शहीद चंद्रशेखर आजाद जयंती पर राष्ट्रीय एकता सभा आयोजित, युवाओं को उनके आदर्शों पर चलने का दिया गया संदेश

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: अमर शहीद, महान क्रांतिकारी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी शहीद शिरोमणि चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर चंद्रशेखर आजाद जन कल्याण समिति भारत के तत्वावधान में राष्ट्रीय एकता सभा का आयोजन आजाद वाटिका, चंद्रशेखर आजाद चौराहा पर श्रद्धा एवं सम्मान के साथ किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, शिक्षाविदों और नागरिकों ने भाग लेकर राष्ट्रनायक चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

प्रतिमा का पूजन और श्रद्धांजलि अर्पित

कार्यक्रम का शुभारंभ चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के विधिवत पूजन के साथ हुआ। समिति के सदस्यों ने प्रतिमा को दूध, दही एवं गंगाजल से स्नान कराकर माल्यार्पण किया तथा पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष के साथ राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

नई पीढ़ी को शहीदों का इतिहास पढ़ाना जरूरी : डॉ. विनोद त्रिपाठी

इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता सभा के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विनोद त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों का योगदान आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता आंदोलन के समय था।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपने इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक शहीदों के बारे में विस्तृत जानकारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पाठ्यक्रमों में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को पर्याप्त स्थान नहीं मिलेगा, तो आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास से दूर हो जाएंगी।

इसलिए शिक्षा व्यवस्था में ऐसे महान क्रांतिकारियों के जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्रभक्ति को प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों में देशप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।

चंद्रशेखर आजाद युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं : सर्वेश कुमार पांडे ‘निंनी’

सभा की अध्यक्षता करते हुए चंद्रशेखर आजाद जन कल्याण समिति भारत के संस्थापक अध्यक्ष सर्वेश कुमार पांडे ‘निंनी ने कहा कि सेनापति चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, अनुशासन और असाधारण नेतृत्व क्षमता से क्रांतिकारी आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण ने हजारों युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजी शासन के अन्याय और दमन के सामने कभी भी झुकना स्वीकार नहीं किया। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहा। आजाद का संघर्ष केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि वे आत्मसम्मान, स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक भी थे।

कम उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए थे आजाद

वक्ताओं ने बताया कि 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा (वर्तमान चंद्रशेखर आजाद नगर) में जन्मे चंद्रशेखर आजाद ने बहुत कम उम्र में ही देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था।

मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई तथा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष को नई ऊर्जा प्रदान की।

अंतिम सांस तक निभाया ‘आजाद’ रहने का संकल्प

सभा में वक्ताओं ने उनके जीवन के उस ऐतिहासिक प्रसंग का भी उल्लेख किया, जब 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (वर्तमान चंद्रशेखर आजाद पार्क) में अंग्रेजी पुलिस से घिर जाने के बावजूद उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया।

अपने संकल्प के अनुरूप उन्होंने अंतिम क्षण तक संघर्ष किया और अंत में अपनी अंतिम गोली स्वयं पर चलाकर यह सिद्ध कर दिया कि वे जीवनभर “आजाद” रहे और “आजाद” ही विदा हुए।

युवाओं को राष्ट्र निर्माण में आगे आने का आह्वान

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। यदि युवा उनके आदर्शों को अपनाएं, तो समाज में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना और अधिक मजबूत हो सकती है।

इसके साथ ही वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में समाज को आपसी भाईचारे, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की पहले से अधिक आवश्यकता है। ऐसे में चंद्रशेखर आजाद जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों का प्रचार-प्रसार समाज को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

उन्होंने युवाओं से देशहित को सर्वोपरि रखने तथा समाज में जागरूकता और सेवा की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

समिति ने महापुरुषों के विचार जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प

सभा का संचालन समिति के महामंत्री एवं मीडिया प्रभारी संदीप साहू ने किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों का स्वागत करते हुए कहा कि समिति का उद्देश्य केवल महापुरुषों की जयंती मनाना नहीं, बल्कि उनके विचारों को समाज तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

राष्ट्रीय एकता सभा में मनीषा वर्मा, भावना तिवारी, रवि दत्त मिश्रा, अनिल त्रिपाठी, ओम द्विवेदी, दीनानाथ द्विवेदी, विकास मल्होत्रा, प्रतिभा साहू, मोहम्मद उस्मान अली शाह, उमेश शुक्ला, सिद्धनाथ त्रिपाठी, राकेंद्र मोहन तिवारी, तिलकचंद कुरील, सी.के. सिंह, मुकेश मिश्रा, रजनी कश्यप, रामभूज पांडे, विजय गुप्ता, उर्मिला पांडे, मनोज गुप्ता, श्याम मोहन तिवारी, प्रिंस गुप्ता, सुरेंद्र सिंह भदौरिया, दुर्गा बाजपेई, राजू गुप्ता, अरुण पाल (पूर्व पार्षद), वृंद तिवारी, संतोष शर्मा, देवांश पांडे, रामजी अवस्थी, शानू गुप्ता, बी.डी. जायसवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने शहीद चंद्रशेखर आजाद के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों से प्रेरित होकर देश का युवा वर्ग राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएगा और भारत को और अधिक सशक्त एवं समृद्ध बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

ऐसे आयोजन न केवल महान विभूतियों को श्रद्धांजलि देने का माध्यम हैं, बल्कि समाज को उनके आदर्शों से जोड़ने और आने वाली पीढ़ियों तक उनके प्रेरणादायक जीवन संदेश को पहुंचाने का भी प्रभावी प्रयास हैं।

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