सोनम वांगचुक की असली ताकत हैं “गीतांजलि आंग्मो”, HIAL की संस्थापक, शिक्षाविद और सामाजिक उद्यमी है
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक इन दिनों अपने आंदोलन और आमरण अनशन को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि इस बीच एक और नाम लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है—गीतांजलि जे. आंग्मो। आमतौर पर उन्हें सोनम वांगचुक की पत्नी के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनकी पहचान केवल इतनी भर नहीं है। वह एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद (Educationist), सोशल एंटरप्रेन्योर (Social Entrepreneur) और हिमालयी शिक्षा मॉडल को नई दिशा देने वाली प्रमुख हस्तियों में शामिल हैं।
दरअसल, शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। कॉरपोरेट जगत में लगभग 15 वर्षों तक सफल करियर बनाने के बाद उन्होंने समाज और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया। आज वह हिमालयी क्षेत्रों के लिए टिकाऊ और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ओडिशा के बालासोर से शुरू हुआ सफर
गीतांजलि जे. आंग्मो का जन्म ओडिशा के बालासोर में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई में उनकी गहरी रुचि रही। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद फकीर मोहन विश्वविद्यालय से फिजिक्स में स्नातक (Graduation) किया।
इसके बाद उन्होंने Xavier Institute of Management, Bhubaneswar (XIMB) से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। हाल ही में उन्होंने शिक्षा (Education) विषय में पीएचडी भी प्राप्त की। इस प्रकार विज्ञान, प्रबंधन और शिक्षा जैसे तीन अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व बनाती है।
15 वर्षों तक कॉरपोरेट सेक्टर में किया काम
उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद गीतांजलि ने देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। जानकारी के अनुसार उन्होंने डेलॉयट (Deloitte) सहित कई संस्थानों में लगभग 15 वर्षों तक कॉरपोरेट क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं।
कॉरपोरेट जीवन में उन्होंने नेतृत्व, प्रबंधन, रणनीति और संगठनात्मक विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापक अनुभव हासिल किया। हालांकि एक सफल करियर के बावजूद उन्होंने महसूस किया कि समाज के लिए प्रत्यक्ष रूप से कार्य करना अधिक महत्वपूर्ण है।
यही कारण रहा कि उन्होंने कॉरपोरेट दुनिया को छोड़कर शिक्षा और सामाजिक विकास को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया।
2017 में HIAL की स्थापना
वर्ष 2017 गीतांजलि जे. आंग्मो और सोनम वांगचुक के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। दोनों ने मिलकर हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh – HIAL) की स्थापना की।
इस संस्थान का उद्देश्य पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो।
HIAL छात्रों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें व्यावहारिक (Practical), अनुभव आधारित (Experiential) और सतत विकास (Sustainable Development) पर आधारित शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करता है।
HIAL में निभा रही हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
वर्तमान में गीतांजलि जे. आंग्मो HIAL की फाउंडर CEO और डीन के रूप में कार्य कर रही हैं। उनकी जिम्मेदारी केवल संस्थान के प्रशासन तक सीमित नहीं है।
वह शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम विकास, नेतृत्व निर्माण, नवाचार, सामुदायिक सहभागिता और संस्थान की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
इसके अलावा वह छात्रों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति भी प्रेरित करती हैं।
हिमालयी शिक्षा मॉडल को दी नई पहचान
गीतांजलि का मानना है कि हर क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए शिक्षा भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
इसी सोच के साथ HIAL में ऐसे पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं, जो पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को स्थानीय समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं।
उदाहरण के तौर पर, ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन, टिकाऊ निर्माण, उद्यमिता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को व्यावहारिक रूप से पढ़ाया जाता है। इस मॉडल की चर्चा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होती रही है।
सामाजिक विकास के लिए लगातार सक्रिय
गीतांजलि केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं। वह सामाजिक परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी निभाती हैं।
उनका मानना है कि शिक्षा तभी प्रभावी होगी, जब वह समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जुड़ी हो।
इसी वजह से उन्होंने युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं।
कराटे में ब्लैक बेल्ट और शास्त्रीय नृत्य में भी दक्ष
गीतांजलि जे. आंग्मो की उपलब्धियां केवल शिक्षा और प्रबंधन तक सीमित नहीं हैं।
वह कराटे में ब्लैक बेल्ट भी हैं, जो उनके अनुशासन और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
इसके अलावा उन्होंने ओडिसी और रूसी बैले (Russian Ballet) जैसे शास्त्रीय नृत्यों का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। कला, शिक्षा और नेतृत्व का यह संतुलन उनके व्यक्तित्व को और अधिक प्रेरणादायक बनाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका सम्मान
शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गीतांजलि को वर्ष 2022 में Women Transforming India National Award से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन महिलाओं को दिया जाता है, जिन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हों।
यह पुरस्कार उनके शिक्षा सुधार, सामाजिक नवाचार और नेतृत्व क्षमता की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान का प्रमाण माना जाता है।
सोनम वांगचुक के साथ साझा है शिक्षा का विजन
सोनम वांगचुक और गीतांजलि जे. आंग्मो केवल जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार के मिशन में भी एक-दूसरे के सहयोगी हैं।
दोनों का साझा उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जो स्थानीय संसाधनों, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे।
इसी कारण HIAL को आज एक ऐसे संस्थान के रूप में देखा जाता है, जो शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखता, बल्कि जीवन कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ता है।
आंदोलन के बीच क्यों बढ़ी चर्चा?
हाल के दिनों में सोनम वांगचुक के आंदोलन और आमरण अनशन की चर्चा के साथ-साथ लोगों की दिलचस्पी उनके निजी और पेशेवर जीवन में भी बढ़ी है।
इसी क्रम में गीतांजलि जे. आंग्मो का नाम भी सामने आया। हालांकि उनकी पहचान किसी आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने वर्षों से शिक्षा, नवाचार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

