चित्रकूट में 28 से 30 जुलाई तक लगेगा 37वां जटिल अस्थि रोग निदान शिविर, पढ़िए दिव्यांगों को मिलेगी कौन सी सुविधाएं

34af64c7-43f5-422a-af11-05428a47c46b

रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा 

चित्रकूट: श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित जानकीकुंड चिकित्सालय में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इस वर्ष भी 37वें जटिल अस्थि रोग निदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष चिकित्सा शिविर 28 जुलाई से 30 जुलाई तक आयोजित होगा। शिविर में जटिल अस्थि रोगों से पीड़ित मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह, जांच और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके साथ ही, जरूरतमंद दिव्यांगों को निःशुल्क कैलीपर्स और अन्य सहायक उपकरण भी वितरित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों के ऐसे लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचाना है, जो आर्थिक या अन्य कारणों से जटिल अस्थि रोगों का उपचार कराने में कठिनाई महसूस करते हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम देगी सेवाएं

जानकीकुंड चिकित्सालय में आयोजित होने वाले इस शिविर में प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पटेल और उनकी टीम मरीजों को परामर्श और उपचार सेवाएं प्रदान करेगी। इसके अलावा जानकीकुंड चिकित्सालय के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश होसामने भी शिविर में अपनी सेवाएं देंगे।

शिविर के दौरान जटिल अस्थि रोगों से संबंधित मामलों की जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेशन भी किए जाएंगे। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम पोलियो के कारण उत्पन्न दिव्यांगता, घुटनों के प्रत्यारोपण, रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याओं और हड्डियों की टूट-फूट सहित विभिन्न अस्थि रोगों का आधुनिक चिकित्सा पद्धति से उपचार करेगी।

इस प्रकार, यह शिविर उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, जिन्हें लंबे समय से हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं के उपचार की आवश्यकता है।

1987 में शुरू हुई थी सेवा की यह परंपरा

श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं निदेशक डॉ. इलेश जैन ने बताया कि इस शिविर की शुरुआत मानव सेवा की भावना से की गई थी। उन्होंने कहा कि एक समय देश में बड़ी संख्या में लोग पोलियो जैसी बीमारी से प्रभावित थे। ऐसे में गरीब, असहाय और वंचित लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता महसूस की गई।

ट्रस्ट के प्रथम अध्यक्ष स्वर्गीय अरविंद भाई मफतलाल और स्वर्गीय पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन ने मानव सेवा को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। वे समाज के जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर लगातार चिंतित रहते थे। इसी उद्देश्य से ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में शिविर के माध्यम से जरूरतमंदों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने का निर्णय लिया गया।

इसके बाद वर्ष 1987 में चित्रकूट और आसपास के क्षेत्र के लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पहला पोलियो शिविर आयोजित किया गया। समय के साथ यह सेवा कार्य लगातार आगे बढ़ता गया और आज यह शिविर 37वें वर्ष में पहुंच चुका है।

पोलियो उन्मूलन के बाद बदला शिविर का स्वरूप

जानकीकुंड चिकित्सालय की वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. पूनम आडवाणी ने बताया कि भारत सरकार के व्यापक टीकाकरण अभियान और पोलियो ड्रॉप कार्यक्रम के कारण देश ने पोलियो उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। मार्च 2014 में भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया गया।

इसके बाद शिविर का स्वरूप व्यापक किया गया और इसे जटिल अस्थि रोग निदान शिविर के रूप में आयोजित किया जाने लगा। अब इस शिविर में केवल पोलियो से प्रभावित लोगों तक ही सेवाएं सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार के जटिल अस्थि रोगों से पीड़ित मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

डॉ. पूनम आडवाणी के अनुसार, शिविर का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को हड्डियों और जोड़ों से संबंधित बीमारियों के बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के बारे में जानकारी देगी।

दिव्यांगों को निःशुल्क कैलीपर्स और अन्य उपकरण

इस वर्ष आयोजित होने वाले शिविर में जरूरतमंद दिव्यांगों को निःशुल्क कैलीपर्स और अन्य सहायक उपकरण भी वितरित किए जाएंगे। इससे ऐसे लोगों को दैनिक जीवन में अधिक सुविधा मिल सकेगी और उनकी गतिशीलता में सहायता प्राप्त होगी।

निःशुल्क उपकरण प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को कुछ आवश्यक दस्तावेज साथ लाने होंगे। इसके लिए निवास प्रमाण पत्र, विकलांगता प्रमाण पत्र और दो पासपोर्ट आकार के फोटो आवश्यक होंगे। संबंधित लाभार्थियों से अपील की गई है कि वे निर्धारित दस्तावेजों के साथ शिविर में पहुंचकर इस सुविधा का लाभ उठाएं।

इन रोगों से जुड़े मरीज करा सकेंगे जांच

शिविर में विभिन्न प्रकार की अस्थि संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले सकेंगे। इनमें पोलियो के कारण उत्पन्न शारीरिक दिव्यांगता, घुटनों से जुड़ी गंभीर समस्याएं, रीढ़ की हड्डी से संबंधित रोग, हड्डियों की टूट-फूट और अन्य जटिल अस्थि रोग शामिल हैं।

इसके अलावा, जिन मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण या रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन की आवश्यकता है, उनके मामलों का भी विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार मरीजों को आगे की उपचार प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

लोगों से शिविर का लाभ उठाने की अपील

श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के निदेशक डॉ. इलेश जैन ने चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को हड्डी, जोड़, रीढ़ या अन्य अस्थि रोगों से संबंधित समस्या है, वे शिविर में आकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लें।

उन्होंने कहा कि इस तरह के शिविरों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उनके क्षेत्र में उपलब्ध कराना है। इसलिए, जिन मरीजों को लंबे समय से अस्थि रोग संबंधी समस्या है, उन्हें अपनी समस्या की जांच कराने के लिए शिविर में अवश्य पहुंचना चाहिए।

मानव सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा ट्रस्ट

जानकीकुंड चिकित्सालय में आयोजित होने वाला यह शिविर केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मानव सेवा की परंपरा का हिस्सा है। स्वर्गीय अरविंद भाई मफतलाल और स्वर्गीय पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन द्वारा शुरू की गई यह सेवा आज भी जरूरतमंदों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने का माध्यम बनी हुई है।

वर्ष 1987 में पोलियो शिविर से शुरू हुई यह पहल अब जटिल अस्थि रोगों के उपचार और निदान तक विस्तारित हो चुकी है। इस वर्ष 28 से 30 जुलाई तक आयोजित होने वाले 37वें शिविर से भी बड़ी संख्या में मरीजों और दिव्यांगजनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इसलिए, चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से अपील की गई है कि वे अपनी अस्थि संबंधी समस्याओं के उपचार और विशेषज्ञ परामर्श के लिए जानकीकुंड चिकित्सालय में आयोजित होने वाले इस शिविर में पहुंचें और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाएं।

You may have missed