नेपाल के नए 1 और 2 रुपये के सिक्कों पर विवाद, राजनीतिक नक्शे को लेकर भारत-नेपाल में फिर चर्चा

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: नेपाल सरकार द्वारा नए 1 रुपये और 2 रुपये के सिक्के जारी करने की योजना ने एक बार फिर भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद से जुड़े मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

नए सिक्कों के डिजाइन, इस्तेमाल की जाने वाली धातु और उन पर अंकित प्रतीकों को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। खासतौर पर 1 रुपये के सिक्के पर नेपाल के राजनीतिक नक्शे को लेकर विवाद बढ़ गया है, जिसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों को नेपाल के हिस्से के रूप में दिखाने को लेकर भारत पहले भी आपत्ति जता चुका है।

हालांकि, इस पूरे मामले में अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि नेपाल ने नए सिक्के के डिजाइन में बदलाव करते हुए विवादित नक्शे को हटाने का फैसला किया है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में कहा गया कि नेपाल अपने पुराने राजनीतिक नक्शे को ही जारी रखने की तैयारी कर रहा है। इसलिए फिलहाल इस मामले को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

नए सिक्कों की डिजाइन और धातु को लेकर फैसला

नेपाल राष्ट्र बैंक की ओर से नए सिक्कों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, 1 रुपये और 2 रुपये मूल्यवर्ग के सिक्कों को पहले की तुलना में अलग धातु से तैयार करने की योजना है। इन सिक्कों में स्टील आधारित धातु के इस्तेमाल की बात कही जा रही है।

नेपाल सरकार का उद्देश्य सिक्कों के निर्माण खर्च को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। मौजूदा समय में सिक्कों को तैयार करने में आने वाली लागत को देखते हुए कम खर्च वाली धातु का विकल्प चुना जा रहा है। स्टील आधारित सिक्के लंबे समय तक चलने वाले और अपेक्षाकृत किफायती माने जाते हैं।

इसके अलावा, सिक्कों के डिजाइन में सांस्कृतिक और राष्ट्रीय प्रतीकों को शामिल करने पर भी विचार किया गया है। हालांकि, 1 रुपये के सिक्के पर राजनीतिक नक्शे को लेकर विवाद ने पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।

राजनीतिक नक्शे को लेकर क्यों है विवाद?

भारत और नेपाल के बीच लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र को लेकर लंबे समय से मतभेद रहा है। नेपाल ने वर्ष 2020 में अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें इन क्षेत्रों को नेपाल की सीमा के अंतर्गत दिखाया गया था।

भारत ने उस समय नेपाल के इस कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह ऐतिहासिक तथ्यों और आपसी समझ के खिलाफ है। भारत का कहना है कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा हैं।

वहीं, नेपाल का दावा है कि ये क्षेत्र उसके ऐतिहासिक नक्शे और दस्तावेजों के आधार पर उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यही कारण है कि जब भी इन क्षेत्रों को किसी सरकारी दस्तावेज, नक्शे या प्रतीक में शामिल किया जाता है तो दोनों देशों के बीच राजनीतिक चर्चा तेज हो जाती है।

सिक्के पर नक्शे को लेकर अलग-अलग दावे

नए सिक्कों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 1 रुपये के सिक्के पर विवादित नक्शा मौजूद रहेगा या उसमें बदलाव किया जाएगा।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि नेपाल ने विवाद को कम करने के लिए डिजाइन में बदलाव करते हुए नक्शे की जगह सांस्कृतिक धरोहर को शामिल करने का विचार किया है। वहीं दूसरी ओर कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि नेपाल राष्ट्र बैंक ने पुराने डिजाइन को बरकरार रखने का फैसला किया है।

इस वजह से अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम रूप से जारी होने वाले सिक्के पर कौन सा डिजाइन होगा। इसलिए इस खबर को “नेपाल के नए सिक्कों के डिजाइन को लेकर विवाद” के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

भारत-नेपाल संबंधों पर पड़ सकता है असर

भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच लोगों का आवागमन, व्यापार और सामाजिक संबंध काफी पुराने हैं। हालांकि, सीमा से जुड़े मुद्दे समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का कारण बनते रहे हैं।

ऐसे में मुद्रा जैसे राष्ट्रीय प्रतीक पर किसी विवादित क्षेत्र को दिखाना एक संवेदनशील विषय माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों को आपसी बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से ऐसे मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए।

इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि भारत और नेपाल के बीच कई बार राजनीतिक मतभेदों के बावजूद द्विपक्षीय संबंधों में सहयोग जारी रहा है। इसलिए इस मामले में भी बातचीत के जरिए समाधान की संभावना बनी हुई है।

सिक्कों के जरिए राष्ट्रीय पहचान दिखाने की परंपरा

दुनिया के कई देशों में सिक्कों और नोटों पर ऐतिहासिक घटनाओं, राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया जाता है। मुद्रा केवल आर्थिक लेन-देन का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह किसी देश की पहचान और नीतियों को भी दर्शाती है।

इसी कारण जब किसी देश की मुद्रा पर किसी क्षेत्र या राजनीतिक दावे को दिखाया जाता है तो उसका महत्व केवल आर्थिक नहीं रह जाता, बल्कि वह कूटनीतिक विषय भी बन जाता है।

नेपाल के नए सिक्कों का मामला भी इसी वजह से चर्चा में है। एक तरफ जहां सरकार सिक्कों की लागत कम करने और नए डिजाइन को लागू करने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक नक्शे को लेकर विवाद बना हुआ है।

नेपाल के नए 1 रुपये और 2 रुपये के सिक्कों को लेकर सामने आई जानकारी में सबसे बड़ा मुद्दा राजनीतिक नक्शे का है। सिक्कों में स्टील आधारित धातु के इस्तेमाल और नए डिजाइन की योजना की पुष्टि होती है, लेकिन 1 रुपये के सिक्के पर विवादित नक्शा रहेगा या नहीं, इसको लेकर अभी अलग-अलग दावे मौजूद हैं।

फिलहाल इस मामले को नेपाल के नए सिक्कों के डिजाइन से जुड़े विवाद के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में नेपाल राष्ट्र बैंक या सरकार की ओर से अंतिम डिजाइन को लेकर आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

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