फतेहपुर में साधु की हत्या के मामले में दो दोषियों को 5-5 वर्ष का सश्रम कारावास
रिपोर्ट- राम चन्द्र सैनी
फतेहपुर, उत्तर प्रदेश। जिले के असोथर थाना क्षेत्र में वर्ष 2012 में साधु बाबा विश्वनाथ के साथ मारपीट के बाद हुई उनकी मृत्यु के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में दोषी पाए गए धर्मेंद्र और रामवीर को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 2,000-2,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
यह मामला करीब 14 वर्ष पुराना है। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया। फैसले के बाद वर्ष 2012 में हुई इस घटना से जुड़े मामले में न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हुआ है।
क्या है फतेहपुर के साधु बाबा विश्वनाथ की हत्या का मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फतेहपुर जिले के असोथर थाना क्षेत्र के बैरहणा गांव के सामने सड़क किनारे निर्मल सिंह की दुग्ध डेयरी थी। निर्मल सिंह ग्राम विधातीपुर मजरे असोथर के निवासी हैं। उनके मकान के पास स्थित एक मंदिर में बाबा विश्वनाथ रहते थे। बताया गया कि बाबा पिछले 10 से 12 वर्षों से वहां रहकर पूजा-पाठ करते थे।
इसी दौरान 20 और 21 जुलाई 2012 की मध्यरात्रि में अज्ञात व्यक्तियों ने बाबा विश्वनाथ के साथ मारपीट की। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। अगली सुबह जब लोगों को घटना की जानकारी हुई, तो बाबा मंदिर के पास घायल अवस्था में मिले। उनके चेहरे और सिर के आसपास चोटें थीं तथा वह बेहोशी की हालत में पड़े हुए थे।
घटना की जानकारी मिलने के बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद निर्मल सिंह की तहरीर के आधार पर थाना असोथर में मुकदमा दर्ज किया गया। शुरुआती कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
गंभीर हालत में कानपुर हैलट अस्पताल भेजे गए थे बाबा
पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से घायल बाबा विश्वनाथ को उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, उनकी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया।
वहां उनका उपचार किया गया, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। अंततः 27 जुलाई 2012 को उपचार के दौरान बाबा विश्वनाथ की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की धाराओं में बदलाव किया और मुकदमे को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या के मामले में तरमीम कर दिया।
इस घटना के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना आगे बढ़ाई। जांच के दौरान घटना में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों की पहचान करने और उनके विरुद्ध साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की गई।
पुलिस विवेचना में धर्मेंद्र और रामवीर के नाम आए सामने
विवेचना के दौरान पुलिस के सामने धर्मेंद्र पुत्र धनराज केवट, निवासी विधातीपुर, तथा रामवीर पुत्र बलदेव, निवासी असोथर के नाम सामने आए। इसके बाद दोनों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई और मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से संबंधित परिस्थितियों और आरोपों को अदालत के सामने प्रस्तुत किया। इसके लिए कुल आठ गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
वहीं, सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर भी विचार किया गया। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और मामले से जुड़े तथ्यों का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।
अदालत ने सुनाई पांच-पांच वर्ष की सजा
मामले की सुनवाई न्यायाधीश हरि प्रकाश गुप्ता की अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर धर्मेंद्र और रामवीर को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत दोषी ठहराया। इसके बाद दोनों को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 2,000-2,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अदालत ने यह भी प्रावधान किया कि अर्थदंड अदा नहीं करने पर दोनों दोषियों को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इस प्रकार, करीब 14 वर्ष पुराने मामले में न्यायालय ने दोनों आरोपियों की दोषसिद्धि के साथ सजा निर्धारित कर दी।
अभियोजन पक्ष ने दी फैसले की जानकारी
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र भदौरिया ने मामले में हुई कार्रवाई और अदालत के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाह प्रस्तुत किए गए थे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने धर्मेंद्र और रामवीर को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।

