यूपी में विवाह पंजीकरण के नियमों में बदलाव, उम्र के प्रमाण के लिए अब आधार कार्ड मान्य नहीं
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण के दौरान वर और वधू की उम्र के सत्यापन को लेकर नई व्यवस्था लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत आधार कार्ड को उम्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बजाय हाईस्कूल प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों के माध्यम से आयु सत्यापन किए जाने की जानकारी है। इस बदलाव का उद्देश्य विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाना और बाल विवाह की आशंका वाले मामलों की पहचान करना बताया जा रहा है।
नई व्यवस्था से विवाह पंजीकरण कराने वाले लोगों को अपने दस्तावेजों पर विशेष ध्यान देना होगा। हालांकि, आधार कार्ड को उम्र के प्रमाण के रूप में अमान्य करने और नई समयसीमाओं से जुड़े सभी प्रावधानों की मूल सरकारी एसओपी से स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। इसलिए आवेदकों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक निर्देशों की जांच करनी चाहिए। citeturn414105search1turn501449search2
आधार कार्ड के बजाय इन दस्तावेजों से होगी उम्र की पुष्टि
विवाह पंजीकरण के लिए उम्र का सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, अब केवल आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर वर-वधू की उम्र प्रमाणित नहीं की जाएगी। इसके लिए निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों का सहारा लिया जाएगा।
उम्र के प्रमाण के तौर पर इन दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है:
- हाईस्कूल या 10वीं का प्रमाण पत्र
- जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
विशेष परिस्थितियों में सक्षम चिकित्सा अधिकारी से जारी आयु प्रमाण पत्र की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि, कौन-सा दस्तावेज किस परिस्थिति में स्वीकार होगा, यह संबंधित नियमों और अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार तय किया जाएगा।
इस बदलाव का व्यावहारिक अर्थ यह है कि विवाह पंजीकरण कराने वाले जोड़े आवेदन से पहले अपनी जन्मतिथि से संबंधित प्रमाण तैयार रखें। यदि अलग-अलग दस्तावेजों में जन्मतिथि या नाम में अंतर है, तो उसे समय रहते स्पष्ट कराना बेहतर होगा।
वर की उम्र 21 और वधू की 18 वर्ष होना जरूरी
विवाह पंजीकरण के मामले में न्यूनतम कानूनी उम्र का पालन करना अनिवार्य है। मौजूदा कानूनी मानक के अनुसार, पुरुष की न्यूनतम विवाह योग्य उम्र 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष है। इसलिए पंजीकरण अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होता है कि दोनों पक्ष निर्धारित उम्र पूरी करते हों।
यदि दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि से यह स्पष्ट नहीं होता कि वर या वधू विवाह के लिए निर्धारित उम्र पूरी कर चुके हैं, तो अधिकारी अतिरिक्त सत्यापन कर सकते हैं। ऐसे में उम्र के प्रमाण की विश्वसनीयता और दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से उम्र के सत्यापन में लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। इसी संदर्भ में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने पर जोर दिया है। अदालत के निर्देशों में दस्तावेजों की जांच और विवाह की वैधता से जुड़े पहलुओं को गंभीरता से लेने की बात कही गई है। citeturn501449search6turn501449search9
बाल विवाह की आशंका पर आवेदन निरस्त करने का प्रावधान
नई व्यवस्था को लेकर सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि यदि किसी आवेदन में वर या वधू की उम्र निर्धारित कानूनी सीमा से कम पाई जाती है, तो आवेदन को 15 दिनों के भीतर निरस्त किया जाएगा। इसके साथ ही मामले की सूचना जिलाधिकारी यानी डीएम को देने की बात भी कही गई है।
इस प्रावधान का उद्देश्य संदिग्ध मामलों को समय रहते पहचानना और बाल विवाह से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। हालांकि, 15 दिनों में आवेदन निरस्त करने और डीएम को सूचना देने की समयसीमा की मूल सरकारी आदेश से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इसे अंतिम रूप से लागू नियम बताने से पहले संबंधित एसओपी या सरकारी आदेश देखना जरूरी है।
यदि किसी आवेदन में उम्र को लेकर संदेह हो, तो पंजीकरण अधिकारी के लिए दस्तावेजों की जांच करना और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लेना महत्वपूर्ण होगा। किसी भी मामले में कार्रवाई संबंधित कानून और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ही की जानी चाहिए।
आधार कार्ड की भूमिका को लेकर समझें अंतर
आधार कार्ड पहचान स्थापित करने में उपयोगी है, लेकिन पहचान का दस्तावेज और जन्मतिथि का प्रमाण एक ही बात नहीं हैं। इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए उम्र सत्यापन के लिए अलग दस्तावेजों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि उम्र के प्रमाण के रूप में आधार स्वीकार न किए जाने का अर्थ यह अपने आप नहीं है कि विवाह पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में आधार का इस्तेमाल बंद हो गया है। पहचान सत्यापन और आयु सत्यापन अलग-अलग चरण हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण से जुड़े पहले के निर्देशों में वर-वधू की पहचान के लिए आधार प्रमाणीकरण और उम्र के सत्यापन के लिए निर्धारित दस्तावेजों का उल्लेख मिलता है। citeturn501449search3turn501449search6
इसलिए आवेदकों को आधार से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को बंद मानने के बजाय संबंधित पंजीकरण कार्यालय के वर्तमान निर्देशों का पालन करना चाहिए।
विवाह पंजीकरण कराने से पहले तैयार रखें जरूरी दस्तावेज
उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं निबंधन विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर विवाह पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित निर्देश उपलब्ध हैं। पोर्टल के अनुसार, आवेदन में पहचान, आयु और निवास प्रमाण पत्र अपलोड करने होते हैं। इसके अलावा, दो गवाहों के पहचान, आयु और निवास संबंधी दस्तावेज तथा वर-वधू के शपथ पत्र भी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। citeturn501449search2
आवेदन करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें:
- वर और वधू की जन्मतिथि का प्रमाण तैयार रखें।
- नाम और जन्मतिथि सभी दस्तावेजों में मिलान कर लें।
- गवाहों के आवश्यक दस्तावेज भी तैयार रखें।
- ऑनलाइन आवेदन में सही जानकारी भरें।
- आवेदन जमा करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर नवीनतम निर्देश देखें।
विवाह पंजीकरण से संबंधित जानकारी और आवेदन के लिए उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं निबंधन विभाग के आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नई व्यवस्था से दस्तावेजों की जांच पर बढ़ेगा जोर
विवाह पंजीकरण में उम्र के सत्यापन को लेकर सामने आई नई जानकारी का मुख्य उद्देश्य दस्तावेजों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना और बाल विवाह की आशंका वाले मामलों की पहचान करना है। इस प्रक्रिया में वर-वधू की न्यूनतम उम्र की पुष्टि और आवेदन में दर्ज विवरणों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
हालांकि, आधार कार्ड को उम्र के प्रमाण के रूप में अमान्य करने, दस्तावेजों की अंतिम सूची और 15 दिनों के भीतर आवेदन निरस्त करने जैसे विशिष्ट प्रावधानों की पुष्टि मूल सरकारी आदेश से होना बाकी है। इसलिए विवाह पंजीकरण कराने वाले लोगों को अपुष्ट जानकारी के आधार पर निर्णय लेने के बजाय संबंधित अधिकारी या आधिकारिक पोर्टल से नियमों की पुष्टि करनी चाहिए।

