अमेठी में हत्या के दोषी को उम्रकैद, 30 हजार रुपये जुर्माना; ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत फैसला
रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा
अमेठी: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में हत्या के एक मामले में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर कुल 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अमेठी पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत की गई प्रभावी पैरवी के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय, रायबरेली की अदालत ने 9 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। मामले में दोषी को हत्या और साक्ष्य मिटाने से संबंधित धाराओं में सजा दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला अमेठी के मोहनगंज थाना क्षेत्र के कोंची गांव से जुड़ा है। मुकदमे में पर्याप्त साक्ष्य जुटाने, आरोपपत्र दाखिल करने और न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने के बाद फैसला आया। पुलिस अधिकारियों ने इसे अपराध से जुड़े मामलों में समयबद्ध विवेचना और अभियोजन की प्रभावशीलता से जुड़ी कार्रवाई बताया है।
हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में सजा
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कोंची गांव निवासी सर्वेश कुमार उर्फ पिंटू पुत्र स्वर्गीय दिनेश सिंह को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया है। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
इसके अतिरिक्त, धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में सात वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड का आदेश दिया गया। इस प्रकार दोनों धाराओं में कुल 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
पुलिस के अनुसार, अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में एक वर्ष के अतिरिक्त कठोर कारावास का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि, दोनों धाराओं के तहत सुनाई गई सजाओं के एक साथ या अलग-अलग चलने के संबंध में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, इस मामले में कोंची गांव निवासी सरिता सिंह पत्नी स्वर्गीय रवीन्द्र प्रताप सिंह ने 12 अक्टूबर 2023 को मोहनगंज थाने में लिखित तहरीर दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके पति रवीन्द्र प्रताप सिंह को सर्वेश कुमार उर्फ पिंटू घर से बुलाकर ले गया था। आरोप के मुताबिक, इसके बाद चाकू से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 302/2023 दर्ज किया। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और धारा 201 के तहत कार्रवाई की गई। धारा 302 हत्या से संबंधित थी, जबकि धारा 201 अपराध के साक्ष्य मिटाने या अपराध की जानकारी छिपाने से संबंधित है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। विवेचना के दौरान घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों को एकत्र किया गया। इसके बाद पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
विवेचना के बाद न्यायालय में दाखिल हुआ आरोपपत्र
पुलिस की जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन मोहनगंज थाना प्रभारी निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार यादव ने मामले की विवेचना की थी। जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 21 अक्टूबर 2023 को आरोपपत्र न्यायालय भेज दिया गया।
आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई न्यायालय में हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पुलिस का कहना है कि मामले से संबंधित साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा गया, जिससे सुनवाई के बाद दोषसिद्धि का फैसला आया।
इस तरह, अक्टूबर 2023 में दर्ज हुए मामले में करीब तीन वर्ष के भीतर न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को निर्णय सुनाया। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान हुई प्रत्येक कार्यवाही और प्रस्तुत साक्ष्यों का विस्तृत ब्योरा पुलिस की ओर से जारी जानकारी में उपलब्ध नहीं कराया गया है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत अमेठी पुलिस की पैरवी
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान का उद्देश्य आपराधिक मामलों में प्रभावी विवेचना, समय पर आरोपपत्र दाखिल करने और न्यायालय में अभियोजन की पैरवी को मजबूत करना है। अमेठी पुलिस के अनुसार, इसी अभियान के तहत इस मामले की सुनवाई के दौरान लगातार पैरवी की गई।
पुलिस अधीक्षक सरवणन टी. के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में मामले की पैरवी की गई। इस प्रक्रिया में अभियोजन अधिकारी, न्यायालय पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल की भूमिका भी रही।
पुलिस के मुताबिक, संबंधित टीम ने मुकदमे की प्रगति पर नजर रखी और न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की। परिणामस्वरूप, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर अभियुक्त को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
अपराध के मामलों में प्रभावी पैरवी पर जोर
अमेठी पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में विवेचना और अभियोजन की प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य न्यायालय में उचित तरीके से प्रस्तुत हों और मामलों का निस्तारण कानून के अनुसार हो।
इस मामले में भी पुलिस की विवेचना, आरोपपत्र दाखिल करने और अभियोजन की पैरवी के बाद अदालत ने फैसला सुनाया। हत्या के मामले में आजीवन कारावास और साक्ष्य मिटाने के मामले में सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ कुल 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
निष्कर्ष: अमेठी के मोहनगंज थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में न्यायालय का फैसला पुलिस और अभियोजन की पैरवी के बाद आया है। पुलिस ने इसे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है। मामले में अदालत द्वारा सुनाई गई सजा का विवरण पुलिस की ओर से जारी सूचना के आधार पर सामने आया है।

