिला यात्रियों ने लगातार उसका हौसला बढ़ाया और पूरे समय उसके साथ रहीं।
रेलवे प्रशासन ने दिखाई तत्परता
जैसे ही घटना की सूचना रेलवे प्रशासन तक पहुंची, कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर मेडिकल सहायता की तैयारी शुरू कर दी गई। आरपीएफ, “मेरी सहेली” टीम और रेलवे के चिकित्सा कर्मियों को प्लेटफॉर्म नंबर-9 पर पहले से तैनात कर दिया गया।
सोमवार सुबह करीब 6:25 बजे ट्रेन के कानपुर सेंट्रल पहुंचते ही डॉक्टर रितेश और उनकी टीम ने मां और नवजात की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की। जांच में दोनों पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। इसके बाद एंबुलेंस की सहायता से उन्हें उर्सला अस्पताल भेज दिया गया, जहां आगे की चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित की गई।
पति ने सहयात्रियों का जताया आभार
महिला के पति फिरोज ने बताया कि जब उनकी पत्नी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो वे काफी घबरा गए थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि चलती ट्रेन में इस स्थिति का सामना कैसे किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि कोच में मौजूद महिला यात्रियों ने हिम्मत और समझदारी नहीं दिखाई होती, तो स्थिति काफी कठिन हो सकती थी। उन्होंने सभी सहयात्रियों, टीटीई, आरपीएफ और रेलवे प्रशासन का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग से मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
यात्रियों ने दी बधाई
बेटे के जन्म के बाद पूरे डिब्बे में खुशी का माहौल बन गया। यात्रियों ने नवजात के जन्म पर परिवार को बधाई दी और महिला यात्रियों के साहस की सराहना की। कई यात्रियों ने कहा कि संकट की घड़ी में जिस प्रकार सभी ने मिलकर मदद की, वह सामाजिक एकता और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
रेलवे की “मेरी सहेली” टीम की भूमिका
रेलवे की “मेरी सहेली” पहल का उद्देश्य महिला यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। इस घटना में भी टीम ने समय रहते मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने और मां-बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में समय पर सूचना देना और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला।
आपात स्थिति में क्या करें?
यदि किसी ट्रेन में यात्रा के दौरान किसी यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या प्रसव जैसी आपात स्थिति उत्पन्न हो, तो तुरंत टीटीई, आरपीएफ या रेलवे हेल्पलाइन को सूचना देनी चाहिए। इसके अलावा, यदि आसपास प्रशिक्षित व्यक्ति मौजूद हों, तो उनकी सहायता ली जा सकती है। समय पर सूचना और समन्वय से गंभीर परिस्थितियों का भी सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है।
मानवीय सहयोग की मिसाल बनी घटना
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि आपात परिस्थितियों में सामूहिक सहयोग, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय कितने महत्वपूर्ण होते हैं। सहयात्री महिलाओं की तत्परता, रेलवे कर्मचारियों की सक्रियता और मेडिकल टीम की समय पर उपलब्धता ने मां और नवजात दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की। यही कारण है कि यह घटना मानवता, सहयोग और जिम्मेदारी की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।

