कानपुर में CPR एवं यातायात जागरूकता कार्यशाला हुई सम्पन्न, पढ़िए विशेषज्ञों की राय और जानिए प्राथमिक उपचार और सड़क सुरक्षा का महत्व
रिपोर्ट – कृष्णा शर्मा
कानपुर: सड़क दुर्घटनाओं और हृदयाघात जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर दी गई प्राथमिक सहायता कई बार किसी व्यक्ति का जीवन बचा सकती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए वरदान फाउंडेशन एवं महादेवा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में रविवार, 28 जून 2026 को कानपुर में CPR एवं यातायात जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों, चिकित्सकों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर जीवन रक्षक तकनीकों और सड़क सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
यह कार्यशाला महादेवा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, वसंत विहार, कानपुर में शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने, घायलों को प्रारंभिक सहायता उपलब्ध कराने तथा सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक बनाना था।
आपातकाल में सीपीआर का महत्व समझाया जिसे आप भी पढ़िए
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि दुर्घटना या अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि उस समय आसपास मौजूद लोग सही तकनीक से कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देना जानते हों, तो मरीज के जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ सकती है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एस. एन. पाण्डेय ने सीपीआर की वैज्ञानिक विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने कहा कि केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि सामान्य नागरिकों को भी सीपीआर का प्रशिक्षण मिलना चाहिए ताकि आपात स्थिति में बिना समय गंवाए घायल या मरीज की सहायता की जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटना के बाद एम्बुलेंस के पहुंचने तक का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि प्रशिक्षित व्यक्ति प्राथमिक उपचार और सीपीआर देना जानता है, तो कई अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
सड़क सुरक्षा नियमों के पालन पर दिया गया विशेष जोर
कार्यशाला के दूसरे चरण में सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं लापरवाही, तेज गति, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करने तथा यातायात नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं।
इस दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षित वाहन संचालन, ट्रैफिक संकेतों की जानकारी, हेलमेट पहनने की अनिवार्यता, सीट बेल्ट के महत्व तथा दुर्घटना के बाद अपनाई जाने वाली प्राथमिक सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक यातायात नियमों का पालन करने की आदत विकसित करे, तो सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
इस तरह से सामाजिक जागरूकता अभियान को मिलेगा विस्तार
कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित वरदान फाउंडेशन के महासचिव कृष्णा शर्मा ने सड़क सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें, मोबाइल फोन का प्रयोग न करें तथा यातायात संकेतों का पालन करें। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में जागरूकता फैलाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।
बड़ी संख्या में शामिल हुए सदस्य और पदाधिकारी
कार्यशाला में संस्था के पदाधिकारियों, चिकित्सकों, समाजसेवियों एवं सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. अभिषेक दीक्षित, जिला उपाध्यक्ष, वरदान फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जबकि मंच संचालन पीयूष मिश्रा, जिला अध्यक्ष, वरदान फाउंडेशन द्वारा किया गया।
वहीं, महादेवा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओर से मनोज कुमार ने कार्यक्रम संयोजक के रूप में आयोजन की व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राम कुमार पोरवाल, मनोज कुमार सचान, ब्रजेश शर्मा (पत्रकार एवं संरक्षक, वरदान फाउंडेशन), नीरज निगम, रंजीत, सार्थक, डॉ. कुलदीप पाल, डॉ. अतुल कृष्ण मिश्रा, धनंजय कुमार, विनोद कुमार आर्य, डॉ. ए. के. पाल, संजय शर्मा (संरक्षक, वरदान फाउंडेशन), उमेश शर्मा (जिला मंत्री), ओमवीर (सदस्य), राकेश शर्मा (कार्यकारिणी सदस्य) तथा प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्था के पदाधिकारियों ने मुख्य वक्ता डॉ. एस. एन. पाण्डेय को स्मृति-चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज में जीवन रक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यदि अधिक से अधिक लोगों को सीपीआर और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाए, तो दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल सकती है।
भविष्य में भी जारी रहेगा अभियान
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, चिकित्सकों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वरदान फाउंडेशन भविष्य में भी सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता तथा जीवन रक्षक प्रशिक्षण से जुड़े अभियान लगातार संचालित करता रहेगा।
संस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना है ताकि समाज में जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों की संख्या बढ़ सके। साथ ही, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की सहायता करने की सामुदायिक क्षमता को भी मजबूत किया जा सके।
जागरूक होने की है जरुरत
कानपुर में आयोजित यह CPR एवं यातायात जागरूकता कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और जन-जागरूकता का महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुई। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्यावहारिक प्रशिक्षण और सड़क सुरक्षा संबंधी संदेशों ने प्रतिभागियों को न केवल नई जानकारी प्रदान की, बल्कि उन्हें समाज में जागरूकता फैलाने के लिए भी प्रेरित किया। यदि इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते रहें, तो निश्चित रूप से सुरक्षित यातायात व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के प्रति समाज अधिक जागरूक बन सकेगा।

