कानपुर के रामखेड़ा में एक साल में जर्जर हुआ रिसोर्स रिकवरी सेंटर, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
रिपोर्ट – अमन सिंह
कानपुर: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से देशभर में रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) स्थापित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों का उद्देश्य सूखे और गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण, पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना है। हालांकि, कानपुर नगर के बिधनू ब्लॉक की रामखेड़ा ग्राम पंचायत में बना ऐसा ही एक रिसोर्स रिकवरी सेंटर अब चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग चार लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र महज एक से डेढ़ वर्ष के भीतर जर्जर हो गया है। भवन की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने निर्माण गुणवत्ता, कार्यों की निगरानी और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य पर उठे सवाल
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत बनाए जा रहे रिसोर्स रिकवरी सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से गांवों में एकत्र होने वाले कचरे का पृथक्करण और उचित निस्तारण किया जाता है, जिससे स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
लेकिन रामखेड़ा में बने आरआरसी सेंटर की स्थिति देखकर ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो भवन इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त नहीं होता। उनका मानना है कि इससे सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं।
भवन में दरारें और उखड़ता प्लास्टर
ग्रामीणों के अनुसार, केंद्र की दीवारों में कई स्थानों पर चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। इसके अलावा, प्लास्टर भी जगह-जगह से उखड़ चुका है। भवन के भीतर बनाए गए वे हौद, जिनका उपयोग सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने के लिए किया जाना था, वे भी क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण के दौरान आवश्यक गुणवत्ता मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
ई-रिक्शा लोडर भी उपयोग से बाहर
रिसोर्स रिकवरी सेंटर के साथ गांव से कचरा संग्रहण के लिए उपलब्ध कराया गया ई-रिक्शा लोडर भी वर्तमान में उपयोग में नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि वाहन खराब अवस्था में ग्राम प्रधान के आवास के बाहर खड़ा है और लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं कराई गई है।
इस कारण गांव में कचरा संग्रहण व्यवस्था भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वाहन समय पर ठीक कराया जाता, तो स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती।
निर्माण कार्य को लेकर उठे सवाल
मामले को लेकर जब ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि शिवपाल से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य ग्राम विकास अधिकारी और संबंधित ठेकेदार की देखरेख में कराया गया था। उन्होंने कहा कि निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी जानकारी संबंधित अधिकारियों के पास है।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भवन कम समय में क्षतिग्रस्त होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
मामले के सामने आने के बाद बिधनू के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) आशीष मिश्रा ने कहा कि रिसोर्स रिकवरी सेंटर की जिला स्तर पर भी मॉनिटरिंग की जाती है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एडीओ पंचायत को मौके पर भेजा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एडीओ पंचायत ने भी दिया कार्रवाई का भरोसा
एडीओ पंचायत राघवेंद्र सिंह ने भी कहा कि शिकायत के आधार पर स्थल का निरीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान भवन की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों और अन्य संबंधित पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने उठाए महत्वपूर्ण प्रश्न
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि:
- लगभग चार लाख रुपये की लागत से बना भवन इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त कैसे हो गया?
- निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई?
- खराब पड़े ई-रिक्शा की समय पर मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
- क्या पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाएगी?
- यदि निर्माण में अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
ग्रामीणों का कहना है कि इन सवालों के स्पष्ट उत्तर मिलने चाहिए ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि रिसोर्स रिकवरी सेंटर को शीघ्र मरम्मत कर पुनः उपयोग योग्य बनाया जाए, ताकि गांव की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो और स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।
स्वच्छ भारत मिशन में गुणवत्ता का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं की सफलता केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, नियमित रखरखाव और प्रभावी संचालन पर भी निर्भर करती है। यदि आधारभूत ढांचा मजबूत होगा, तभी गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था लंबे समय तक सुचारु रूप से चल सकेगी।
ऐसे मामलों में समय पर निरीक्षण, तकनीकी गुणवत्ता की जांच और जवाबदेही तय करना आवश्यक माना जाता है, ताकि सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो सके।
रामखेड़ा ग्राम पंचायत का रिसोर्स रिकवरी सेंटर वर्तमान में स्थानीय चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों द्वारा निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर उठाए गए सवालों के बीच प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।
अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि भवन की खराब स्थिति के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।
यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो इससे न केवल इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में ग्रामीण विकास और स्वच्छता से जुड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

