मेरठ में शिव बारात की झांकी पर विवाद, पुलिस की आपत्ति के बाद बदला गया ‘लव जिहाद’ का पोस्टर
रिपोर्ट: मनीष पराशर
मेरठ। मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र में शिव बारात के दौरान एक झांकी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। झांकी में प्रदर्शित पोस्टर पर ‘लव जिहाद’ लिखे होने के कारण पुलिस ने आपत्ति जताई और बारात को कुछ समय के लिए रोक दिया। इसके बाद आयोजकों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने आयोजकों से विवादित बैनर हटाने को कहा। काफी देर तक चली बातचीत के बाद पोस्टर पर लिखे शब्दों को बदलने पर सहमति बनी, जिसके बाद बारात को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई।
घटना के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और पूरे मामले का वीडियो सामने आने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, घटना से संबंधित वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसके पूरे संदर्भ की जांच आवश्यक है।
शिव बारात की झांकी को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिव बारात में एक विशेष झांकी शामिल की गई थी। इस झांकी में एक महिला की डमी और ‘लव जिहाद’ लिखे पोस्टर को प्रदर्शित किया गया था। झांकी को लेकर पुलिस ने कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई और आयोजकों को इसे आगे ले जाने से रोक दिया।
पुलिस की आपत्ति के बाद आयोजकों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई। इस दौरान सदर बाजार क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। पुलिस का उद्देश्य संवेदनशील संदेश के कारण किसी तरह का तनाव उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए स्थिति को नियंत्रित रखना था।
वहीं, झांकी तैयार करने वाले आयोजकों का कहना था कि इसका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ माहौल बनाना नहीं, बल्कि हिंदू बेटियों को जागरूक करना है। उनका दावा था कि झांकी के माध्यम से युवतियों को सतर्क रहने और अपने निर्णय सोच-समझकर लेने का संदेश दिया जा रहा था।
पुलिस की आपत्ति के बाद बदला गया पोस्टर
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने आयोजकों से बातचीत शुरू की। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और समझाइश के बाद विवादित शब्दों वाले पोस्टर को हटाने पर सहमति बनी।
इसके बाद झांकी पर लगे ‘लव जिहाद’ लिखे बैनर को हटाकर उसकी जगह ‘धर्मांतरण’ लिखा बोर्ड लगाने का निर्णय लिया गया। पोस्टर में बदलाव होने के बाद पुलिस ने शिव बारात को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी।
इस तरह बातचीत के जरिए तत्कालीन विवाद को सुलझाया गया और बारात को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ। हालांकि, इस घटना ने धार्मिक आयोजनों में प्रदर्शित होने वाले संदेशों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थलों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
महामंडलेश्वर महेंद्र दास महाराज ने झांकी का किया समर्थन
झांकी को लेकर उठे विवाद पर महामंडलेश्वर श्री श्री 108 महेंद्र दास महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने झांकी का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी के खिलाफ विरोध करना नहीं, बल्कि बहनों और बेटियों को जागरूक करना है।
उनके अनुसार, युवतियों को सामाजिक परिस्थितियों के प्रति सचेत रहने और अपने अधिकारों को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई और मां दुर्गा जैसे आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन के निर्णय ले सकें।
महामंडलेश्वर ने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से बच्चों को संस्कार और सही मार्ग दिखाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने झांकी को इसी उद्देश्य से तैयार किए जाने की बात कही और पुलिस द्वारा इसे रोके जाने पर नाराजगी जताई।
हालांकि, किसी भी सामाजिक विषय पर जागरूकता फैलाते समय तथ्यों, भाषा और प्रस्तुति का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है, ताकि संदेश के कारण किसी समुदाय के प्रति अनावश्यक तनाव न पैदा हो।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया
सदर बाजार थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के अनुसार, संवेदनशील विषयों से जुड़े पोस्टर और प्रदर्शन सार्वजनिक आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते पुलिस ने झांकी को रोककर आयोजकों से बातचीत की।
पुलिस ने विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए पोस्टर में बदलाव करने पर जोर दिया। इसके बाद संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनी और बारात को आगे जाने दिया गया।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में पुलिस और आयोजकों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से ऐसे संदेशों के मामले में, जिनसे सामाजिक या सामुदायिक तनाव की आशंका हो सकती है, समय रहते संवाद स्थापित करना जरूरी होता है।
रामलीला आयोजकों ने अलग किया अपना पक्ष
मामले के सामने आने के बाद रामलीला के मुख्य आयोजकों की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई। बताया गया कि विवादित झांकी वाली शिव बारात के आयोजक उनसे अलग हैं। इस बयान के जरिए मुख्य रामलीला आयोजन समिति ने संबंधित बारात से अपनी दूरी स्पष्ट की।
हालांकि, इस संबंध में आयोजन समितियों की औपचारिक प्रतिक्रिया और अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
धार्मिक आयोजनों में जिम्मेदारी और सतर्कता जरूरी
मेरठ में शिव बारात के दौरान हुआ यह विवाद धार्मिक आयोजनों में सामाजिक संदेशों की प्रस्तुति को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। एक ओर आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य जागरूकता फैलाना था, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने संभावित तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए हस्तक्षेप किया।
ऐसे मामलों में जरूरी है कि किसी भी सामाजिक समस्या पर चर्चा तथ्यों और जिम्मेदार भाषा के साथ हो। इसके साथ ही, किसी व्यक्ति के साथ होने वाली घटना को पूरे समुदाय से जोड़कर प्रस्तुत करने से बचना चाहिए। इससे सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलती है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पोस्टर में बदलाव के बाद पुलिस ने शिव बारात को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी थी। घटना के वीडियो और संबंधित पक्षों के विस्तृत बयानों की स्वतंत्र पुष्टि होने पर मामले से जुड़ी अन्य जानकारियां भी स्पष्ट हो सकती हैं।

