भारतीय नौसेना को मिले 3 नए वॉरशिप, PM मोदी बोले- समुद्र से आकाश तक भारत बन रहा आत्मनिर्भर

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नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए भारतीय नौसेना में तीन नए अत्याधुनिक वॉरशिप शामिल किए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और एविएशन सेक्टर में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश अब समुद्र से लेकर आकाश तक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की तकनीकी प्रगति, औद्योगिक विकास और वैश्विक स्तर पर बढ़ती साख का भी प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि स्वदेशी तकनीक और आधुनिक संसाधनों के बल पर भारत भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होगा।

भारतीय नौसेना को मिली नई मजबूती

भारतीय नौसेना में शामिल किए गए तीन नए वॉरशिप को समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस ये युद्धपोत निगरानी, समुद्री गश्त, सामरिक अभियानों और राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए हैं। इसके परिणामस्वरूप भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान का उद्देश्य केवल आयात पर निर्भरता कम करना नहीं, बल्कि भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना भी है।

एविएशन सेक्टर की उपलब्धियों का किया उल्लेख

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने एविएशन सेक्टर में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने विमानन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। नए हवाई अड्डों का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और घरेलू विमानन सेवाओं के विस्तार से देश के आर्थिक विकास को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि जब रक्षा और नागरिक विमानन दोनों क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमता बढ़ती है, तो उसका लाभ रोजगार, उद्योग, अनुसंधान और तकनीकी विकास को भी मिलता है। यही कारण है कि सरकार इन क्षेत्रों में निरंतर निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित कर रही है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज रक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और विमानन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में विकसित तकनीक और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने से भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति दोनों मजबूत हो रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता, नवाचार और प्रतिस्पर्धा के नए मानक स्थापित करना भी है। इसी उद्देश्य से सरकार विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित कर रही है।

योग दिवस का भी किया उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग दिवस मनाया गया। उनके अनुसार यह भारत की प्राचीन संस्कृति और योग परंपरा के प्रति विश्व के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि योग आज केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देने वाला अभियान बन चुका है। भारत द्वारा शुरू की गई इस पहल को दुनिया के अनेक देशों ने सकारात्मक रूप से अपनाया है।

“राष्ट्र की आत्मा उसके लोग होते हैं”

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके नागरिक होते हैं। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति, सुरक्षा और विकास में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने नागरिकों से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि जब समाज, उद्योग, वैज्ञानिक, सैनिक और युवा एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तभी राष्ट्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है।

रक्षा उत्पादन में बढ़ रहा स्वदेशी योगदान

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। सरकार स्वदेशी हथियार प्रणालियों, युद्धपोतों, मिसाइलों, रडार, हेलीकॉप्टरों और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण को लगातार बढ़ावा दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारतीय उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और देश की तकनीकी क्षमता में भी वृद्धि होगी।

समुद्री सुरक्षा का बढ़ता महत्व

भारत की लंबी समुद्री सीमा और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक महत्व को देखते हुए नौसेना की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में आधुनिक युद्धपोतों का बेड़े में शामिल होना समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक नौसैनिक संसाधन समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, आपदा राहत कार्यों, मानवीय सहायता अभियानों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं।

भारतीय नौसेना में तीन नए वॉरशिप का शामिल होना देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत, रक्षा उत्पादन, एविएशन सेक्टर और योग दिवस जैसे विषयों पर अपने विचार रखते हुए देश की विकास यात्रा को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत समुद्र से लेकर आकाश तक अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है और स्वदेशी तकनीक के बल पर वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है। आने वाले वर्षों में रक्षा, विज्ञान, तकनीक और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भारत की प्रगति इसी दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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