गुरु पूर्णिमा से पहले पढ़िए CM योगी की लिखी हुई पाती, बताया गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व

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Digital UP News Desk

लखनऊ: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक माना गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लिखी अपनी पाती में कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। इस परंपरा ने न केवल भारत की ज्ञान परंपरा को मजबूत किया, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

29 जुलाई को मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्व

इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर में श्रद्धालु अपने गुरुजनों का सम्मान करेंगे और उनके प्रति आभार व्यक्त करेंगे। विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा हमें उन सभी व्यक्तित्वों और संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती है, जिन्होंने हमारे जीवन को ज्ञान, संस्कार और दिशा प्रदान की है। इसलिए यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और गुरु के आदर्शों को जीवन में अपनाने का भी अवसर है।

महर्षि वेदव्यास की स्मृति में मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में मनाया जाता है। महर्षि वेदव्यास को भारतीय ज्ञान परंपरा के महान आचार्यों में गिना जाता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म और ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं और उनसे प्राप्त ज्ञान के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान को केवल पुस्तकीय जानकारी नहीं माना गया है। इसके बजाय ज्ञान को जीवन को सही दिशा देने वाला माध्यम माना गया है। इस प्रक्रिया में गुरु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

बौद्ध परंपरा में भी गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व

सीएम योगी ने कहा कि बौद्ध परंपरा में भी गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। भगवान बुद्ध द्वारा अपने प्रथम उपदेश दिए जाने और धर्मचक्र प्रवर्तन की घटना को इस पर्व से जोड़ा जाता है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, भगवान बुद्ध ने अपने ज्ञान को समाज के कल्याण के लिए साझा किया। उन्होंने मानवता को करुणा, सत्य और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। इसलिए बौद्ध परंपरा में गुरु पूर्णिमा ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखी जाती है।

जैन और सिख परंपरा में भी गुरु का महत्वपूर्ण स्थान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जैन परंपरा में भी गुरु पूर्णिमा का संबंध गौतम स्वामी के ज्ञान और दीक्षा प्रसंग से जुड़ा हुआ है। जैन धर्म में गुरु और आचार्य को ज्ञान तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।

इसी प्रकार सिख परंपरा में भी गुरु-वाणी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। गुरु परंपरा ने समाज को ज्ञान, सेवा, समानता और मानवता का संदेश दिया है। सीएम योगी ने कहा कि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में गुरु पूर्णिमा का स्वरूप भले ही अलग हो, लेकिन सभी परंपराओं का मूल भाव गुरु, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा हुआ है।

श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी गुरु से प्राप्त किया ज्ञान

मुख्यमंत्री ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से शिक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त किया, जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में ज्ञान अर्जित किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में महान व्यक्तित्वों ने भी गुरु के महत्व को स्वीकार किया है। इससे स्पष्ट होता है कि जीवन में सीखने और आगे बढ़ने के लिए गुरु का मार्गदर्शन कितना आवश्यक है।

गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह शिष्य के व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह शिष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझने, चुनौतियों का सामना करने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

जहां गुरु का सम्मान होता है, वहां समाज आगे बढ़ता है

सीएम योगी ने कहा कि जिस समाज में गुरु और शिक्षकों का सम्मान होता है, वह समाज निरंतर प्रगति करता है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषयों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान वास्तव में ज्ञान और शिक्षा का सम्मान है। इसलिए समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि शिक्षकों को सम्मानजनक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान विकसित समाज और विकसित प्रदेश की आधारशिला है।

शिक्षकों का सम्मान और सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के सम्मान और सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। सरकार का प्रयास है कि शिक्षकों को बेहतर कार्य वातावरण, सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना से बड़ी संख्या में शिक्षक और उनके परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

लाखों शिक्षक और आश्रित योजना से लाभान्वित

मुख्यमंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ लगभग 60 लाख शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों तक पहुंच रहा है। इसके अलावा, 7.5 लाख से अधिक विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षकों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन अधिक आत्मविश्वास के साथ कर सकें।

गुरुओं के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने गुरुओं के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए।

इसके बजाय, गुरु से प्राप्त ज्ञान, संस्कार और मूल्यों को अपने जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा भी प्रदान करते हैं। इसलिए गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें ज्ञान और संस्कार के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी स्मरण कराता है।

विकसित समाज के निर्माण में गुरु की भूमिका महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारत की प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। इस परंपरा को मजबूत करके ही समाज में ज्ञान, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

अंततः, गुरु पूर्णिमा हमें यह संदेश देती है कि जीवन में ज्ञान और मार्गदर्शन का महत्व हमेशा बना रहता है। गुरु का सम्मान करने वाला समाज अपनी परंपराओं और मूल्यों से जुड़ा रहता है। इसी आधार पर वह भविष्य की चुनौतियों का सामना करते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुरुजनों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से समाज में ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार हो।