मथुरा-वृंदावन के वार्डों में मूलभूत सुविधाओं की चुनौती बनी चर्चा: पढ़िए क्यों उठने लगे सवाल – खामोश हैं जिम्मेदारी – तुरंत जानिए

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा: धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विश्वभर में प्रसिद्ध मथुरा-वृंदावन नगर निगम क्षेत्र इन दिनों मूलभूत नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर चर्चा में है। नगर निगम के विभिन्न वार्डों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें नियमित सफाई का अभाव, सीवर लाइन चोक होना, बरसात के दौरान जलभराव, खराब स्ट्रीट लाइटें, टूटी सड़कें तथा अतिक्रमण जैसी समस्याएं प्रमुख रूप से शामिल हैं।

हालांकि नगर निगम ने नागरिकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल, जनसुनवाई व्यवस्था तथा विभिन्न विभागों के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रणाली विकसित की है, लेकिन कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अनेक मामलों में शिकायतों का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। उनका आरोप है कि कई शिकायतों का निस्तारण कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है और कुछ समय बाद वही समस्याएं फिर से सामने आ जाती हैं।

नगर निगम की पूर्व वाली व्यवस्था, फिर भी बनी हुई हैं चुनौतियां

नगर निगम द्वारा सफाई, जल निकासी, सीवर, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं। इसके अलावा अधिकारियों द्वारा नियमित जनसुनवाई आयोजित कर नागरिकों की शिकायतें भी सुनी जाती हैं।

इसके बावजूद नागरिकों का कहना है कि कई वार्डों में समस्याओं के समाधान की गति अपेक्षाकृत धीमी है। उनका मानना है कि यदि शिकायतों के निस्तारण की नियमित निगरानी और जवाबदेही तय की जाए, तो अधिकांश समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जा सकता है।

सफाई व्यवस्था को लेकर सबसे अधिक शिकायतें

स्थानीय लोगों के अनुसार कई वार्डों में नियमित सफाई नहीं होने से कूड़े के ढेर जमा हो जाते हैं। इससे न केवल आसपास का वातावरण प्रभावित होता है, बल्कि नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

नागरिकों का कहना है कि समय पर कूड़ा उठाने, नालियों की सफाई और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए। उनका मानना है कि यदि सफाई व्यवस्था में निरंतरता बनी रहे, तो कई समस्याओं को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है।

बरसात में जलभराव बनता है बड़ी चुनौती

बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या कई वार्डों में प्रमुख चिंता का विषय बन जाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नालियों की समय पर सफाई नहीं होने और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने से कई स्थानों पर पानी जमा हो जाता है।

इसके कारण आवागमन में कठिनाई होती है और स्थानीय लोगों को दैनिक कार्यों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नागरिकों का सुझाव है कि मानसून से पहले नालियों की व्यापक सफाई और जल निकासी व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाए।

सीवर लाइन और ओवरफ्लो की शिकायतें

नगर निगम के शिकायत तंत्र में सीवर लाइन चोक होने तथा ओवरफ्लो से संबंधित शिकायतें भी लगातार दर्ज हो रही हैं। कई नागरिकों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में सीवर की समस्या बार-बार सामने आती है, जिससे आसपास का वातावरण प्रभावित होता है।

लोगों का मानना है कि केवल अस्थायी समाधान के बजाय स्थायी तकनीकी सुधार किए जाएं, ताकि समस्या की पुनरावृत्ति कम हो सके।

खराब स्ट्रीट लाइट से प्रभावित होती है सुविधा

कई मोहल्लों में लंबे समय से खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को लेकर भी नागरिकों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण रात्रि के समय आवागमन में असुविधा होती है।

स्थानीय लोगों का सुझाव है कि नगर निगम प्रत्येक वार्ड में नियमित निरीक्षण कर खराब स्ट्रीट लाइटों की सूची तैयार करे और निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्हें ठीक कराया जाए।

टूटी सड़कें और अधूरे निर्माण कार्य

नगर निगम क्षेत्र के कुछ हिस्सों में टूटी सड़कें और अधूरे निर्माण कार्य भी लोगों की परेशानी का कारण बने हुए हैं। नागरिकों का कहना है कि सड़कें क्षतिग्रस्त होने से दैनिक आवागमन प्रभावित होता है, जबकि अधूरे निर्माण कार्यों से भी असुविधा बढ़ती है।

उन्होंने मांग की है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें तय समय में पूरा कराया जाए।

बाजारों में अतिक्रमण से प्रभावित हो रहा यातायात

शहर के कुछ बाजार क्षेत्रों में अतिक्रमण की समस्या भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और पैदल चलने वाले लोगों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

नागरिकों ने नियमित अभियान चलाकर सार्वजनिक मार्गों को व्यवस्थित रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।

वार्डवार रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने सुझाव दिया है कि नगर निगम प्रत्येक वार्ड का शिकायत रजिस्टर, प्राप्त शिकायतों की संख्या, उनके निस्तारण की स्थिति तथा लंबित मामलों का विवरण सार्वजनिक पोर्टल पर नियमित रूप से जारी करे।

उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस वार्ड में कितनी शिकायतें आईं और उनका समाधान किस स्तर तक हुआ।

समयबद्ध समाधान और जवाबदेही पर जोर

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि शिकायतों के निस्तारण के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

उनके अनुसार यदि वार्ड स्तर पर नियमित निरीक्षण, शिकायतों की निगरानी और प्रदर्शन रिपोर्ट की समीक्षा की जाए, तो सफाई, सीवर, स्ट्रीट लाइट और जल निकासी जैसी अधिकांश समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।

नगर निगम की सेवाओं को और प्रभावी बनाने की अपेक्षा

नगर निगम द्वारा संचालित शिकायत पोर्टल और जनसुनवाई व्यवस्था नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं के साथ-साथ शिकायतों के स्थायी और गुणवत्तापूर्ण समाधान पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शिता और जनसहभागिता के माध्यम से नगर निगम की सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

मथुरा-वृंदावन नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में सफाई, सीवर, जलभराव, स्ट्रीट लाइट, टूटी सड़कें और अतिक्रमण जैसी समस्याओं को लेकर नागरिक लगातार अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। वहीं नगर निगम शिकायत निवारण के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं संचालित कर रहा है।

ऐसे में नागरिकों की अपेक्षा है कि शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा तय हो, वार्डवार प्रदर्शन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा मूलभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और नागरिक मिलकर समन्वित प्रयास करें, तो इन समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

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