आईआईटी कानपुर में सर्कुलर इकोनॉमी के नवाचारों का प्रदर्शन, पांच स्टार्टअप ने दिखाए तकनीकी समाधान
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कानपुर: प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में आईआईटी कानपुर में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (SIIC), आईआईटी कानपुर में ‘अद्वय–प्लास्टिक सर्कुलैरिटी इनोवेशन लॉन्चपैड’ के पहले कोहोर्ट के पांच स्टार्टअप्स ने अपने विकसित किए गए तकनीकी उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए विकसित तकनीकों को प्रयोगशाला और प्रोटोटाइप स्तर से आगे ले जाकर वास्तविक उपयोग और बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। कार्यक्रम में कानपुर नगर निगम के नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कोहोर्ट-1 के पांचों स्टार्टअप्स को सम्मानित किया और उनके उत्पादों की जानकारी ली।
प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए नए तकनीकी समाधान
आईआईटी कानपुर में आयोजित प्रदर्शनी में प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण और दोबारा उपयोग से जुड़े कई नवाचार प्रस्तुत किए गए। इन स्टार्टअप्स ने बताया कि किस तरह तकनीक के माध्यम से प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है।
कार्यक्रम में Rau Ecostone (Paving+) ने प्लास्टिक और औद्योगिक कचरे से तैयार निर्माण सामग्री का प्रदर्शन किया। यह समाधान निर्माण क्षेत्र में कचरे के पुन: उपयोग की संभावनाओं को सामने लाता है।
वहीं Zuviron ने पुनर्चक्रित सामग्री से तैयार भवन निर्माण और सजावट से जुड़े पैनल प्रदर्शित किए। इन उत्पादों का उद्देश्य निर्माण और इंटीरियर से जुड़े क्षेत्रों में वैकल्पिक एवं पुनर्चक्रित सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा SwachhAI Technologies ने एआई आधारित स्मार्ट बिन प्रस्तुत किया। यह तकनीक कचरे को स्वचालित तरीके से अलग करने के उद्देश्य से विकसित की गई है। इससे कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की संभावनाएं सामने आती हैं।
Fruvetech ने फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पुनर्चक्रित प्लास्टिक से तैयार कोल्ड स्टोरेज समाधान प्रदर्शित किया। दूसरी ओर Mushloop ने माइसीलियम आधारित कंपोस्टेबल पैकेजिंग और प्राकृतिक रंगों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के तौर पर प्रस्तुत किया।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने स्टार्टअप्स को किया सम्मानित
कार्यक्रम में कानपुर नगर निगम के नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने पांचों स्टार्टअप्स के संस्थापकों से बातचीत की। उन्होंने उनके उत्पादों की तकनीक, उपयोगिता और बड़े स्तर पर लागू किए जाने की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली।
इस दौरान स्टार्टअप्स को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में उद्योग, सरकारी संस्थानों और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों के बारे में संवाद करने का अवसर दिया।
कार्यक्रम में एमएसएमई-डीएफओ, कानपुर के निदेशक वी.के. वर्मा, सहायक निदेशक अमित बाजपेयी, परनॉड रिकॉर्ड इंडिया फाउंडेशन के कानपुर प्लांट हेड आकाश सिंह, SIIC आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर-इंचार्ज प्रो. दीपू फिलिप और सीईओ डॉ. आशुतोष अग्निहोत्री समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अद्वय कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
‘अद्वय–प्लास्टिक सर्कुलैरिटी इनोवेशन लॉन्चपैड’ का उद्देश्य भारत में सर्कुलर प्लास्टिक इकोनॉमी को मजबूत करना है। इसके तहत प्लास्टिक कचरे के संग्रह, छंटाई, पुनर्चक्रण, दोबारा इस्तेमाल और वैकल्पिक सामग्री से जुड़े तकनीकी समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप्स को सहायता दी जाती है।
कार्यक्रम के माध्यम से स्टार्टअप्स को वित्तीय सहयोग के साथ व्यवस्थित इनक्यूबेशन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा संबंधित संस्थानों और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर भी दिए जाते हैं।
इसका फायदा यह है कि शुरुआती स्तर पर विकसित तकनीकों को आगे बढ़ाने, उनके बिजनेस मॉडल को मजबूत करने और उन्हें बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करने में मदद मिलती है। साथ ही, स्टार्टअप्स के लिए वास्तविक परिस्थितियों में अपने समाधान को लागू करने के अवसर भी तैयार किए जाते हैं।
कोहोर्ट-1 के लिए अहम पड़ाव
पांच स्टार्टअप्स के उत्पादों की प्रदर्शनी को अद्वय कार्यक्रम के पहले कोहोर्ट के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इसके माध्यम से स्टार्टअप्स ने इनक्यूबेशन के दौरान हुई अपनी प्रगति को उद्योग, सरकार और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के सामने रखा।
इस दौरान तकनीकों को बड़े स्तर पर विस्तार देने, बाजार में उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने और प्लास्टिक के पुनर्चक्रण एवं दोबारा इस्तेमाल से जुड़े समाधानों को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने पर चर्चा हुई।
कोहोर्ट-2 की भी हुई शुरुआत
कार्यक्रम के साथ ही अद्वय के अगले चरण की शुरुआत भी की गई। दूसरे कोहोर्ट में शामिल स्टार्टअप्स के लिए आईआईटी कानपुर में आवासीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बिजनेस मॉडल, कचरा प्रबंधन, तकनीक को बड़े स्तर पर विस्तार देने और निवेश के लिए तैयारी जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
इस चरण का उद्देश्य स्टार्टअप्स को उनके विकास के अगले स्तर के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के जरिए उन्हें तकनीकी समाधान के साथ-साथ व्यावसायिक दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायता मिलेगी।
प्लास्टिक सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा
अद्वय पहल के जरिए SIIC, आईआईटी कानपुर और परनॉड रिकॉर्ड इंडिया फाउंडेशन प्लास्टिक कचरे और संसाधनों के पुनर्चक्रण से जुड़े तकनीकी उपक्रमों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, आईआईटी कानपुर में आयोजित यह कार्यक्रम ऐसे स्टार्टअप्स के लिए महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया है, जो पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक आधारित विकल्प विकसित कर रहे हैं। इन नवाचारों को प्रोटोटाइप स्तर से आगे बढ़ाकर बड़े पैमाने पर वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने की कोशिश आने वाले समय में सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने में मदद कर सकती है।

