दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 6 CBI अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत का आदेश

WhatsApp Image 2026-10-08 at 12.00.35 PM

रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के छह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। मामला अदालत के समक्ष कथित रूप से गलत तथ्य प्रस्तुत करने से जुड़ा है। न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग को खारिज कर दिया गया था।

हाईकोर्ट ने संबंधित विशेष न्यायाधीश को छह अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत तैयार कर उसे संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के पास भेजने का निर्देश दिया है। इसके लिए चार सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की गई है। जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद शामिल हैं।

2 अगस्त 2016 के जवाब से जुड़ा है मामला

यह पूरा विवाद CBI की ओर से 2 अगस्त 2016 को अदालत में दाखिल किए गए जवाब से संबंधित है। उस समय IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के मामले में जांच के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों को वापस करने को लेकर कार्यवाही चल रही थी। CBI ने कुछ दस्तावेज वापस किए जाने पर आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन अन्य दस्तावेजों को लौटाने का विरोध किया था।

CBI की ओर से अदालत के सामने यह बात रखी गई थी कि आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है और भविष्य की कानूनी कार्यवाही के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, अग्रवाल ने इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उस समय वास्तविक स्थिति इससे अलग थी और संबंधित मंत्रालय के साथ ऐसी प्रक्रिया उस रूप में चल नहीं रही थी, जैसा अदालत के सामने बताया गया।

इसके बाद अशोक कुमार अग्रवाल ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की। उनका आरोप था कि अदालत में दाखिल जवाब में तथ्यात्मक रूप से गलत स्थिति प्रस्तुत की गई थी।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और फाइल नोटिंग की जांच की

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केवल अंतिम जवाब को ही नहीं, बल्कि उससे पहले तैयार किए गए विभिन्न ड्राफ्ट, फाइल नोटिंग और जवाब तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों को भी देखा। अदालत के अनुसार, इन दस्तावेजों को सामूहिक रूप से देखने पर आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार दिखाई देता है।

अदालत ने माना कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री केवल किसी दावे को साबित करने में विफल रहने का मामला नहीं है। बल्कि, अदालत के सामने रखे गए कथन और उस समय की वास्तविक स्थिति के बीच महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देता है। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर मामले में आगे जांच और आपराधिक शिकायत की आवश्यकता मानी।

न्यायालय ने यह भी कहा कि जवाब को तैयार करने, उसमें बदलाव करने, उसकी जांच, प्रक्रिया, मंजूरी और अंततः उसे अदालत में दाखिल करने से जुड़े अधिकारियों की भूमिकाओं को रिकॉर्ड के आधार पर देखा गया है। इन परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया यह आधार बनता है कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

किन धाराओं के तहत होगी कार्रवाई?

दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 191, 193 और 209 के तहत शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है।

धारा 191 झूठा साक्ष्य देने से संबंधित है, जबकि धारा 193 झूठे साक्ष्य देने या गढ़ने की सजा से जुड़ी है। वहीं धारा 209 अदालत में धोखाधड़ी या बेईमानी से गलत दावा करने से संबंधित है।

हालांकि, इस स्तर पर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाईकोर्ट का आदेश अधिकारियों को दोषी ठहराने वाला अंतिम फैसला नहीं है। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया आधार पाए हैं और इसी कारण शिकायत की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। संबंधित अधिकारियों की वास्तविक भूमिका, ज्ञान, मंशा और कथित कृत्य की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम मजिस्ट्रेट द्वारा कानून के अनुसार किया जाएगा।

निचली अदालत के आदेश को किया रद्द

अशोक कुमार अग्रवाल ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। विशेष न्यायाधीश ने पहले आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद अग्रवाल ने हाईकोर्ट का रुख किया।

न्यायमूर्ति मधु जैन ने अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और शिकायत की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित विशेष न्यायाधीश से कहा है कि छह अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत तैयार कर उसे संबंधित मजिस्ट्रेट को चार सप्ताह के भीतर भेजा जाए।

क्या है अशोक कुमार अग्रवाल से जुड़ा पुराना मामला?

अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ CBI ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में कार्रवाई की थी। जनवरी 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अभियोजन की अनुमति यानी sanction को अमान्य माना था। इसके बाद अग्रवाल को मामले में राहत मिली और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

इसके बाद CBI ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना पर विचार किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जून 2016 में कानून मंत्रालय की राय में इस मामले को आगे चुनौती देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं होने की बात कही गई थी। यह राय जुलाई 2016 में संबंधित विभाग के माध्यम से CBI तक पहुंची।

इसी घटनाक्रम के बीच जब दस्तावेजों की वापसी को लेकर अदालत में CBI का जवाब दाखिल हुआ, तो अशोक कुमार अग्रवाल ने उसमें कही गई बातों पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि अदालत के सामने प्रशासनिक मंत्रालय के साथ चल रहे पत्राचार के संबंध में सही स्थिति नहीं बताई गई।

चार सप्ताह में आगे बढ़ेगी शिकायत की प्रक्रिया

अब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम शिकायत को संबंधित मजिस्ट्रेट के पास भेजना होगा। अदालत ने इसके लिए चार सप्ताह की समयसीमा तय की है। इसके बाद सक्षम न्यायालय मामले को स्वतंत्र रूप से कानून के अनुसार देखेगा।

इस आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों की शुद्धता और जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया है। साथ ही, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्तर पर उसकी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया आकलन हैं। इसलिए आगे की न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों और संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत भूमिका का परीक्षण किया जाना बाकी है।

कुल मिलाकर, दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश अदालत के समक्ष तथ्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है। अब छह CBI अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और सक्षम न्यायालय उपलब्ध रिकॉर्ड तथा कानून के आधार पर आगे का निर्णय करेगा।

You may have missed