बिजनौर में अखिलेश-डिंपल की तस्वीर वाली अनोखी कांवड़, शिव भक्तों ने बताया Mission 2027 का उद्देश्य

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रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा 

बिजनौर: सावन के पवित्र महीने में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ यात्रियों के बीच बिजनौर की एक अनोखी कांवड़ चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कांवड़ पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव की तस्वीर लगाई गई है। शिव भक्तों का कहना है कि यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ उनके राजनीतिक उद्देश्य से भी जुड़ी है। उन्होंने इस यात्रा को ‘Mission 2027’ का नाम दिया है।

जानकारी के अनुसार, यह कांवड़ हरिद्वार से गंगाजल लेकर बिजनौर जिले के मंडावली थाना क्षेत्र स्थित मोटा महादेव मंदिर पहुंची। यहां से शिव भक्तों की यह यात्रा आगे रवाना हुई। बताया गया कि कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्तों ने अखिलेश यादव और डिंपल यादव की तस्वीर वाली कांवड़ को विशेष रूप से सजाया है। इसके बाद यह कांवड़ इटावा स्थित केदारेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए ले जाई जाएगी।

अखिलेश यादव और डिंपल यादव की तस्वीर से चर्चा में आई कांवड़

कांवड़ यात्रा के दौरान सामान्य तौर पर शिवभक्त भगवान शिव और धार्मिक प्रतीकों से जुड़ी सजावट करते हैं। हालांकि, इस बार बिजनौर में एक ऐसी कांवड़ सामने आई, जिस पर अखिलेश यादव और डिंपल यादव की तस्वीर लगी हुई थी। यही वजह है कि यह कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

शिवभक्तों ने बताया कि वे हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे हैं और निर्धारित मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। उनके अनुसार, कांवड़ पर अखिलेश यादव और डिंपल यादव की तस्वीर लगाने के पीछे उनकी व्यक्तिगत आस्था और राजनीतिक विचारधारा जुड़ी हुई है।

हालांकि, कांवड़ यात्रा धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस यात्रा में राजनीतिक संदेश को शामिल किए जाने को लेकर भी लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

‘सनातन यात्रा’ का दिया नाम

शिव भक्तों का कहना है कि यह यात्रा किसी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने इसे ‘सनातन यात्रा’ बताया और कहा कि इसमें किसी भी व्यक्ति या समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

यात्रा में शामिल लोगों के अनुसार, भगवान शिव में उनकी आस्था सर्वोपरि है और गंगाजल लेकर जलाभिषेक करना उनकी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इसके साथ ही वे अपने राजनीतिक विचारों को भी इस यात्रा के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं।

शिवभक्तों ने कहा कि सनातन परंपरा सभी को साथ लेकर चलने की भावना पर आधारित है। इसलिए उनके अनुसार, इस यात्रा को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

इटावा के केदारेश्वर नाथ मंदिर में होगा जलाभिषेक

शिवभक्तों ने बताया कि हरिद्वार से लाया गया गंगाजल इटावा के केदारेश्वर नाथ मंदिर में चढ़ाया जाएगा। उनके अनुसार, यह मंदिर अखिलेश यादव के कार्यकाल में बनवाया गया था। इसी वजह से उन्होंने इस मंदिर को अपनी यात्रा का गंतव्य चुना है।

यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक किया जाएगा। इसके लिए शिवभक्त कांवड़ के साथ यात्रा कर रहे हैं।

धार्मिक यात्रा के दौरान शिव भक्तों में उत्साह देखने को मिल रहा है। वहीं, कांवड़ पर लगी तस्वीरों की वजह से यह यात्रा स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है।

‘Mission 2027’ को लेकर शिव भक्तों का संदेश

इस कांवड़ यात्रा का एक प्रमुख संदेश ‘Mission 2027’ बताया जा रहा है। शिव भक्तों ने कहा कि वे चाहते हैं कि वर्ष 2027 में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें।

उन्होंने कहा कि यह उनका राजनीतिक समर्थन है और वे अपनी आस्था के साथ-साथ अपने राजनीतिक विचारों को भी सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे हैं। शिव भक्तों के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक समर्थन को सामने रखना है।

राजनीतिक दलों और नेताओं के समर्थन में धार्मिक यात्राओं के दौरान संदेश देना कोई नया विषय नहीं है। हालांकि, हर बार ऐसे मामलों में लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग होती हैं। बिजनौर में सामने आई इस कांवड़ को लेकर भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा जारी है।

डिंपल यादव को लेकर भी शिवभक्तों ने कही बात

यात्रा में शामिल शिवभक्तों ने डिंपल यादव को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि डिंपल यादव ने दिल्ली में लाठीचार्ज में घायल छात्रों की एक मां की तरह देखभाल की थी। शिवभक्तों का कहना है कि इसी वजह से वे डिंपल यादव के प्रति भी सम्मान की भावना रखते हैं।

उन्होंने अखिलेश यादव को लेकर भी कई बातें कहीं। शिवभक्तों का दावा है कि अखिलेश यादव हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं में आस्था रखते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के घर में गाय पाली जाती है और वे गंगा को मानने वाले व्यक्ति हैं।

हालांकि, ये सभी बातें शिवभक्तों की ओर से कही गई हैं। इन बयानों पर संबंधित राजनीतिक नेताओं या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।

मोटा महादेव मंदिर से रवाना हुई कांवड़

यह मामला बिजनौर जिले के मंडावली थाना क्षेत्र स्थित मोटा महादेव मंदिर से जुड़ा है। बताया गया कि हरिद्वार से लौटने के बाद शिवभक्तों की कांवड़ यहां पहुंची। इसके बाद यात्रा अपने अगले पड़ाव की ओर रवाना हुई।

मोटा महादेव मंदिर क्षेत्र में कांवड़ यात्रा को लेकर धार्मिक गतिविधियां जारी हैं। सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अलग-अलग शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

इस बीच, अखिलेश यादव और डिंपल यादव की तस्वीर वाली कांवड़ ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय स्तर पर इस कांवड़ की तस्वीरें और वीडियो भी चर्चा में हैं।

धार्मिक आस्था के साथ राजनीतिक संदेश

इस कांवड़ यात्रा की खास बात यह है कि इसमें धार्मिक आस्था और राजनीतिक संदेश दोनों दिखाई दे रहे हैं। एक ओर शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए यात्रा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांवड़ पर लगी तस्वीरों के माध्यम से वे अपनी राजनीतिक पसंद भी जाहिर कर रहे हैं।

शिवभक्तों ने इसे सनातन परंपरा से जुड़ी यात्रा बताते हुए कहा कि उनके लिए धर्म और आस्था महत्वपूर्ण हैं। साथ ही, उन्होंने वर्ष 2027 को लेकर अपनी राजनीतिक इच्छा भी स्पष्ट की है।

फिलहाल, बिजनौर की यह अनोखी कांवड़ स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। अब यह यात्रा इटावा के केदारेश्वर नाथ मंदिर तक पहुंचेगी, जहां शिवभक्त गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद ही इस यात्रा का धार्मिक और राजनीतिक संदेश और अधिक चर्चा में आने की संभावना है।

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