धाता के सरस्वती विद्या मंदिर में साइबर क्राइम कार्यशाला, छात्रों को ऑनलाइन ठगी से बचाव की दी जानकारी

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रिपोर्ट – अशोक सिंह 

धाता: सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज धाता में साइबर क्राइम और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। साइबर पुलिस टीम की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को बदलते डिजिटल दौर में साइबर अपराधों से बचने के महत्वपूर्ण तरीके बताए गए। इस दौरान विद्यार्थियों को ऑनलाइन लेनदेन, सोशल मीडिया, बैंकिंग और मोबाइल एप्स के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

कार्यशाला में साइबर पुलिस टीम के सत्यम राय और ब्रजेश चौहान ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधी भी ऑनलाइन ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति, लिंक, कॉल या संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।

ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के बताए तरीके

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को विशेष रूप से ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के उपाय बताए गए। साइबर टीम ने समझाया कि कई बार ठगी करने वाले लोग अलग-अलग बहाने बनाकर लोगों से बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN, ATM या बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

इसके साथ ही विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करने के नाम पर QR कोड स्कैन करने या UPI PIN दर्ज करने के लिए कहता है, तो ऐसा करने से बचना चाहिए। सामान्य तौर पर भुगतान प्राप्त करने के लिए UPI PIN दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए इस तरह के अनुरोध को लेकर विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है।

OTP और बैंकिंग धोखाधड़ी से रहें सावधान

साइबर पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को OTP और बैंकिंग फ्रॉड के संबंध में भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि बैंक या किसी वैध संस्था के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल या संदेशों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में OTP या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी अनजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए।

इसके अलावा, विद्यार्थियों को फर्जी नौकरी और लोन स्कैम के बारे में भी जानकारी दी गई। साइबर अपराधी कई बार आकर्षक नौकरी, आसान लोन या कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने का झांसा देकर लोगों से पैसे या व्यक्तिगत जानकारी मांग सकते हैं। ऐसे मामलों में बिना सत्यापन के किसी भी तरह का भुगतान करने से बचने की सलाह दी गई।

डिजिटल अरेस्ट और सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग पर भी चर्चा

कार्यशाला में डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध के नए तरीकों के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी गई। साइबर टीम ने बताया कि किसी भी फोन कॉल या ऑनलाइन माध्यम से डराकर या दबाव बनाकर पैसे की मांग किए जाने पर तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय परिवार के सदस्यों और संबंधित अधिकारियों को जानकारी देना जरूरी है।

वहीं, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर भी विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। सोशल मीडिया अकाउंट पर मजबूत पासवर्ड रखने, पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने और अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट या संदेशों पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई। साथ ही, निजी फोटो, वीडियो और व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा करने से पहले उसके संभावित प्रभावों को समझने की बात कही गई।

संदिग्ध लिंक और APK फाइल से बचने की सलाह

साइबर टीम ने विद्यार्थियों को संदिग्ध लिंक और अनजान स्रोतों से मिलने वाली APK फाइलों के प्रति भी सचेत किया। बताया गया कि मोबाइल फोन में किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करना या संदिग्ध एप्लिकेशन इंस्टॉल करना नुकसानदायक हो सकता है।

इसलिए विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही एप डाउनलोड करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। इसी तरह, सोशल मीडिया या मैसेजिंग एप के जरिए प्राप्त संदिग्ध फाइलों को डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।

साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत करें शिकायत

कार्यशाला के दौरान साइबर पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण जानकारी भी दी कि यदि किसी व्यक्ति के साथ वित्तीय साइबर धोखाधड़ी हो जाती है, तो उसे घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। पीड़ित व्यक्ति राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकता है और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करा सकता है।

समय पर शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के लिए जरूरी जानकारी मिल सकती है। इसलिए साइबर धोखाधड़ी की जानकारी मिलते ही देरी न करने की सलाह दी गई। विद्यार्थियों को आधिकारिक माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी जागरूक किया गया।

सुरक्षित डिजिटल व्यवहार पर दिया जोर

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना रहा। साइबर टीम ने कहा कि तकनीक आज शिक्षा, बैंकिंग, खरीदारी और संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। ऐसे में इसके लाभ उठाने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों को समझना भी जरूरी है।

इसके लिए मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल, गोपनीय जानकारी साझा न करना, संदिग्ध लिंक से दूरी बनाना और सोशल मीडिया पर सावधानी बरतना बेहद उपयोगी कदम हैं। विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे कार्यशाला में मिली जानकारी को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सकें।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे और साइबर टीम से जरूरी जानकारी प्राप्त की। कार्यशाला में साइबर पुलिस टीम के सदस्यों के साथ विद्यालय के शिक्षक, स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने और साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया।