कानपुर के बिधनू में पंचायतों के कामकाज पर उठ रहे सवाल, बाहरी व्यक्ति के हस्तक्षेप के आरोपों से मचा हड़कंप

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रिपोर्ट – अमन सिंह 

कानपुर: विकासखंड बिधनू की चार ग्राम पंचायतों—कुल्हौली, हरदौली, रामखेड़ा और दलेलपुर—में पंचायतों के कामकाज को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन पंचायतों में सचिव के आधिकारिक दायित्वों के बावजूद कई महत्वपूर्ण कार्य एक बाहरी व्यक्ति के माध्यम से कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पंचायतों में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, वर्तमान सचिव दीपा सिंह को इन पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन आरोप है कि पंचायतों के कई कार्य अभिषेक पाल नामक व्यक्ति के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अभिषेक पाल का कोई आधिकारिक प्रशासनिक पद नहीं है, इसके बावजूद वह पंचायत से जुड़े कई कार्यों में कथित रूप से हस्तक्षेप करता है।

हालांकि, इस मामले में अभिषेक पाल का कहना है कि वह सभी कार्य सचिव की निगरानी में करते थे। उनका दावा है कि उनकी पत्नी की पंचायत सहायक के पद पर नियुक्ति होने के बाद उन्होंने पिछले करीब दो माह से पंचायतों के सभी कार्य कराने बंद कर दिए हैं।

चार ग्राम पंचायतों के कामकाज पर उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि कुल्हौली, हरदौली, रामखेड़ा और दलेलपुर ग्राम पंचायतों में पंचायत से जुड़े कार्यों में एक बाहरी व्यक्ति की भूमिका लगातार बनी रही। उनका कहना है कि पंचायतों में योजनाओं के सर्वे, निर्माण कार्यों और अन्य गतिविधियों में अभिषेक पाल की सक्रियता देखी जाती रही है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायतों में आम लोगों से जुड़े कई कार्यों के लिए उन्हें संबंधित सचिव के बजाय अभिषेक पाल से संपर्क करना पड़ता था। इसी वजह से ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हुई कि पंचायतों के कामकाज में किसी बाहरी व्यक्ति का प्रभाव बढ़ गया है।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच किए जाने की बात कही गई है। इसलिए जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और पंचायतों के कामकाज में किस स्तर तक किसी गैर-अधिकारी की भूमिका रही।

आवास योजना की पात्रता जांच को लेकर भी सवाल

मामले में सबसे गंभीर सवाल प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना से जुड़े पात्रता सर्वे को लेकर उठाए गए हैं। नियमों के अनुसार, पात्रता की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा की जानी होती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि दलेलपुर ग्राम पंचायत में आवास योजना से जुड़े एक सर्वे के दौरान अभिषेक पाल ने जांच की। दलेलपुर निवासी राधा देवी, पत्नी धर्मेंद्र, ने दावा किया कि उनके आवास की जांच सचिव ने नहीं, बल्कि अभिषेक पाल ने की थी।

राधा देवी के अनुसार, जांच के बाद उनका आवास स्वीकृत नहीं हुआ। हालांकि, सरकारी मानकों के अनुसार आवास योजना में पात्रता का निर्धारण निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाता है। यदि किसी आवेदक का मकान योजना के मानकों के अनुरूप नहीं होता, तो वह अपात्र हो सकता है।

ऐसे में इस मामले में मुख्य सवाल आवास स्वीकृति या निरस्तीकरण से अधिक जांच की प्रक्रिया को लेकर उठता है। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि यदि जांच वास्तव में किसी ऐसे व्यक्ति ने की, जिसके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है, तो उसे यह जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई।

एक व्यक्ति की कई भूमिकाओं पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों ने अभिषेक पाल की कथित भूमिकाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वह अलग-अलग समय में मनरेगा मजदूर, केयरटेकर और निर्माण कार्यों से जुड़े व्यक्ति के रूप में दिखाई देता रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के निर्माण कार्यों में भी अभिषेक पाल की भूमिका रही है। इसके अलावा, कुछ कार्यों के भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही व्यक्ति का पंचायत से जुड़े अलग-अलग कार्यों में इस प्रकार शामिल होना जांच का विषय है।

हालांकि, इन आरोपों की भी आधिकारिक जांच अभी बाकी है। किसी व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण सरकारी अभिलेखों, भुगतान रिकॉर्ड, कार्यादेश और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही किया जा सकता है।

रामखेड़ा के RRC सेंटर के निर्माण पर भी सवाल

रामखेड़ा ग्राम पंचायत में बनाए गए RRC सेंटर को लेकर भी ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

उनका कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर मौके पर निरीक्षण और तकनीकी जांच की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृत लागत, उपयोग की गई सामग्री और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जाए।

यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी ग्रामीणों की ओर से की जा रही है। हालांकि, फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बीडीओ ने कहा- मामले की जांच चल रही है

पूरे मामले को लेकर जब बिधनू के खंड विकास अधिकारी आशीष मिश्रा से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है।

अब जांच के परिणाम पर सभी की नजर है। ग्रामीणों की मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और पंचायतों से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच हो। इनमें आवास योजना के सर्वे रिकॉर्ड, मनरेगा से जुड़े अभिलेख, निर्माण कार्यों के भुगतान, कार्यादेश और RRC सेंटर की गुणवत्ता से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

इसके अलावा, ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति ने बिना आधिकारिक अधिकार के सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप किया है, तो उसकी भूमिका की भी जांच की जाए।

अभिषेक पाल ने क्या कहा?

मामले में अभिषेक पाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह सभी कार्य सचिव की निगरानी में करते थे। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी की पंचायत सहायक के पद पर नियुक्ति करीब दो माह पहले हुई है। इसके बाद से उन्होंने पंचायतों के सभी कार्य कराने बंद कर दिए हैं।

अभिषेक पाल ने रामखेड़ा पंचायत से जुड़े भुगतान को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि पंचायत में उनके द्वारा कराए गए कार्यों का करीब आधा बकाया भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।

उनके बयान के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि उन्होंने पंचायतों के कार्य कराए थे, तो उनकी भूमिका किस आधिकारिक व्यवस्था के तहत थी और संबंधित कार्यों के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई थी।

जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल, बिधनू की चार ग्राम पंचायतों में कामकाज और बाहरी व्यक्ति की कथित भूमिका को लेकर उठे सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि पंचायतों में कौन-कौन से कार्य किस अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी में थे।

साथ ही, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जिम्मेदारियों और मौके पर किए गए कार्यों के बीच यदि कोई अंतर है, तो उसे भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचना चाहिए और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। दूसरी ओर, संबंधित पक्ष ने भी अपना पक्ष रखा है और प्रशासन की जांच का इंतजार किया जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच के बाद क्या किसी बाहरी व्यक्ति की पंचायत कार्यों में भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी? क्या रामखेड़ा RRC सेंटर के निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाएगी? और क्या पंचायतों से जुड़े भुगतान व कार्यों के रिकॉर्ड की समीक्षा होगी? इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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