बांदा में पत्रकार के घर में घुसकर किया गया हमला – खबर से नाराज जिम संचालक ने उठाया कदम – आगे पढ़ें

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: शहर के कालूकुआं स्थित शंकर नगर में शुक्रवार सुबह एक पत्रकार के घर में घुसकर कथित रूप से मारपीट और गला दबाने की कोशिश का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हाल ही में प्रकाशित एक खबर से नाराज एक जिम संचालक अपने साथियों के साथ पत्रकार के घर में घुसा और सो रहे पत्रकार पर हमला कर दिया। इस दौरान कथित रूप से उनका गला दबाने की कोशिश की गई।

पत्रकार की पत्नी के शोर मचाने और बीच-बचाव करने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति और आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।

लखनऊ से लौटने के बाद घर में सो रहे थे पत्रकार

पत्रकार प्रदीप कुमार त्रिपाठी उर्फ राजा की पत्नी रानी त्रिपाठी ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती प्रार्थना पत्र में घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, शुक्रवार 24 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे प्रदीप कुमार त्रिपाठी लखनऊ में संस्थान के एक कार्यक्रम से लौटने के बाद अपने घर में सो रहे थे।

आरोप है कि इसी दौरान एक कथित जिम संचालक समेत करीब पांच लोग जबरन घर में दाखिल हो गए। शिकायत के मुताबिक, घर में घुसने के बाद आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए पत्रकार के साथ मारपीट शुरू कर दी।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमले के दौरान पत्रकार का गला दबाने की कोशिश की गई। इस घटना से परिवार में अफरा-तफरी मच गई।

पत्नी के शोर मचाने पर आसपास के लोग पहुंचे

शिकायत के अनुसार, जब रानी त्रिपाठी ने अपने पति को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया, तो उनके साथ भी कथित रूप से अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई।

इसके बाद घर में चीख-पुकार और शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे। लोगों के पहुंचने के बाद आरोपी कथित रूप से वहां से फरार हो गए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि समय पर आसपास के लोग मौके पर नहीं पहुंचते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। हालांकि, इस संबंध में पुलिस जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

प्रकाशित खबर से नाराजगी को बताया जा रहा है हमले की वजह

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पत्रकार द्वारा एक कथित अवैध जिम और वहां संचालित गतिविधियों को लेकर खबर प्रकाशित की गई थी। इसी खबर से आरोपी पक्ष के नाराज होने की बात कही जा रही है।

परिवार का आरोप है कि खबर प्रकाशित होने के बाद से ही कथित तौर पर विवाद की स्थिति बनी हुई थी। इसी नाराजगी के चलते पत्रकार के घर में घुसकर हमला किए जाने की आशंका जताई गई है।

हालांकि, पुलिस के सामने अब यह जांच का विषय होगा कि घटना का वास्तविक कारण क्या था और क्या प्रकाशित खबर तथा कथित हमले के बीच कोई सीधा संबंध है। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग

घटना के बाद पत्रकार की पत्नी ने पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। पीड़ित पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ घर में घुसने, मारपीट, धमकी और अन्य संबंधित आरोपों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

इसके अलावा, परिवार ने आरोपियों की जल्द पहचान और गिरफ्तारी की मांग भी की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के बाद पत्रकार और उनका परिवार सुरक्षा को लेकर चिंतित है। इसलिए परिवार को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी गुहार लगाई गई है।

अब पुलिस की जांच के आधार पर यह तय होगा कि मामले में कौन-कौन से आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं और आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाती है।

पत्रकारों में घटना को लेकर आक्रोश

घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय पत्रकारों में भी नाराजगी देखने को मिली। पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक का ध्यान मामले की ओर आकर्षित करते हुए आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की है।

पत्रकारों का कहना है कि किसी खबर से यदि किसी व्यक्ति या संस्था को आपत्ति है, तो उसके समाधान के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक रास्ते उपलब्ध हैं। इसके बावजूद किसी पत्रकार के घर में घुसकर कथित रूप से हमला करना गंभीर विषय है।

पत्रकारों ने कहा कि समाचार प्रकाशित करने को लेकर असहमति होने पर संबंधित व्यक्ति अपना पक्ष रख सकता है, शिकायत कर सकता है या कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले सकता है। लेकिन किसी भी विवाद का समाधान हिंसा या दबाव के माध्यम से नहीं होना चाहिए।

घटना की जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल, बांदा में पत्रकार के घर में घुसकर कथित हमले का यह मामला पुलिस के समक्ष पहुंच चुका है। पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि घटना के वास्तविक कारणों और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल, प्रत्यक्षदर्शियों, उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल करनी होगी। इसके अलावा, यदि घटना से पहले किसी खबर को लेकर विवाद या विरोध की स्थिति बनी थी, तो उस पहलू की भी जांच की जा सकती है।

पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब पुलिस कार्रवाई पर टिकी नजर

इस मामले में अब सबसे अधिक नजर पुलिस की आगे की कार्रवाई पर है। पीड़ित पक्ष ने जहां आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है, वहीं पत्रकारों ने भी मामले में निष्पक्ष जांच की अपील की है।

फिलहाल, पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था, कितने लोग इसमें शामिल थे और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

इस बीच, घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा और समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद उत्पन्न होने वाले विवादों को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। पत्रकार संगठनों और स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि किसी भी खबर पर आपत्ति होने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और पीड़ित परिवार की शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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