भारत टैक्स-2026 में चमका यूपी मॉडल: टेक्सटाइल नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को मिली नई गति

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Digital UP News Desk 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश ने देश के प्रमुख वस्त्र एवं परिधान आयोजन भारत टेक्स-2026 (Bharat Tex 2026) में अपने टेक्सटाइल मॉडल के माध्यम से उद्योग जगत का ध्यान आकर्षित किया है। राज्य सरकार का कहना है कि नई टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति, पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहन, निवेश-अनुकूल माहौल और तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles) पर विशेष फोकस के कारण उत्तर प्रदेश वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों के परिणामस्वरूप निवेश, रोजगार सृजन और निर्यात को नई गति मिली है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5F विजन (Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion, Fashion to Foreign) को भी उत्तर प्रदेश में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारत टेक्स-2026 में यूपी मॉडल की रही विशेष चर्चा

भारत टेक्स-2026 देश के सबसे बड़े टेक्सटाइल आयोजनों में से एक माना जाता है, जहां देश-विदेश के उद्योगपति, निवेशक, निर्यातक और नीति विशेषज्ञ भाग लेते हैं। इस मंच पर उत्तर प्रदेश ने अपनी औद्योगिक नीतियों, पारंपरिक वस्त्र उद्योग और आधुनिक टेक्सटाइल इकोसिस्टम को प्रमुखता से प्रस्तुत किया।

राज्य सरकार के अनुसार, यूपी में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए तैयार किए गए अनुकूल वातावरण ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। यही कारण है कि राज्य को वस्त्र उद्योग के लिए एक उभरते हुए केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति 2022 से बढ़ा निवेश

उत्तर प्रदेश सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 को उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस नीति के तहत निवेशकों को विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन, आधारभूत सुविधाएं और औद्योगिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

सरकार का दावा है कि इस नीति के लागू होने के बाद टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट उद्योग में निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं। इसके साथ ही नए औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को भी गति मिली है। जानकारों का मानना है कि ऐसी नीतियां राज्य में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सकती हैं।

पीएम मित्र पार्क से उद्योग को मिलेगा नया आधार

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पीएम मित्र (PM MITRA) पार्क को राज्य के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

इस पार्क के विकसित होने से उत्पादन, प्रसंस्करण, डिजाइन, पैकेजिंग और निर्यात जैसी गतिविधियों को एकीकृत मंच मिलने की उम्मीद है। इससे लॉजिस्टिक लागत कम होने के साथ उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ सकती है।

इसके अलावा छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की संभावना भी जताई जा रही है।

रोजगार सृजन पर विशेष जोर

राज्य सरकार का कहना है कि टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के अवसरों में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगरों को इस क्षेत्र से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और प्रशिक्षण योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

यदि यह गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल उद्योग उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

1.91 लाख हथकरघा बुनकरों को योजनाओं का लाभ

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य के लगभग 1.91 लाख हथकरघा बुनकरों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य पारंपरिक बुनकरों की आय बढ़ाना, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना तथा उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।

इसके अतिरिक्त वित्तीय सहायता, विपणन सहयोग और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पारंपरिक उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत

उत्तर प्रदेश अपने पारंपरिक वस्त्र एवं हस्तशिल्प उत्पादों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, भदोही के कालीन, मिर्जापुर की दरी तथा अन्य पारंपरिक उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मांग बनी हुई है।

इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकार निर्यात संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई (Geographical Indication) टैग वाले उत्पादों की वैश्विक पहचान उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

तकनीकी वस्त्रों में भी बढ़ रही संभावनाएं

पारंपरिक वस्त्रों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश अब तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles) के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।

तकनीकी वस्त्रों का उपयोग स्वास्थ्य, रक्षा, कृषि, ऑटोमोबाइल, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ने से राज्य को नए औद्योगिक अवसर मिलने की संभावना है।

सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीक आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उत्तर प्रदेश की स्थिति को मजबूत करना है।

निर्यात बढ़ाने की दिशा में प्रयास

राज्य सरकार निर्यात बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक सुविधाओं और निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी काम कर रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि यह रणनीति प्रभावी रहती है, तो आने वाले समय में राज्य का वस्त्र निर्यात और अधिक बढ़ सकता है।

प्रधानमंत्री के 5F विजन को मिल रही गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत 5F विजनFarm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion और Fashion to Foreign—का उद्देश्य कृषि से लेकर वैश्विक बाजार तक संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है।

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि राज्य की वर्तमान नीतियां इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य कर रही हैं। इससे किसानों, बुनकरों, उद्योगों और निर्यातकों को एक समन्वित विकास मॉडल का लाभ मिलने की संभावना है।

भारत टैक्स-2026 में उत्तर प्रदेश की सक्रिय भागीदारी ने राज्य के टेक्सटाइल सेक्टर की बढ़ती क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया है। टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022, पीएम मित्र पार्क, पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहन, तकनीकी वस्त्रों पर बढ़ता फोकस और बुनकरों के लिए संचालित योजनाएं राज्य को वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

यदि निवेश, कौशल विकास, आधारभूत संरचना और निर्यात प्रोत्साहन की यह गति भविष्य में भी बनी रहती है, तो उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत कर सकता है।

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