29 जुलाई को होगा सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त समारोह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी अध्यक्षता
रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी: प्राच्य विद्या और संस्कृत शिक्षा के प्रतिष्ठित केंद्र सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 44 वां दीक्षान्त समारोह 29 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, समारोह का आयोजन सुबह 9 बजे विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल करेंगी।
दीक्षान्त समारोह को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। इस अवसर पर शैक्षिक सत्र 2025-26 के विद्यार्थियों को उपाधियां और प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा, विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां और प्रमाण-पत्र डिजिटल माध्यम से डीजी लॉकर के जरिए भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रो. आशुतोष शर्मा होंगे मुख्य अतिथि
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षान्त समारोह में भारत के प्रख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और पद्मश्री सम्मानित प्रो. आशुतोष शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
प्रो. आशुतोष शर्मा नैनोप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सचिव के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है। वर्तमान में वह आईआईटी कानपुर में इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
समारोह में प्रो. आशुतोष शर्मा दीक्षान्त भाषण देंगे और स्नातकों को संबोधित करेंगे। उनके अनुभव और वैज्ञानिक क्षेत्र में योगदान को देखते हुए विद्यार्थियों के लिए उनका संबोधन विशेष महत्व रखेगा।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी समारोह की अध्यक्षता
दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल करेंगी।
विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह में कुलाधिपति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को शिक्षा पूरी करने के बाद औपचारिक रूप से उपाधियां प्रदान की जाती हैं।
राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला यह समारोह विश्वविद्यालय के लिए विशेष अवसर माना जा रहा है। समारोह में शिक्षा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को भी महत्व मिलने की संभावना है।
उच्च शिक्षा मंत्री समेत कई अतिथि होंगे मौजूद
समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी कार्यक्रम में अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा समारोह में स्नातकों को उपाधियां प्रदान करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी रहेगी।
कार्यक्रम को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन की ओर से समारोह के विभिन्न पहलुओं को व्यवस्थित करने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
विद्यार्थियों को डीजी लॉकर के माध्यम से भी मिलेंगे प्रमाण-पत्र
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए डिजिटल व्यवस्था को भी महत्व दिया है। शैक्षिक सत्र 2025-26 के विद्यार्थियों को उपाधियां और प्रमाण-पत्र डीजी लॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज डिजिटल रूप में प्राप्त करने में सुविधा होगी। इसके अलावा, भविष्य में उच्च शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं में इन दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकेगा।
डिजिटल माध्यम से प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी बदलावों के अनुरूप मानी जा रही है।
1791 में संस्कृत कॉलेज के रूप में हुई थी स्थापना
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली है। यह संस्थान वर्ष 1791 में संस्कृत कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया था।
बाद में वर्ष 1973 से यह संस्थान सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से संचालित हो रहा है। इस लंबी शैक्षिक यात्रा के दौरान विश्वविद्यालय ने संस्कृत, प्राच्य विद्या और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य संस्कृत भाषा और भारतीय परंपरागत ज्ञान को उच्च शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाना रहा है। आज भी यह संस्थान देश में संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।
कई राज्यों के संस्कृत महाविद्यालय विश्वविद्यालय से संबद्ध
वर्तमान में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के संस्कृत महाविद्यालय संबद्ध हैं।
विश्वविद्यालय से नई दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, लेह और अरुणाचल प्रदेश के अनेक संस्कृत महाविद्यालय जुड़े हुए हैं।
इससे विश्वविद्यालय के शैक्षिक प्रभाव और संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में इसकी व्यापक भूमिका का अंदाजा लगाया जा सकता है। अलग-अलग राज्यों के विद्यार्थी और संस्थान विश्वविद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।
शिक्षा और भारतीय संस्कृति का समन्वय
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षान्त समारोह केवल उपाधि प्रदान करने का औपचारिक कार्यक्रम नहीं माना जाता। यह भारतीय शिक्षा परंपरा और संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, दीक्षान्त समारोह भारतीय परंपरा के ‘समावर्तन संस्कार’ की गरिमा को आगे बढ़ाता है। समावर्तन संस्कार में शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थी अपने जीवन के अगले चरण की ओर आगे बढ़ते हैं।
इसी परंपरा के अनुरूप दीक्षान्त समारोह शिक्षा, संस्कार और संस्कृति के समन्वय का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को उनके शैक्षिक प्रयासों के लिए सम्मानित किया जाता है।
स्नातकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर
44वां दीक्षान्त समारोह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। लंबे समय तक अध्ययन और मेहनत के बाद विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से उनकी उपाधियां प्रदान की जाएंगी।
समारोह में विद्यार्थियों को शिक्षकों, अतिथियों और विश्वविद्यालय प्रशासन से मार्गदर्शन भी मिलेगा। इसके अलावा, मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. आशुतोष शर्मा का संबोधन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य समारोह को गरिमापूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आयोजित करना है।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की भूमिका
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा दीक्षान्त समारोह में स्नातकों को उपाधियां प्रदान करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से समारोह की तैयारियों और शैक्षिक सत्र से जुड़े विद्यार्थियों की उपाधियों को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय प्रशासन दीक्षान्त समारोह को सफल बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं पर काम कर रहा है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की शैक्षिक उपलब्धियों और संस्कृत शिक्षा की भूमिका पर भी चर्चा हो सकती है।
संस्कृत शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण आयोजन
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त समारोह संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। एक ओर जहां विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां प्रदान की जाएंगी, वहीं दूसरी ओर भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत शिक्षा की भूमिका भी प्रमुखता से सामने आएगी।
समारोह में देश के प्रमुख वैज्ञानिक और शिक्षाविद् प्रो. आशुतोष शर्मा की मौजूदगी शिक्षा के पारंपरिक और आधुनिक क्षेत्रों के बीच संवाद का अवसर भी प्रदान करेगी।
इस प्रकार, कार्यक्रम में संस्कृत और प्राच्य विद्या के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और शिक्षा के महत्व पर भी विचारों का आदान-प्रदान होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, वाराणसी स्थित सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त समारोह 29 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में आयोजित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल समारोह की अध्यक्षता करेंगी।
भारत के प्रख्यात वैज्ञानिक और पद्मश्री सम्मानित प्रो. आशुतोष शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर स्नातकों को दीक्षान्त भाषण देंगे। वहीं, उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय विशिष्ट अतिथि और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा स्नातकों को उपाधियां प्रदान करेंगे। शैक्षिक सत्र 2025-26 के विद्यार्थियों को उपाधियां और प्रमाण-पत्र डीजी लॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
वर्ष 1791 में संस्कृत कॉलेज के रूप में स्थापित यह संस्थान वर्ष 1973 से सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से संचालित है। आज यह देश के विभिन्न राज्यों के संस्कृत महाविद्यालयों से जुड़ा हुआ है।

