मेरठ में बंदरों के आतंक से परेशान पार्षद पति ने पहना लंगूर का मुखौटा, DM को सौंपा ज्ञापन

00ccc525-c98e-4443-8b64-e85f171c2705

रिपोर्ट – मनीष पाराशर 

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बंदरों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़ी परेशानियों को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है। वार्ड नंबर 60 से भाजपा पार्षद रेखा सिंह के पति और पूर्व पार्षद नीरज सिंह ने बंदरों की समस्या के विरोध में अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। वह अपने समर्थकों के साथ मुंह पर बंदर और लंगूर का मुखौटा पहनकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और बंदरों को पकड़ने तथा समस्या का समाधान कराने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

नीरज सिंह का कहना है कि उनके वार्ड सहित मेरठ के कई इलाकों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खास तौर पर स्कूलों के आसपास बंदरों के झुंड जमा होने से बच्चों और उनके अभिभावकों में चिंता बनी रहती है। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।

स्कूलों के बाहर जमा रहते हैं बंदरों के झुंड

ज्ञापन में नीरज सिंह ने बताया कि वार्ड क्षेत्र के कई स्कूलों के आसपास बड़ी संख्या में बंदर दिखाई देते हैं। इनमें मॉडर्न स्कूल, हैप्पी वैली स्कूल, जेमिनी पब्लिक स्कूल और डैफोडिल्स समेत अन्य शिक्षण संस्थानों का उल्लेख किया गया है। उनके मुताबिक, स्कूलों के बाहर कई बार 100 से 250 तक बंदरों के झुंड देखे जाते हैं।

उनका कहना है कि स्कूल आने-जाने वाले छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बन रही है। इसके अलावा स्थानीय लोगों को भी बंदरों के कारण आवागमन में दिक्कत होती है। नीरज सिंह के अनुसार, क्षेत्र में बंदरों के काटने और उनके हमले से कई लोग घायल हो चुके हैं।

उन्होंने एक बुजुर्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि बंदर के गिरने या हमले की घटना में उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। हालांकि, ऐसी घटनाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध विस्तृत आंकड़े सामने नहीं आए हैं। ऐसे में स्थानीय प्रतिनिधि ने प्रशासन से समस्या का सर्वे कराकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

नगर निगम और वन विभाग पर जिम्मेदारी टालने का आरोप

पूर्व पार्षद नीरज सिंह ने आरोप लगाया कि बंदरों की समस्या को लेकर नगर निगम और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनके मुताबिक, जब स्थानीय लोग नगर निगम से शिकायत करते हैं तो उन्हें वन विभाग की जिम्मेदारी बताई जाती है। वहीं, वन विभाग की ओर से कथित तौर पर नगर निगम की जिम्मेदारी बताई जाती है।

नीरज सिंह का कहना है कि विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कराने और बंदरों की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई कराने की मांग की है।

बंदर का मुखौटा पहनकर क्यों पहुंचे DM कार्यालय?

नीरज सिंह ने बताया कि उन्होंने बंदर का मुखौटा इसलिए पहना ताकि प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित किया जा सके। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं होने पर उन्होंने प्रतीकात्मक प्रदर्शन का रास्ता चुना।

उन्होंने कहा कि स्कूलों के आसपास बड़ी संख्या में बंदरों की मौजूदगी के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। इसलिए किसी गंभीर घटना का इंतजार करने के बजाय पहले से ही आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

नीरज सिंह ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार अपने स्तर पर काम कर रही है, लेकिन यदि किसी स्थानीय समस्या पर संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करते हैं तो जनप्रतिनिधि चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने बंदरों की समस्या को जनता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की।

जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग

ज्ञापन के माध्यम से नीरज सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की कि बंदरों की संख्या और उनके प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए। इसके साथ ही स्कूलों, बाजारों और घनी आबादी वाले इलाकों में बंदरों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए।

उन्होंने संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था किए जाने की मांग की। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने की आवश्यकता बताई जहां बंदरों के झुंड नियमित रूप से दिखाई देते हैं।

फिलहाल, इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। बंदरों की बढ़ती समस्या को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतों और जनप्रतिनिधियों की मांग के बीच नगर निगम तथा वन विभाग के स्तर पर प्रभावी समन्वय की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के बाद ही समस्या के समाधान की दिशा में स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

You may have missed