बांदा में आशा बहुओं ने 7 सूत्रीय मांगों को लेकर DM को सौंपा ज्ञापन, मानदेय बढ़ाने की मांग
रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा: स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा बहुओं और संगिनियों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचकर सात सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय बढ़ाने, केंद्रीय स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा देने और काम के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में आशा बहुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए उनकी मांगों पर शासन स्तर से गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
आशा बहुओं का कहना है कि वे वर्ष 2014 से स्वास्थ्य विभाग के साथ काम कर रही हैं और शासन तथा प्रशासन की ओर से निर्धारित जिम्मेदारियों का लगातार निर्वहन कर रही हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं से जोड़ने में आशा कार्यकर्ता अहम भूमिका निभाती हैं। किसी महिला को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर उसे तत्काल उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल पहुंचाने और निःशुल्क एंबुलेंस की सुविधा दिलाने में भी वे सहयोग करती हैं।
मानदेय 24 दिन से बढ़ाकर 30 दिन करने की मांग
ज्ञापन में आशा बहुओं ने कहा कि उनके कार्य के अनुरूप मानदेय की व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्तमान में मिलने वाले 24 दिन के मानदेय को बढ़ाकर 30 दिन करने की मांग की है। साथ ही अन्य विभागों में कार्यरत सुपरवाइजरों की तरह समान वेतन दिए जाने की भी मांग उठाई गई।
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के दौरान उन्हें अलग-अलग स्थानों पर जाकर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और लोगों से संपर्क करना पड़ता है। ऐसे में उनके कार्य के अनुपात में मानदेय और अन्य भत्तों में वृद्धि आवश्यक है।
विजिट भत्ता 300 से बढ़ाकर 700 रुपये करने की मांग
आशा बहुओं और संगिनियों ने विजिट भत्ते में बढ़ोतरी की भी मांग की है। उनका कहना है कि कई बार उन्हें करीब 40 किलोमीटर तक की दूरी तय करके सुपरविजन के लिए जाना पड़ता है। इसके बावजूद वर्तमान में 300 रुपये प्रति विजिट का भत्ता मिलता है।
उन्होंने इस राशि को बढ़ाकर 700 रुपये प्रति विजिट करने की मांग की। इसके अलावा आने-जाने के लिए वाहन की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है। आशा कार्यकर्ताओं के मुताबिक, दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से आवागमन करना उनके काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
ज्ञापन में आशा बहुओं ने खुद को केंद्रीय स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग प्रमुखता से रखी। इसके साथ ही उन्होंने मानदेय में हर वर्ष 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने की मांग की है।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य उनके माध्यम से ग्रामीण स्तर तक पहुंचते हैं। इसलिए उनके कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक और सेवा संबंधी सुविधाओं में सुधार किया जाना चाहिए।
खराब मोबाइल बदलने की मांग
आशा बहुओं ने काम के लिए उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन की समस्या भी अधिकारियों के सामने रखी। उन्होंने बताया कि उनके काम का बड़ा हिस्सा अब ऑनलाइन माध्यम से होता है। विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज करनी पड़ती है। ऐसे में खराब हो चुके मोबाइल फोन के कारण काम प्रभावित होता है।
इसलिए उन्होंने खराब मोबाइल फोन को बदलकर नया मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि ऑनलाइन कार्य समय पर और सुचारु रूप से किया जा सके।
भुगतान में कटौती पर लिखित सूचना की मांग
आशा कार्यकर्ताओं ने भुगतान में होने वाली कटौती को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि बिना किसी कारण के उनके भुगतान में कटौती नहीं की जानी चाहिए। यदि किसी कारणवश भुगतान में कटौती की जाती है तो संबंधित आशा या संगिनी को इसकी जानकारी लिखित पत्र के माध्यम से दी जाए।
इसके अलावा किसी आशा या संगिनी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को नौकरी और 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग भी की गई है। आशा बहुओं ने एकमुश्त समान मानदेय दिए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की है।
मुख्यमंत्री और महानिदेशक को भी भेजी मांगों की प्रति
आशा बहुओं ने जिला अधिकारी को सात सूत्रीय मांगपत्र सौंपने के साथ ही इसकी एक प्रति महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), लखनऊ और मुख्यमंत्री को भी भेजी है। उन्होंने शासन से मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। इसलिए उनकी समस्याओं और मांगों का समाधान किया जाना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे काम बंद कर धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगी।
फिलहाल आशा बहुओं की ओर से सौंपे गए सात सूत्रीय मांगपत्र के बाद अब उनकी मांगों पर शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजर है। आशा कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं पर विचार करते हुए मानदेय, यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाओं में आवश्यक सुधार करेगी।

