कानपुर में UPI पर MDR शुल्क के विरोध में उतरे व्यापारी, सरसैया घाट पर किया सांकेतिक तर्पण

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रिपोर्ट-  हनुमंत सिंह पिंटू

यूपीआई (UPI) से होने वाले डिजिटल लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने की आशंका और इसे लेकर सामने आ रही चर्चाओं के बीच कानपुर के व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कानपुर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा के नेतृत्व में व्यापारियों ने ऐतिहासिक सरसैया घाट पर सांकेतिक तर्पण कर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान यूपीआई मशीनों और क्यूआर कोड के जरिए विरोध का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। व्यापारियों ने कहा कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था व्यापारियों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापार मंडल ने सरकार से अपनी मांग पर विचार करने और शुल्क संबंधी प्रस्ताव को स्पष्ट करने की अपील की है।

सरसैया घाट पर यूपीआई मशीनों का सांकेतिक तर्पण

कानपुर के सरसैया घाट पर आयोजित प्रदर्शन में व्यापारियों ने यूपीआई मशीनों और क्यूआर कोड को लेकर सांकेतिक तर्पण की प्रक्रिया की। इसके जरिए उन्होंने डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के विरोध को सामने रखा। प्रदर्शन में शामिल व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि व्यापारी पहले से ही कारोबार से जुड़ी विभिन्न लागतों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाली डिजिटल व्यवस्था पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि यूपीआई के माध्यम से भुगतान करना ग्राहकों और दुकानदारों, दोनों के लिए सुविधाजनक रहा है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए क्यूआर कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करना आसान विकल्प बन गया है। इसलिए व्यापारियों की मांग है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अतिरिक्त शुल्क के बोझ से बचाया जाए, ताकि इसका इस्तेमाल पहले की तरह सुविधाजनक बना रहे।

ज्ञानेश मिश्रा बोले- व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ स्वीकार नहीं

कानपुर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लगाए जाने के मुद्दे को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है। उन्होंने बताया कि व्यापार मंडल इससे पहले भी अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध दर्ज करा चुका है। संगठन का कहना है कि व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सरकार को उचित निर्णय लेना चाहिए।

ज्ञानेश मिश्रा के मुताबिक, विरोध दर्ज कराने के लिए पहले दो अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाया गया था। इस दौरान नगाड़ा बजाकर व्यापारियों की मांग को सामने रखने का प्रयास किया गया। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर विरोध दर्ज कराया गया। अब सरसैया घाट पर सांकेतिक तर्पण के माध्यम से व्यापारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।

हालांकि, एमडीआर शुल्क को लेकर वास्तविक नियमों और उनके लागू होने की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए व्यापारियों की ओर से व्यक्त की गई आशंकाओं और सरकार की आधिकारिक नीति के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।

छोटे दुकानदारों को लेकर व्यापार मंडल ने जताई चिंता

व्यापार मंडल का कहना है कि डिजिटल भुगतान ने बाजार में लेन-देन को पहले की तुलना में सरल बनाया है। ग्राहक नकदी के बजाय मोबाइल फोन से भुगतान कर सकते हैं, जबकि दुकानदारों को भी भुगतान प्राप्त करने के लिए एक सुविधाजनक माध्यम मिलता है। ऐसे में यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाया जाता है, तो व्यापारियों को अपनी लागत का दोबारा आकलन करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, छोटे कारोबारियों के लिए प्रत्येक अतिरिक्त खर्च महत्वपूर्ण होता है। कम मुनाफे पर कारोबार करने वाले दुकानदारों को भुगतान संबंधी शुल्क का असर महसूस हो सकता है। इसी वजह से व्यापार मंडल इस मुद्दे को केवल भुगतान प्रणाली से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के आर्थिक हितों से जुड़ा विषय मान रहा है।

दूसरी ओर, डिजिटल भुगतान से संबंधित किसी भी शुल्क की स्थिति में यह देखना आवश्यक होगा कि संबंधित नियम किन लेन-देन पर लागू होते हैं, शुल्क किससे लिया जाता है और किन श्रेणियों को इससे छूट प्राप्त है। इन पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी मिलने से व्यापारियों और ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति कम हो सकती है।

14 तारीख तक मांग पर निर्णय लेने की अपील

व्यापार मंडल अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि संगठन ने सरकार को अपनी मांग पर विचार करने के लिए 14 तारीख तक का समय दिया है। व्यापार मंडल के अनुसार, यदि इस अवधि तक शुल्क संबंधी आदेश वापस नहीं लिया जाता है, तो देशभर में विरोध तेज करने की रणनीति अपनाई जाएगी।

संगठन ने चेतावनी दी है कि 15 तारीख तक भी मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा। व्यापारियों का कहना है कि जब तक यूपीआई पर प्रस्तावित या विवादित एमडीआर शुल्क के मुद्दे का समाधान नहीं होता, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।

हालांकि, इस समयसीमा और आगे की आंदोलन संबंधी रणनीति की पुष्टि व्यापार मंडल के बयान के आधार पर ही की जा रही है। संबंधित आदेश की आधिकारिक स्थिति और सरकार की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर बढ़ी चर्चा

कानपुर में हुआ यह प्रदर्शन डिजिटल भुगतान व्यवस्था और व्यापारियों की लागत से जुड़े मुद्दे को फिर चर्चा में ले आया है। यूपीआई ने देश में भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी संचालकों और अन्य कारोबारियों के बीच भी इसका इस्तेमाल बढ़ा है।

ऐसे में भुगतान से जुड़े किसी भी नए शुल्क या नियम को लेकर व्यापारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। व्यापार मंडल चाहता है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा बनी रहे और कारोबारियों पर अनावश्यक अतिरिक्त खर्च न पड़े। वहीं, इस विषय पर सही स्थिति जानने के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देशों को देखना भी जरूरी है।

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