पढ़िए उन्नाव सामूहिक विवाह में हो गया बड़ा ब्लंडर, दूल्हा-दुल्हनों को बांटे गए TMC चिह्न वाले गद्दे
Digital UP News Desk
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक स्तर पर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यक्रम में शामिल 459 दूल्हा-दुल्हनों को सरकार की ओर से उपहार के रूप में गद्दे वितरित किए गए। हालांकि, बाद में इन गद्दों पर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस यानी TMC का चुनाव चिह्न और नाम अंकित होने की बात सामने आई।
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने गद्दों की आपूर्ति करने वाले अलीगढ़ के सप्लायर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि सरकारी योजना के तहत वितरित किए जाने वाले सामान पर राजनीतिक दल से जुड़ा चुनाव चिह्न और नाम कैसे पहुंचा।
459 नवविवाहित जोड़ों को बांटे गए थे गद्दे
जानकारी के अनुसार, उन्नाव में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़ों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान सरकार की ओर से लाभार्थियों को विभिन्न सामग्री और उपहार दिए गए।
इसी क्रम में 459 दूल्हा-दुल्हनों को गद्दे भी वितरित किए गए। कार्यक्रम के बाद जब इन गद्दों पर अंकित सामग्री पर ध्यान गया, तो मामला चर्चा में आ गया। आरोप है कि गद्दों पर तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न और TMC नाम दिखाई दे रहा था।
इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि सरकारी योजना के तहत वितरित की जाने वाली सामग्री की खरीद और आपूर्ति से पहले उसकी गुणवत्ता और प्रिंटिंग की जांच किस स्तर पर की गई।
सरकारी कार्यक्रम में राजनीतिक चिह्न को लेकर सवाल
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है। ऐसे में सरकारी कार्यक्रम के लाभार्थियों को वितरित की जाने वाली सामग्री पर किसी राजनीतिक दल का चुनाव चिह्न या नाम होना प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है।
विपक्षी दलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ओर से इस मामले को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। वहीं, प्रशासन के सामने भी यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि गद्दों की खरीद किस प्रक्रिया के तहत हुई और सप्लायर ने किस आधार पर ऐसी सामग्री उपलब्ध कराई।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गद्दों पर अंकित चुनाव चिह्न और नाम जानबूझकर लगाया गया था या किसी पुराने स्टॉक, प्रिंटिंग या आपूर्ति संबंधी गलती के कारण यह सामग्री सरकारी कार्यक्रम तक पहुंची।
अलीगढ़ के सप्लायर को नोटिस
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने गद्दों की आपूर्ति करने वाले अलीगढ़ के सप्लायर को नोटिस जारी किया है। उससे पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि गद्दे कहां से तैयार कराए गए थे, उन पर प्रिंटिंग किस स्तर पर हुई और आपूर्ति से पहले सामग्री की जांच किस अधिकारी या कर्मचारी ने की थी।
इसके अलावा, यह भी जांच का विषय है कि टेंडर या खरीद प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों के अनुसार सामग्री की जांच की गई थी या नहीं। यदि खरीद प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी योजनाओं के तहत खरीदी और वितरित की जाने वाली सामग्री की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर किसी भी सरकारी योजना के तहत सामग्री की खरीद के बाद उसकी गुणवत्ता, पैकिंग और निर्धारित मानकों की जांच की जाती है।
ऐसे में सवाल यह है कि 459 गद्दों की आपूर्ति के दौरान उन पर अंकित सामग्री पर किसी अधिकारी की नजर क्यों नहीं गई। यदि गद्दों पर किसी राजनीतिक दल का नाम और चुनाव चिह्न स्पष्ट रूप से अंकित था, तो वितरण से पहले इसकी जांच क्यों नहीं की गई।
हालांकि, इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
लखनऊ और कानपुर के बीच अलीगढ़ से सप्लाई पर भी चर्चा
इस मामले को लेकर अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि उन्नाव जैसे जिले के सरकारी कार्यक्रम के लिए गद्दों की आपूर्ति अलीगढ़ के सप्लायर से क्यों कराई गई। उन्नाव लखनऊ और कानपुर के बीच स्थित है, इसलिए स्थानीय स्तर पर या आसपास के जिलों से आपूर्ति की संभावनाओं पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, केवल किसी दूसरे जिले के सप्लायर से सामान मंगाए जाने को अपने आप में अनियमितता नहीं माना जा सकता। सरकारी खरीद प्रक्रिया में विभिन्न जिलों या राज्यों से सप्लायरों को ठेका मिल सकता है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले खरीद प्रक्रिया और टेंडर दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी।
कमीशनबाजी के आरोपों की भी जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद कुछ लोगों ने खरीद प्रक्रिया में कथित कमीशनबाजी की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रमाण या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
यदि किसी व्यक्ति या समूह की ओर से खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार या कमीशन के आरोप लगाए जाते हैं, तो उनकी जांच दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, टेंडर प्रक्रिया और सप्लाई से जुड़े कागजात के आधार पर की जा सकती है।
ऐसे मामलों में केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। इसलिए यदि प्रशासन इस मामले की विस्तृत जांच कराता है, तो खरीद से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा सकती है।
प्रशासन के सामने कई सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। मसलन, गद्दों की आपूर्ति किस कंपनी या सप्लायर ने की? सप्लायर का चयन किस प्रक्रिया के तहत हुआ? गद्दों पर अंकित सामग्री की जांच किस स्तर पर की गई? क्या सरकारी अधिकारियों ने सामान की आपूर्ति से पहले उसका सैंपल देखा था?
इसके अलावा, यदि गद्दों पर TMC का चुनाव चिह्न और नाम पहले से अंकित था, तो इसे सरकारी कार्यक्रम में वितरित करने से पहले किसी अधिकारी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई।
इन सभी सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
फिलहाल जिला प्रशासन ने सप्लायर से स्पष्टीकरण मांगकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब सप्लायर के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यदि जांच में यह सामने आता है कि सप्लायर ने जानबूझकर निर्धारित मानकों के विपरीत सामग्री उपलब्ध कराई, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि सरकारी स्तर पर सामग्री की जांच में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
कुल मिलाकर, उन्नाव के मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में TMC चिह्न वाले गद्दों का मामला प्रशासन के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में यह प्रशासनिक लापरवाही, सप्लायर की गलती या खरीद प्रक्रिया से जुड़ी कोई अन्य अनियमितता सामने आती है। आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

