Breaking News: विश्व विख्यात सुन्नी धर्मगुरु मौलाना सलमान नदवी का निधन, लखनऊ में ली अंतिम सांस, आज मलिहाबाद में सुपुर्द-ए-खाक

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Digital UP News Desk 

लखनऊ: देश के प्रख्यात इस्लामी विद्वान और विश्व विख्यात सुन्नी धर्मगुरु मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद लखनऊ स्थित उनके दुबग्गा आवास पर निधन हो गया। उनके निधन की खबर से देश-विदेश के धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार और करीबी सूत्रों के अनुसार, वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और चिकित्सकीय देखरेख में थे। उनके निधन की पुष्टि विभिन्न समाचार स्रोतों ने भी की है।

परिजनों के अनुसार, मौलाना सलमान नदवी को आज शाम लगभग 5 बजे मलिहाबाद क्षेत्र के कटौली में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में उलेमा, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, अनुयायी और विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल होने की संभावना है।

इस्लामी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान

मौलाना सलमान नदवी भारतीय उपमहाद्वीप के प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वानों में गिने जाते थे। उन्होंने इस्लामी अध्ययन, धार्मिक शिक्षा, अरबी और उर्दू साहित्य तथा सामाजिक विषयों पर लंबे समय तक कार्य किया। अपने व्याख्यानों, पुस्तकों और लेखों के माध्यम से उन्होंने देश और विदेश में व्यापक पहचान बनाई।

उनका नाम विशेष रूप से इस्लामी चिंतन, अकादमिक विमर्श और धार्मिक संवाद के लिए जाना जाता था। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्होंने अपने विचार प्रस्तुत किए और अनेक छात्रों का मार्गदर्शन किया।

लंबे समय से थे अस्वस्थ

परिवार के अनुसार, मौलाना सलमान नदवी पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा था, लेकिन सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।उनके निधन के बाद उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। धार्मिक संस्थाओं, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

देश-विदेश में शोक की लहर

मौलाना सलमान नदवी के निधन की सूचना मिलते ही देश और विदेश से शोक संदेश आने लगे। विभिन्न धार्मिक संगठनों, इस्लामी शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।

कई विद्वानों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन को शिक्षा, अध्ययन और समाज के मार्गदर्शन के लिए समर्पित किया। उनके विचार और लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

धार्मिक और सामाजिक संवाद के पक्षधर

मौलाना सलमान नदवी को केवल एक इस्लामी विद्वान ही नहीं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक संवाद के समर्थक के रूप में भी जाना जाता था। उन्होंने समय-समय पर विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार रखे और शांतिपूर्ण संवाद पर बल दिया। यही कारण है कि धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनकी अलग पहचान बनी।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ सकते हैं अनुयायी

परिजनों के अनुसार, उनके अंतिम दर्शन और जनाज़े में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं। प्रशासन भी स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए है ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।

शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति

धार्मिक शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि मौलाना सलमान नदवी का निधन इस्लामी अध्ययन और शिक्षण जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अनेक विद्यार्थियों को शिक्षित किया और कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेखन किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि उनका शैक्षणिक योगदान आने वाले समय में भी शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बना रहेगा।

महत्वपूर्ण छति है निदान जी का निधन

मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी का निधन धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा, अध्ययन और समाज के मार्गदर्शन के लिए समर्पित किया। आज मलिहाबाद के कटौली में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में उनके अनुयायियों और शुभचिंतकों के पहुंचने की संभावना है। उनके निधन से देश-विदेश के अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

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