कुशीनगर में थानाध्यक्ष बनने के लिए दरोगाओं की हुई लिखित परीक्षा, प्रदर्शन के आधार पर मिली जिम्मेदारी – पढ़िए नाम

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र गुप्ता 

कुशीनगर: पुलिस महकमे में थानाध्यक्षों की तैनाती को लेकर कुशीनगर पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है। अब थाना प्रभारी की जिम्मेदारी तय करने में केवल वरिष्ठता और अनुभव को ही आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि संबंधित पुलिसकर्मी की कार्यकुशलता, क्षेत्र की समझ, निर्णय क्षमता और जनशिकायतों के निस्तारण की क्षमता को भी परखा जाएगा। इसी क्रम में कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक केशव कुमार की पहल पर थानाध्यक्ष बनने के इच्छुक दरोगाओं की लिखित परीक्षा कराई गई।

इस परीक्षा में पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के साथ-साथ कुशीनगर की भौगोलिक परिस्थितियों, अपराध की चुनौतियों और आम लोगों से जुड़े व्यवहारिक विषयों पर भी पुलिसकर्मियों की समझ परखी गई। परीक्षा में प्रदर्शन और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर पुलिसकर्मियों को थाना, चौकी और अन्य सेल की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

थानाध्यक्ष बनने के इच्छुक दरोगाओं से मांगे गए आवेदन

पुलिस विभाग की इस प्रक्रिया के तहत थानाध्यक्ष बनने के इच्छुक दरोगाओं से आवेदन मांगे गए थे। करीब 20 पुलिसकर्मियों ने थाना प्रभारी बनने के लिए आवेदन किया। इनमें एक महिला दरोगा भी शामिल थीं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद महज 15 दिनों के भीतर लिखित परीक्षा समेत चयन की प्रक्रिया पूरी कराई गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य थानों की कमान ऐसे पुलिसकर्मियों को देना है, जो संबंधित जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने की क्षमता रखते हों। इसके लिए परीक्षा में केवल किताबों और नियम-कानून से संबंधित जानकारी पर निर्भर नहीं रहा गया, बल्कि पुलिसकर्मियों की व्यावहारिक समझ को भी जांचा गया।

कानून-व्यवस्था से लेकर जिले की भौगोलिक स्थिति तक सवाल

लिखित परीक्षा में कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों को शामिल किया गया। इसके साथ ही कुशीनगर की भौगोलिक परिस्थितियों और जिले में अपराध की चुनौतियों को लेकर भी सवाल पूछे गए।

परीक्षा में तस्करी पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने, कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पुलिसिंग की रणनीति तैयार करने से जुड़े सवाल भी शामिल रहे। इसके अलावा फरियादियों के साथ पुलिस का व्यवहार कैसा होना चाहिए और जनशिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किस तरह किया जाना चाहिए, इस पहलू को भी महत्व दिया गया।

इस तरह परीक्षा के जरिए यह समझने का प्रयास किया गया कि संबंधित पुलिसकर्मी केवल नियम-कानून की जानकारी रखता है या फिर जरूरत के समय उसका व्यावहारिक इस्तेमाल भी कर सकता है।

जनशिकायतों के निस्तारण को भी बनाया गया आधार

कुशीनगर पुलिस की ओर से आईजीआरएस और जनशिकायतों के निस्तारण में बेहतर प्रदर्शन का दावा किया जाता रहा है। ऐसे में थानाध्यक्ष और चौकी प्रभारी की जिम्मेदारी तय करते समय शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।

दरअसल, थाने पहुंचने वाले फरियादी के लिए पुलिस का व्यवहार और उसकी समस्या को गंभीरता से सुनना काफी महत्वपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा में जनसुनवाई, शिकायतों की जांच और उनके प्रभावी निस्तारण से जुड़े व्यवहारिक पहलुओं को शामिल किया गया।

अर्थात, नई व्यवस्था में पुलिसकर्मी की कार्यक्षमता को केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि जनता से संवाद और शिकायतों के समाधान की क्षमता को भी जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।

छह दरोगाओं को मिली थानों की कमान

एसपी केशव कुमार के मुताबिक, परीक्षा और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर कुल 22 पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इनमें छह दरोगाओं को थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इनमें अमित सिंह, महेश चौबे, अरुण सिंह, महेंद्र प्रजापति, धर्मेंद्र सिंह और स्वतंत्र सिंह को अलग-अलग थानों की कमान दी गई है। वहीं ब्रह्म उपाध्याय, राम प्रवेश सिंह, अनुराग यादव और शिवम त्रिवेदी को चौकी प्रभारी बनाया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मियों का अनुमोदन नहीं हुआ, जबकि कुछ परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। इसलिए सभी आवेदकों को थाना प्रभारी की जिम्मेदारी नहीं दी गई।

अनुभव के साथ क्षमता को भी प्राथमिकता

इस प्रक्रिया की खास बात यह रही कि जिन पुलिसकर्मियों को चौकी प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें पहले किसी स्थान पर प्रभारी के रूप में काम करने का अनुभव नहीं रहा है। ऐसे पुलिसकर्मियों को सीधे थाना प्रभारी बनाने के बजाय पहले चौकी की जिम्मेदारी दी गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इससे उन्हें फील्ड स्तर पर नेतृत्व और कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। आगे उनके प्रदर्शन और कार्यक्षमता के आधार पर बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना रहेगी।

आगे भी जारी रहेगी परीक्षा आधारित व्यवस्था

एसपी केशव कुमार के अनुसार, थानाध्यक्ष बनने की इच्छा रखने वाले पुलिसकर्मियों से आवेदन लेने के बाद उनकी कार्यकुशलता और क्षमता का आकलन किया गया। परीक्षा में प्राप्त अंकों और अन्य मानकों के आधार पर थाना, चौकी और अन्य सेल की जिम्मेदारी तय की गई।

एसपी ने संकेत दिया कि यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी। यानी भविष्य में भी थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी तय करते समय केवल वरिष्ठता या अनुभव को ही आधार नहीं माना जाएगा। पुलिसकर्मी की क्षमता, संबंधित क्षेत्र की समझ, कार्यकुशलता, निर्णय लेने की क्षमता और जनता से जुड़े मामलों को संभालने की योग्यता को भी महत्व दिया जाएगा।

कुशीनगर पुलिस की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि थाना प्रभारी स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और जनशिकायतों के निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में जिम्मेदारी सौंपने से पहले पुलिसकर्मियों की क्षमता को अलग-अलग मानकों पर परखने की व्यवस्था से विभाग को बेहतर नेतृत्व चुनने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव संबंधित पुलिसकर्मियों के आगामी कार्य प्रदर्शन से ही स्पष्ट होगा।

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