कानपुर देहात में स्लीपर बसों में की गई की सघन चेकिंग, यात्रियों की सुरक्षा के लिए रात में भी चलेगा विशेष अभियान

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात: सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानपुर देहात में यातायात पुलिस ने स्लीपर बसों के खिलाफ विशेष चेकिंग अभियान शुरू किया है। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों और उत्तर प्रदेश यातायात निदेशालय की ओर से जारी आदेशों के अनुपालन में यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले में संचालित होने वाली तथा दूसरे जनपदों से आने-जाने वाली स्लीपर बसों की सघन जांच की जा रही है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बसों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराना और यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि यातायात पुलिस अब केवल दिन में ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन रात के समय भी स्लीपर बसों और अन्य यात्री वाहनों की नियमित जांच करेगी। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उच्च न्यायालय के निर्देश पर शुरू हुआ विशेष अभियान

स्लीपर बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आवश्यक सुविधाओं की कमी को गंभीरता से लेते हुए माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश यातायात निदेशालय ने भी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं।

इन निर्देशों के अनुपालन में कानपुर देहात यातायात पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर बसों की जांच शुरू की है। अभियान के दौरान जिले में चलने वाली बसों के साथ-साथ अन्य जनपदों से आने वाली स्लीपर बसों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

दरअसल, स्लीपर बसों में बड़ी संख्या में यात्री लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। ऐसे में बसों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का सही स्थिति में होना बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस द्वारा बसों की तकनीकी और दस्तावेजी जांच की जा रही है।

Fire Extinguisher और अग्निशमन उपकरणों की जांच

विशेष चेकिंग अभियान के दौरान यातायात पुलिस ने बसों में आग से बचाव के लिए उपलब्ध कराए गए उपकरणों की जांच को प्राथमिकता दी। इसके तहत Fire Extinguisher यानी अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, उनकी स्थिति और उपयोग के लिए तैयार होने की जांच की गई।

इसके अलावा अन्य अग्निशमन उपकरण भी देखे गए, ताकि किसी आपातकालीन परिस्थिति में उनका इस्तेमाल किया जा सके। बस में अग्निशमन यंत्र मौजूद होने के साथ उसका सही स्थिति में होना भी जरूरी है।

यातायात पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रा के दौरान किसी अप्रिय स्थिति में चालक और परिचालक आवश्यक सुरक्षा उपाय अपना सकें तथा यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद मिल सके।

ADAS और ड्राइवर-कंडक्टर के लाइसेंस की पड़ताल

बसों की जांच के दौरान ADAS (Advanced Driver Assistance System) की उपलब्धता भी देखी गई। यह आधुनिक तकनीक चालक को वाहन संचालन के दौरान संभावित जोखिमों के प्रति सचेत करने में मदद करती है।

इसके साथ ही बस चालकों और परिचालकों के लाइसेंस की भी जांच की गई। पुलिस ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वाहन संचालन और यात्रियों की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों के पास आवश्यक वैध दस्तावेज उपलब्ध हों।

वहीं, चालकों की स्थिति की जांच के लिए Breath Analyzer का इस्तेमाल किया गया। इसके माध्यम से यह पता लगाया गया कि चालक ने शराब का सेवन तो नहीं किया है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह जांच काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि चालक की सतर्कता और जिम्मेदार वाहन संचालन यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़े हुए हैं।

Emergency Gate की कार्यशीलता पर विशेष ध्यान

स्लीपर बसों की जांच में Emergency Gate यानी आपातकालीन निकास द्वार की उपलब्धता और उसकी कार्यशीलता को भी विशेष रूप से परखा गया।

आपातकालीन स्थिति में बस के अंदर मौजूद यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए Emergency Gate की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए केवल बस में आपातकालीन द्वार होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से खुलना और इस्तेमाल के योग्य होना भी आवश्यक है।

इसी क्रम में यातायात पुलिस ने यात्रियों से भी बातचीत की। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बस में Emergency Gate की स्थिति और उसके इस्तेमाल की जानकारी है। इसके अलावा आपातकालीन परिस्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी ली गई।

इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को भी उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे सही तरीके से प्रतिक्रिया दे सकें।

संदिग्ध और ज्वलनशील वस्तुओं की भी होगी जांच

अभियान के दौरान बसों में रखे सामान की भी जांच की गई। विशेष रूप से किसी संदिग्ध अथवा ज्वलनशील वस्तु की मौजूदगी का पता लगाने पर ध्यान दिया गया।

बसों में ज्वलनशील पदार्थों का अनुचित तरीके से रखा जाना यात्रियों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए यातायात पुलिस द्वारा इस तरह की वस्तुओं की जांच को भी अभियान में शामिल किया गया है।

इसके अलावा बसों में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं और यात्रियों के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया जा रहा है। इस प्रकार पुलिस का प्रयास है कि यात्रा शुरू होने से लेकर गंतव्य तक पहुंचने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो।

नियम तोड़ने वाले बस संचालकों पर होगी कार्रवाई

विशेष चेकिंग अभियान के दौरान जिन वाहनों में निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया गया, उनके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की गई।

यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभियान केवल औपचारिक जांच तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि बसों में सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए नियमित निगरानी भी की जाएगी।

इसके लिए प्रतिदिन रात्रि में स्लीपर बसों और अन्य यात्री वाहनों की चेकिंग जारी रहेगी। इस दौरान दूसरे जनपदों से आने वाली बसों पर भी विशेष नजर रखी जाएगी।

यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं, लगातार जारी रहेगा अभियान

कानपुर देहात में शुरू किया गया यह विशेष अभियान सड़क सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य बस संचालकों को निर्धारित मानकों का पालन करने के लिए जिम्मेदार बनाना और यात्रियों के सफर को अधिक सुरक्षित बनाना है।

यातायात पुलिस ने साफ किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए स्लीपर बसों में अग्निशमन उपकरण, Emergency Gate, चालक के दस्तावेज और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच आगे भी लगातार की जाएगी।

कुल मिलाकर, उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में चलाया जा रहा यह अभियान बस यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने की पहल है। इससे बस संचालकों को भी सुरक्षा नियमों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनने का संदेश मिलेगा। वहीं, यात्रियों को भी यात्रा के दौरान बस में उपलब्ध आपातकालीन सुविधाओं की जानकारी रखने की जरूरत है।

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