कानपुर में निषाद पार्टी ने किया जोरदार प्रदर्शन, संजय निषाद को धमकी के मामले में कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह
कानपुर: निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी और जातिसूचक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। इसी प्रकरण के विरोध में बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को कानपुर में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
पार्टी की ओर से दिए गए ज्ञापन के अनुसार, गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र में डॉ. संजय कुमार निषाद के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषण दिए गए। पार्टी का दावा है कि इन वक्तव्यों में ‘गर्दन काटने’ और ‘हाथ काटने’ जैसे हिंसक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, जातिसूचक टिप्पणियां किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों को लेकर निषाद पार्टी ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
कानपुर में कार्यकर्ताओं ने जताया विरोध
मामले को लेकर कानपुर में प्रदर्शन के दौरान निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर जान से मारने की धमकी या जातिसूचक टिप्पणी किए जाने को गंभीर विषय माना जाना चाहिए। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।
प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने कानपुर जिलाधिकारी कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। इसमें कथित घटना से संबंधित भाषणों, वीडियो, ऑडियो और सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही, पार्टी ने उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की भी मांग प्रशासन के सामने रखी है, ताकि जांच के दौरान किसी महत्वपूर्ण सामग्री के प्रभावित होने की आशंका न रहे।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
निषाद पार्टी की ओर से प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पार्टी ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। इसके लिए कथित भाषणों और सोशल मीडिया सामग्री की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान जान से मारने की धमकी या जातिसूचक अपमान के आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके साथ ही, दोष सिद्ध होने की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
इसके अलावा पार्टी ने कथित तौर पर धमकी देने वाले व्यक्तियों की पहचान करने और आवश्यकता के अनुसार कानूनी तथा निवारक कदम उठाने की मांग भी की है। पार्टी का कहना है कि पूरे मामले में कार्रवाई तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होनी चाहिए।
संजय निषाद की सुरक्षा की समीक्षा की मांग
ज्ञापन में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद की सुरक्षा की समीक्षा किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में धमकी से संबंधित तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए।
पार्टी के अनुसार, किसी सार्वजनिक या राजनीतिक व्यक्ति के खिलाफ गंभीर धमकी के आरोप सामने आने पर प्रशासन को मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उचित कदम उठाने चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का अनुरोध किया।
सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर
निषाद पार्टी ने अपने ज्ञापन में कहा कि राजनीतिक और वैचारिक असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। हालांकि, पार्टी का कहना है कि असहमति को व्यक्तिगत धमकी या जातिसूचक टिप्पणी के स्तर तक नहीं पहुंचना चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि मामले में किसी भी पक्ष के प्रभाव के बिना निष्पक्ष जांच की जाएगी। साथ ही, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी और सामाजिक स्तर पर भी अनावश्यक तनाव को रोकने में सहायता मिलेगी।
संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने की बात
कानपुर में प्रदर्शन के दौरान निषाद पार्टी के पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी इस मामले में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और संवैधानिक माध्यमों से प्रशासन के सामने रख रही है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि कथित घटना की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि प्रशासन को उपलब्ध वीडियो, ऑडियो और सोशल मीडिया सामग्री की जांच करनी चाहिए, ताकि आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इसके बाद यदि किसी व्यक्ति की भूमिका कानून के दायरे में आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण में निषाद पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में प्रशासन की ओर से मामले में क्या कार्रवाई की जाती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

