रसखान समाधि पर सांझी महोत्सव-2026 का शुभारंभ, पारंपरिक रंगों से सजा महावन का परिसर

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

महावन। ब्रज की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से सांझी महोत्सव-2026 का मंगलवार को रसखान समाधि स्थल पर विधिवत शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त वार्षिक आयोजन के तहत शुरू हुए इस महोत्सव में ब्रज की पारंपरिक सांझी कला आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही रसखान समाधि परिसर पारंपरिक रंगों और कलात्मक रचनाओं से सज उठा।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ महोत्सव का शुभारंभ

सांझी महोत्सव का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप गुप्ता, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय और गोकुल नगर पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद परिसर में सांझी कला से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां शुरू हुईं।

महोत्सव के पहले दिन कलाकारों ने सांझी की अलग-अलग विधाओं पर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। किसी कलाकार ने पोर्ट्रेट सांझी तैयार की तो किसी ने सूखे रंगों और गोबर से पारंपरिक सांझी बनाई। इन कलाकृतियों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया और ब्रज की लोक कला की विविधता को सामने रखा।

इंटरप्रिटेशन सेंटर में छात्राओं से संवाद

महोत्सव के दौरान इंटरप्रिटेशन सेंटर में जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप गुप्ता ने कार्ष्णि बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने और अपने भविष्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी प्रतिभा और क्षमताओं को बेहतर दिशा दे सकती है। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रुचियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को भी विकसित करना चाहिए।

वहीं, छात्राओं ने परिसर में आकर्षक रंगोलियां बनाकर अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगी रंगोलियों और सांझी कलाकृतियों के कारण पूरा परिसर ब्रज की लोक परंपरा और संस्कृति के रंगों से सजा नजर आया।

बच्चों और महिलाओं को भी मिलेगा सांझी निर्माण का अवसर

महोत्सव के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार और अनुपम यादव ने बताया कि 7 अक्टूबर से सांझी कला में रुचि रखने वाले बच्चों, महिलाओं और अन्य इच्छुक प्रतिभागियों को सांझी निर्माण में भाग लेने का अवसर दिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल सांझी कला का प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से नई पीढ़ी को ब्रज की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। आयोजकों के अनुसार, युवाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी से सांझी कला को व्यापक स्तर पर पहचान मिल सकती है।

दरअसल, सांझी ब्रज की विशिष्ट लोक एवं धार्मिक कला परंपराओं में शामिल है। इसकी बारीक डिजाइन, रंगों का संयोजन और विषयवस्तु इसे अन्य लोककलाओं से अलग पहचान देती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इस पारंपरिक कला को सीखने और समझने का अवसर लोगों को मिलता है।

संगीतमय प्रस्तुति ने बांधा सांस्कृतिक समां

महोत्सव के पहले दिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसमें राघव मिश्रा बंधुओं ने रसखान और ताज बीबी के पदों के साथ सांझी के पारंपरिक पदों का संगीतमय गायन प्रस्तुत किया।

ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं और सांझी कला के बीच संगीत की इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। रसखान और ताज बीबी की रचनाओं के माध्यम से ब्रज की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े भावों को प्रस्तुत किया गया।

इस दौरान मौजूद लोगों ने सांझी कला के साथ पारंपरिक पदों के गायन का आनंद लिया। सांझी निर्माण और संगीत की प्रस्तुतियों ने महोत्सव के वातावरण को पूरी तरह ब्रज संस्कृति के अनुरूप बना दिया।

सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की पहल

सांझी महोत्सव जैसे आयोजन ब्रज की पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिक समय में लोक कलाओं के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बनाए रखना एक चुनौती भी है। ऐसे में बच्चों, महिलाओं और युवाओं को सीधे सांझी निर्माण से जोड़ना इस कला को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।

आयोजकों का प्रयास है कि महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागियों को सांझी की पारंपरिक तकनीक और इसकी सांस्कृतिक महत्ता के बारे में जानकारी मिले। साथ ही, स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए मंच भी उपलब्ध हो।

महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद के पर्यावरण सलाहकार दिवाकर वशिष्ठ, ईको रेस्टोरेशन प्रभारी मुकेश शर्मा, राजस्व समन्वयक चंद्रिका प्रसाद राय, पूर्व राजस्व समन्वयक रामवीर सिंह सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, रसखान समाधि स्थल पर शुरू हुआ सांझी महोत्सव-2026 ब्रज की लोककला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है। आने वाले दिनों में बच्चों, महिलाओं और अन्य प्रतिभागियों की सहभागिता से महोत्सव में सांझी कला के और भी रंग देखने को मिलेंगे। इससे जहां स्थानीय लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा, वहीं नई पीढ़ी के बीच ब्रज की पारंपरिक सांझी कला को लेकर रुचि भी बढ़ेगी।