मेरठ काशी टोल पर किसानों को पुलिस ने रोका, जंतर-मंतर जाने की जिद के बीच हुक्का गुड़गुड़ाते दिखे किसान

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रिपोर्ट – मनीष पराशर

मेरठ, उत्तर प्रदेश। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे किसानों को मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र स्थित काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान पुलिस और किसान नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भारी पुलिस बल की तैनाती के चलते टोल प्लाजा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी नजर आई। वहीं, विरोध के दौरान किसानों का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला, जब एक किसान कुर्सी पर बैठकर हुक्का गुड़गुड़ाता और मोबाइल फोन पर बातचीत करता नजर आया।

प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे किसान संगठनों के नेताओं को रोकने के बाद मामला कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। किसानों ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और हाईवे पर ही धरना शुरू कर दिया। हालांकि, किसान नेता कपिल पूनिया और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद स्थिति को संभाल लिया गया। इसके बाद किसानों ने वापस लौटने का फैसला किया।

काशी टोल प्लाजा पर पुलिस की सख्ती, किसानों ने जताया विरोध

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। इस प्रदर्शन के समर्थन में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के दिल्ली पहुंचने की योजना थी। इसी क्रम में मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से भी कुछ किसान नेता दिल्ली जाने के लिए निकले थे।

प्रदर्शन को देखते हुए मेरठ में पुलिस प्रशासन सतर्क था। प्रमुख टोल प्लाजा और मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा सके।

इसी दौरान जब किसान संगठन से जुड़े नेता काशी टोल प्लाजा पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस पर किसानों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते पुलिस और किसान नेताओं के बीच बहस शुरू हो गई। किसानों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं।

हाईवे पर धरने पर बैठे किसान, हुक्का लेकर किया विरोध

पुलिस द्वारा रोके जाने से नाराज किसानों ने काशी टोल प्लाजा के पास हाईवे पर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों और दिल्ली जाने के फैसले पर कायम रहने की बात कही। विरोध के बीच एक किसान का हुक्का गुड़गुड़ाते हुए बैठना चर्चा का विषय बन गया।

जहां एक ओर पुलिस अधिकारी किसानों को समझाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर किसान अपनी बात पर अड़े हुए थे। किसानों का कहना था कि वे दिल्ली जाकर प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं और उन्हें इस तरह रोका जाना उचित नहीं है।

हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया। अधिकारियों ने किसान नेताओं से बातचीत की और उन्हें समझाने की कोशिश की कि टकराव से बचते हुए मामले का समाधान निकाला जाए।

किसान नेता कपिल पूनिया ने पुलिस से की बातचीत

मामले को सुलझाने के लिए भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) चढ़ूनी से जुड़े किसान नेता कपिल पूनिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की और किसानों के पक्ष को सामने रखा। काफी देर तक चली बातचीत के बाद उन्होंने किसानों को वापस जाने की जानकारी दी।

कपिल पूनिया के मुताबिक, उनकी टीम का जंतर-मंतर पहुंचने का कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है। इसके बावजूद, उनके अनुसार, पुलिस प्रशासन उन्हें दिल्ली जाने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहा था।

किसान नेता ने यह भी आरोप लगाया कि देश में कथित वोट चोरी और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के विरोध में वे जंतर-मंतर जाना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद वे प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे।

उनका कहना था कि विरोध दर्ज कराना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, काशी टोल प्लाजा पर पुलिस के साथ हुई बातचीत के बाद इस बार किसानों ने वापस लौटने का फैसला किया।

पुलिस अधिकारियों की समझाइश के बाद शांत हुआ मामला

काशी टोल प्लाजा पर किसानों के धरने और पुलिस के साथ हुई बहस के बाद प्रशासन ने मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर जोर दिया। परतापुर थाना प्रभारी अजय शुक्ला ने किसान नेताओं से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया।

लंबी बातचीत के बाद किसान नेता कपिल पूनिया और अन्य किसानों को समझा-बुझाकर वापस रवाना कर दिया गया। इस तरह टोल प्लाजा पर चल रहा विरोध समाप्त हुआ और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

हालांकि, किसानों की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस द्वारा उन्हें रोके जाने के कारणों को लेकर संबंधित पक्षों के विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौके पर बातचीत के बाद किसानों ने आगे बढ़ने के बजाय लौटने का निर्णय लिया।

लोकतांत्रिक विरोध और कानून-व्यवस्था पर फिर चर्चा

काशी टोल प्लाजा की घटना ने एक बार फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रशासनिक जिम्मेदारी को चर्चा में ला दिया है। एक ओर किसान नेता जंतर-मंतर पर अपनी बात रखने को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे थे, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन ने उन्हें आगे जाने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की थी।

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