लखनऊ अलीगंज कोचिंग अग्निकांड में बड़ा अपडेट: 5 और इंजीनियर-कर्मचारी निलंबित, पढ़िए ध्वस्तीकरण को लेकर क्या बोल रही SIT?
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक कोचिंग संस्थान में 22 जून को हुई आग की घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने पांच और इंजीनियरों एवं कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
यह घटना पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत दुखद रही, क्योंकि इस हादसे में 15 विद्यार्थियों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
अब पांच और अधिकारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज
एलडीए द्वारा जारी कार्रवाई के तहत एक सहायक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, एक जूनियर इंजीनियर (JE) तथा एक अन्य कर्मचारी को निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त बेलदार हरपाल को भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि भवन निर्माण, निरीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुपालन में संभावित लापरवाही की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।
भवन पर ध्वस्तीकरण की तैयारी हुई तेज
घटना के बाद जिस भवन में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहा था, उसके निर्माण और स्वीकृत मानकों की भी जांच की गई। प्रारंभिक जांच में कई बिंदुओं पर नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई है।
इसी क्रम में संबंधित भवन के ध्वस्तीकरण की तैयारी शुरू कर दी गई है। भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला को, जो वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में हैं, जेल में ही ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस उपलब्ध कराया गया है। नियमानुसार निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
22 जून को हुई थी आग की यह दर्दनाक घटना
22 जून की दोपहर लगभग दो बजे अलीगंज स्थित कोचिंग भवन में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं तथा राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
हालांकि बचाव कार्य के बावजूद इस घटना में 15 विद्यार्थियों की जान चली गई, जबकि कई अन्य छात्र घायल हुए। घायलों का उपचार विभिन्न अस्पतालों में कराया गया। इस दुखद घटना के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में शोक का वातावरण बन गया और लोगों ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने दिए थे जांच के निर्देश
घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। साथ ही एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसे घटना के सभी पहलुओं की जांच कर निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, भवन स्वामी या अन्य संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
18 अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया है जारी
प्रशासन के अनुसार अब तक विभिन्न स्तरों पर कुल 18 अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर क्रमवार जिम्मेदारी तय की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जा रही है।
सुरक्षा मानकों की भी की जा रही है समीक्षा
इस घटना के बाद राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक भवनों और बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच तेज कर दी गई है।
अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों में फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास, अग्निशमन प्रणाली और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, समय पर सुरक्षा ऑडिट और भवन निर्माण नियमों का सख्ती से पालन भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की संभावना को कम कर सकता है।
जवाबदेही तय करने पर सरकार का है जोर
प्रदेश सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यही कारण है कि जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी लगातार जारी है।
साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में भवन स्वीकृति, निरीक्षण और फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाया जाए।
गंभीरता दर्शाएगी न हो पुनरावृत्ति
अलीगंज कोचिंग अग्निकांड ने सार्वजनिक भवनों में सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर गंभीरता से सामने ला दिया है। प्रशासन द्वारा जांच के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और भवन के विरुद्ध ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया यह संकेत देती है कि मामले में जवाबदेही तय करने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि अंतिम निष्कर्ष विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल शासन और प्रशासन का ध्यान जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा करने, दोषियों की जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पर केंद्रित है।

