फर्रुखाबाद में नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप, पीड़ित परिवार ने SP से निष्पक्ष जांच की रखी मांग

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रिपोर्ट – हर्ष वर्मा 

फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के जहानगंज थाना क्षेत्र के ग्राम महमूदपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने अपनी नाबालिग बेटी को कथित रूप से बहला-फुसलाकर ले जाने, नकदी और आभूषण अपने साथ ले जाने तथा मामले की निष्पक्ष जांच न होने की शिकायत पुलिस अधीक्षक (एसपी) से की है। महिला ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

पीड़िता द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार, उसकी बेटी की आयु को लेकर विद्यालय के अभिलेखों में अलग-अलग जन्मतिथियां दर्ज हैं। महिला का दावा है कि वास्तविक जन्मतिथि के आधार पर उसकी पुत्री नाबालिग है। इसी आधार पर उसने विद्यालयी अभिलेखों और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) की जांच कराने के साथ मेडिकल परीक्षण कराने की भी मांग की है।

एसपी को सौंपा गया शिकायती पत्र

पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसकी बेटी को गांव का ही एक युवक कथित रूप से बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। महिला का आरोप है कि इस दौरान युवक के परिवार के अन्य सदस्य भी उसके साथ थे।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि बेटी घर से लगभग 1.67 लाख रुपये नकद तथा सोने-चांदी के आभूषण भी अपने साथ लेकर गई, जो अब आरोपित पक्ष के कब्जे में हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जन्मतिथि को लेकर उठाया सवाल

शिकायत में महिला ने यह भी कहा कि उसकी बेटी की जन्मतिथि विभिन्न विद्यालयी अभिलेखों में अलग-अलग दर्ज है। उसका कहना है कि वास्तविक अभिलेखों के आधार पर उसकी बेटी की आयु 18 वर्ष से कम है।

इसी कारण उसने पुलिस से मांग की है कि विद्यालय के मूल रिकॉर्ड, ट्रांसफर सर्टिफिकेट तथा अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि आयु संबंधी तथ्य स्पष्ट हो सकें।

मेडिकल परीक्षण कराने की भी मांग

महिला ने अपने प्रार्थना पत्र में बेटी का मेडिकल परीक्षण कराए जाने की भी मांग की है। उसका कहना है कि इससे मामले के तथ्यों की पुष्टि करने में सहायता मिलेगी और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सकेगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी मामले में पीड़ित की आयु विवादित हो, तो संबंधित दस्तावेजों और आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण के आधार पर जांच एजेंसियां तथ्य निर्धारित करती हैं।

धमकी देने का भी आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब उसने आरोपित पक्ष से नकदी और आभूषण वापस करने की मांग की, तो उसे कथित रूप से धमकी दी गई। महिला का कहना है कि पुलिस में शिकायत करने पर भी उसे गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई।

हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही इस संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

निष्पक्ष जांच की रखी मांग

महिला ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उसने यह भी अनुरोध किया है कि जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेजों, साक्ष्यों और बयानों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

पुलिस जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित तथ्यों की जांच की जाएगी।

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई करती है।

यह रही कानून विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिग से जुड़े मामलों में जांच अत्यंत संवेदनशील और निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। यदि आयु को लेकर विवाद हो, तो विद्यालयी अभिलेख, जन्म प्रमाणपत्र तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी पक्ष द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उनकी पुष्टि साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही की जाती है।

फर्रुखाबाद के जहानगंज थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में एक महिला ने अपनी नाबालिग बेटी को कथित रूप से बहला-फुसलाकर ले जाने, नकदी और आभूषण ले जाने तथा धमकी देने के आरोप लगाए हैं। महिला ने पुलिस अधीक्षक से विद्यालयी अभिलेखों की जांच, मेडिकल परीक्षण और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल मामले की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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