यूपी रोजगार मिशन को बड़ा संबल, अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के साथ हुआ एमओयू; युवाओं को मिलेंगे नए अवसर
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन और अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं के कौशल विकास को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ना और उन्हें रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
समझौते के दौरान प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर और राज्यमंत्री मनोहर लाल मन्नू कोरी की मौजूदगी रही। अधिकारियों के अनुसार, यह एमओयू उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और कौशल विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
युवाओं के स्किल गैप को दूर करने पर जोर
उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते औद्योगिक निवेश और नई परियोजनाओं के बीच कुशल युवाओं की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का जोर युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देने पर है।
एमओयू के माध्यम से युवाओं के बीच मौजूद स्किल गैप को कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके तहत युवाओं को ऐसे कौशल प्रदान किए जाने की योजना है, जिनकी मांग उद्योगों और विभिन्न क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो और उन्हें प्रदेश में ही रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
अडानी समूह की परियोजनाओं में मिलेंगे अवसर
समझौते के तहत प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए अडानी समूह से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इनमें डिफेंस कॉरिडोर, थर्मल पावर और अन्य औद्योगिक परियोजनाएं शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रशिक्षित युवाओं को सीधे उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से युवाओं को अपने कौशल का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, उद्योगों को भी प्रशिक्षित और योग्य मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।
रोजगार सृजन की नई दिशा
उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शन्मुगा सुन्दरम् ने इस समझौते को रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार उद्योगों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रही है।
उनके अनुसार, युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगारपरक कौशल से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसलिए उद्योगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना महत्वपूर्ण है।
इस दिशा में किए गए प्रयासों से युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा, उद्योगों को भी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे।
2017 से अब तक 17 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार का दावा
सरकार की ओर से बताया गया है कि वर्ष 2017 से अब तक 17 लाख से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया गया है। रोजगार मिशन के माध्यम से युवाओं को विभिन्न कंपनियों और उद्योगों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार नई कंपनियों और औद्योगिक समूहों के साथ सहयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के साथ हुआ यह समझौता भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके साथ ही, युवाओं को प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
देश-विदेश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना
उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन का लक्ष्य केवल प्रदेश के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं है। इसके साथ ही, प्रशिक्षित युवाओं को देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि यदि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए, तो वे देश-विदेश में बेहतर रोजगार हासिल कर सकते हैं। इसके लिए कौशल विकास और उद्योग आधारित प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस पहल से उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, राज्य से प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक परियोजनाओं से बढ़ेंगी संभावनाएं
उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर सहित कई बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के विस्तार के साथ ही तकनीकी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग भी बढ़ने की संभावना है।
ऐसे में अडानी समूह की परियोजनाओं के साथ युवाओं को जोड़ने की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को परियोजनाओं की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाएगा।
इसके अलावा, थर्मल पावर और अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार की संभावनाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रकार, कौशल विकास और रोजगार के बीच सीधा संबंध स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
यूपी मॉडल को मिली नई मजबूती
सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में रोजगार और कौशल विकास के लिए तैयार किए जा रहे मॉडल को इस समझौते से नई मजबूती मिलेगी। उद्योगों के साथ साझेदारी के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण देने और रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।
वहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार मिशन को बड़े स्तर पर विस्तार देने में मदद मिल सकती है। इससे युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ वास्तविक रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी कौशल विकास कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार से कितनी प्रभावी तरह जोड़ा जाता है। ऐसे में उद्योग समूहों के साथ सीधे समझौते इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
रोजगार मिशन और उद्योगों के बीच बढ़ेगा समन्वय
इस एमओयू के बाद उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन और अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के बीच समन्वय बढ़ेगा। युवाओं की प्रशिक्षण आवश्यकताओं, उद्योगों की मांग और रोजगार के अवसरों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक कौशल की पहचान की जा सकती है। इसके बाद युवाओं को उसी के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा।
कुल मिलाकर, यूपी रोजगार मिशन और अडानी स्किल्स एंड एजुकेशन के बीच हुआ एमओयू प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौते के माध्यम से युवाओं का स्किल गैप कम करने, उन्हें उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करने और प्रदेश में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
डिफेंस कॉरिडोर, थर्मल पावर और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं में रोजगार के अवसरों के साथ-साथ देश-विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं, वर्ष 2017 से अब तक 17 लाख से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने के सरकार के दावे के बीच यह समझौता उत्तर प्रदेश के रोजगार मॉडल को और अधिक विस्तार देने की दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है।

