ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते: कानपुर सेंट्रल पर मिला लापता किशोर, आरपीएफ ने सुरक्षित दिल्ली पुलिस को सौंपा
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई। रेल मदद पोर्टल पर प्राप्त सूचना के आधार पर आरपीएफ टीम ने एक लापता नाबालिग किशोर को सुरक्षित बरामद किया।
आवश्यक सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद किशोर को उसके परिजनों से संबंधित मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
यह कार्रवाई रेलवे स्टेशनों पर भटके, लापता अथवा असुरक्षित परिस्थितियों में मिले बच्चों को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के माध्यम से अब तक अनेक बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता मिली है।
रेल मदद पोर्टल से मिली सूचना
आरपीएफ के अनुसार, 23 जुलाई 2026 को रेल मदद रिफरेंस संख्या 2026072300326 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि गाड़ी संख्या 02564 के कोच S-1 की बर्थ संख्या 71 पर एक नाबालिग बालक अकेला यात्रा कर रहा है।
सूचना मिलते ही आरपीएफ पोस्ट कानपुर सेंट्रल ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। हेड कांस्टेबल ललित नारायण मिश्रा, महिला कांस्टेबल अलका विश्वकर्मा तथा महिला कांस्टेबल रिंकी देवी ने संबंधित ट्रेन के कानपुर सेंट्रल पहुंचने पर बालक को सुरक्षित संरक्षण में लिया और उसे आरपीएफ पोस्ट लाया गया।
खुले वातावरण में की गई पूछताछ
आरपीएफ अधिकारियों ने बाल संरक्षण से संबंधित मानकों का पालन करते हुए बालक से खुले और सहज वातावरण में बातचीत की। पूछताछ के दौरान किशोर ने अपना नाम अंकित (काल्पनिक रूप से केवल प्रथम नाम का उल्लेख) बताया तथा अपने पिता का मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराया।
इसके बाद आरपीएफ टीम ने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। बातचीत में किशोर के पिता ने पुष्टि की कि उनका पुत्र 22 जुलाई 2026 से घर से लापता था और इस संबंध में दिल्ली के कंझावला थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है।
दिल्ली पुलिस से किया गया समन्वय
परिजनों से जानकारी प्राप्त होने के बाद आरपीएफ ने तत्काल दिल्ली पुलिस से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद 23 जुलाई 2026 को थाना कंझावला, दिल्ली से उपनिरीक्षक और एक हेड कांस्टेबल कानपुर सेंट्रल आरपीएफ पोस्ट पहुंचे।
उन्होंने संबंधित एफआईआर एवं अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत किए। आरपीएफ अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया और सभी औपचारिकताओं को पूरा किया।
दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सुपुर्दगी
आरपीएफ ने प्रस्तुत दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक मिलान करने के बाद यह सुनिश्चित किया कि बरामद किया गया किशोर वही है, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दिल्ली में दर्ज की गई थी।
सत्यापन पूर्ण होने के बाद किशोर को नियमानुसार अग्रिम वैधानिक कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा गया।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते की महत्वपूर्ण भूमिका
भारतीय रेलवे और रेलवे सुरक्षा बल द्वारा संचालित ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते का उद्देश्य रेलवे परिसरों और ट्रेनों में मिले भटके, लापता अथवा असुरक्षित परिस्थितियों में पाए जाने वाले बच्चों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करना है।
इस अभियान के तहत आरपीएफ कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार करते हुए उनकी पहचान सुनिश्चित कर सकें और उन्हें सुरक्षित रूप से उनके परिवार या संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान बाल संरक्षण के क्षेत्र में रेलवे की महत्वपूर्ण पहल है और इससे अनेक परिवारों को राहत मिली है।
रेल मदद प्रणाली बनी प्रभावी माध्यम
रेलवे की रेल मदद प्रणाली यात्रियों की शिकायतों, सहायता और आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए विकसित की गई है। इस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त सूचना पर संबंधित विभाग तुरंत सक्रिय होकर आवश्यक कार्रवाई करता है।
आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और त्वरित समन्वय के कारण ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई करना अब अधिक प्रभावी हो गया है।
यात्रियों से भी की गई अपील
आरपीएफ ने यात्रियों से अपील की है कि यदि यात्रा के दौरान कोई बच्चा अकेला, असहाय या संदिग्ध परिस्थितियों में दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139, रेल मदद पोर्टल अथवा निकटतम आरपीएफ कर्मियों को दें।
अधिकारियों का कहना है कि समय पर दी गई सूचना किसी बच्चे को उसके परिवार तक सुरक्षित पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बाल सुरक्षा के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता
भारतीय रेलवे समय-समय पर विभिन्न जागरूकता अभियानों के माध्यम से यात्रियों को बाल सुरक्षा के प्रति जागरूक भी करता है। रेलवे स्टेशनों पर लगे सूचना बोर्ड, हेल्पलाइन नंबर और आरपीएफ की सक्रिय निगरानी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और भविष्य में भी ऐसे अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत आरपीएफ द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई एक बार फिर यह दर्शाती है कि रेलवे सुरक्षा बल केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहा है।
रेल मदद पोर्टल से प्राप्त सूचना, आरपीएफ की सक्रियता और दिल्ली पुलिस के साथ बेहतर समन्वय के चलते एक लापता किशोर को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।
यह अभियान बच्चों की सुरक्षा और परिवारों को राहत पहुंचाने की दिशा में भारतीय रेलवे और आरपीएफ की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

