मेरठ में सरकारी हाईवे निर्माण के नाम पर मिट्टी खनन का विवाद, वैध परमिशन वाले ठेकेदारों ने लगाए उत्पीड़न के आरोप
रिपोर्ट – मनीष पराशर
मेरठ। दौराला से बहचौला तक बनकर तैयार हुए करीब 13 किलोमीटर लंबे लिंक हाईवे के निर्माण के दौरान मिट्टी आपूर्ति को लेकर अब विवाद सामने आया है। सरकारी टेंडर के तहत हाईवे निर्माण के लिए मिट्टी उपलब्ध कराने वाली कंपनी से जुड़े लोगों का आरोप है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच शासन-प्रशासन से अनुमति लेकर और निर्धारित रॉयल्टी जमा करने के बाद मिट्टी उठाने के बावजूद उन्हें वर्तमान में क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन से जोड़कर परेशान किया जा रहा है। पीड़ितों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक, दौराला से बहचौला तक लगभग 13 किलोमीटर लंबे लिंक हाईवे के निर्माण का सरकारी टेंडर देवयश कंपनी को मिला था। हाईवे निर्माण के लिए मिट्टी की आपूर्ति का कार्य संगीता एंड संस को सौंपा गया था। कंपनी से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, इसके बाद किसानों से आवश्यक अनुमति लेकर उनके खेतों से मिट्टी उठाने का काम किया गया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया वर्ष 2022 से 2024 तक चली और इस दौरान संबंधित विभागों से अनुमति लेने के साथ ही रॉयल्टी भी जमा की गई।
2024 के बाद मिट्टी उठाने का काम बंद करने का दावा
संगीता एंड संस से जुड़े लोगों का कहना है कि लिंक हाईवे का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वर्ष 2024 में मिट्टी उठाने का काम पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद क्षेत्र में बाद के वर्षों में मिट्टी खनन की गतिविधियां सामने आने लगीं। कंपनी से जुड़े लोगों का दावा है कि वर्तमान में हो रहे कथित अवैध खनन से उनका कोई संबंध नहीं है।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय अवैध खनन करने वालों की पहचान किए जाने के बजाय पूर्व में सरकारी अनुमति के तहत काम करने वाले लोगों को ही जांच और मुकदमों में घसीटा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि पूरे मामले में प्रशासनिक जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों ने भी रखी अपनी बात
मामले में किसान मुनेंद्र जलालपुर का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2022, 2023 और 2024 में सरकारी अनुमति के आधार पर लिंक हाईवे निर्माण के लिए अपने खेत से मिट्टी उठाने की अनुमति दी थी। उनके मुताबिक, उनके पास संबंधित अनुमति और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2024 के बाद उन्होंने किसी प्रकार का मिट्टी खनन नहीं कराया।
मुनेंद्र ने प्रशासन और एसडीएम से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और वर्तमान में यदि कहीं अवैध खनन हो रहा है तो वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए। उनका कहना है कि जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौजूदा समय में मिट्टी कौन उठा रहा है।
इसी तरह स्थानीय किसान अतीन कुमार ने भी बताया कि उनके खेतों से मिट्टी सरकारी लिंक हाईवे परियोजना के लिए संगीता एंड संस के माध्यम से देवयश कंपनी को दी गई थी। उनके अनुसार, उस समय आवश्यक सरकारी अनुमति और प्रक्रिया का पालन किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के बाद मिट्टी उठाने का काम बंद हो चुका है, फिर भी मौजूदा अवैध खनन से उनका नाम जोड़ा जा रहा है।
संगीता एंड संस के मैनेजर ने लगाए उत्पीड़न के आरोप
संगीता एंड संस के मैनेजर मनीष चौहान ने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले कंपनी ने सरकारी अनुमति और रॉयल्टी जमा करने के बाद मिट्टी उठाने का कार्य किया था। उनके अनुसार, हाईवे निर्माण की जरूरत के मुताबिक ही मिट्टी की आपूर्ति की गई थी और परियोजना पूरी होने के बाद यह काम बंद कर दिया गया।
मनीष चौहान का आरोप है कि वर्तमान में क्षेत्र में जो भी अवैध खनन हो रहा है, उससे कंपनी का कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद कंपनी से जुड़े लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पुराने दस्तावेजों और वर्तमान में हो रही खनन गतिविधियों की अलग-अलग जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
प्रशासन ने कहा- जांच के आधार पर होगी कार्रवाई
वहीं, पूरे मामले में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए एसडीएम सरधना उदय सेंगर से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अवैध खनन से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई हैं और मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है।
एसडीएम के अनुसार, जो भी व्यक्ति या पक्ष बिना अनुमति अथवा नियमों का उल्लंघन करते हुए मिट्टी खनन में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी निर्दोष व्यक्ति का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दस्तावेजों और मौजूदा खनन की जांच से साफ होगी तस्वीर
फिलहाल मेरठ के इस मामले में मुख्य सवाल यही है कि वर्ष 2024 के बाद क्षेत्र में यदि अवैध मिट्टी खनन हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन लोग हैं। वहीं, जिन कंपनियों और किसानों ने सरकारी अनुमति के तहत हाईवे निर्माण के लिए मिट्टी उपलब्ध कराने का दावा किया है, उनके दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।

