सीएम योगी का सपा पर जोरदार हमला, बोले- 2017 से पहले परिवारवाद ही विकास का था मॉडल और पढ़िए क्या-क्या कहा
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए वर्ष 2017 से पहले की प्रदेश की राजनीतिक और विकास व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में प्रदेश में विकास से ज्यादा परिवार को प्राथमिकता दी जाती थी और घोषणाएं तो होती थीं, लेकिन उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं देता था।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में 2017 से पहले और वर्तमान उत्तर प्रदेश के बीच अंतर बताते हुए कहा कि पहले परिवारवाद को विकास का मॉडल, माफियाकरण को औद्योगिकीकरण का मॉडल और सैफई महोत्सव को सांस्कृतिक उत्थान का मॉडल माना जाता था। वहीं, उनके अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के विकास की प्राथमिकताएं बदली हैं।
सीएम योगी ने 2017 से पहले की व्यवस्था पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में विकास को लेकर घोषणाएं तो की जाती थीं, लेकिन परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की गति अपेक्षित नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के व्यापक विकास के बजाय परिवार तक सीमित थी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उस दौर में प्रदेश की विशाल क्षमता का पूरी तरह उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक पिछड़े राज्यों की श्रेणी में देखा जाता रहा। हालांकि, ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप और आकलन हैं, जिन पर विपक्ष की अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया रही है।
हाल के दिनों में भी मुख्यमंत्री 2017 से पहले की स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते रहे हैं। सितंबर में उन्होंने कहा था कि सपा के लिए विकास का अर्थ केवल सैफई का विकास था।
‘परिवारवाद ही विकास का मॉडल था’
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में परिवारवाद को लेकर सपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में परिवार के विकास को प्राथमिकता मिलती थी, जबकि आज सरकार का फोकस पूरे प्रदेश के विकास पर है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकता किसी एक परिवार या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, सरकार ने विकास की दिशा को प्रदेश के सभी हिस्सों तक पहुंचाने पर जोर दिया है।
यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से प्रमुख बहस का हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री इससे पहले भी परिवारवाद और भाई-भतीजावाद को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साध चुके हैं। गांधी जयंती के अवसर पर भी उन्होंने ‘परिवारवादी मॉडल’ को लेकर टिप्पणी की थी और ग्राम स्वराज में इसकी जगह नहीं होने की बात कही थी।
‘माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल था’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कानून-व्यवस्था और निवेश के मुद्दे को भी जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले माफिया और अपराध से जुड़ी गतिविधियों का प्रभाव प्रदेश के विकास और औद्योगिक माहौल पर पड़ता था।
योगी ने कहा कि पहले माफिया संरक्षण की स्थिति थी, जबकि वर्तमान सरकार में निवेशकों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री पिछले कई वर्षों से प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश के बीच संबंध को रेखांकित करते रहे हैं।
हाल ही में भदोही में भी मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले प्रदेश में अराजकता और माफिया राज के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि उस समय नीतिगत जड़ता, बाजार सुविधाओं और तकनीकी आधारभूत ढांचे की कमी जैसी समस्याएं थीं।
सैफई महोत्सव को लेकर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने सैफई महोत्सव का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 से पहले इसे सांस्कृतिक उत्थान के मॉडल के तौर पर प्रस्तुत किया जाता था। उन्होंने इसे पूर्ववर्ती सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या प्रदेश के व्यापक सांस्कृतिक विकास के लिए यही पर्याप्त मॉडल था।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री सैफई महोत्सव का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी की सरकार पर राजनीतिक हमला कर चुके हैं। सितंबर में उन्होंने कहा था कि उस समय विकास का फोकस सैफई तक सीमित था।
हालांकि, सैफई महोत्सव और उससे जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर समाजवादी पार्टी और उसके समर्थकों की अपनी राजनीतिक व्याख्या रही है। इसलिए मुख्यमंत्री की टिप्पणियों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
‘परिवार से प्रदेश के विकास तक बदली प्राथमिकता’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान सरकार में प्राथमिकताओं में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि अब परिवार के विकास की जगह प्रदेश के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसी तरह उन्होंने कहा कि माफिया संरक्षण की जगह निवेशक संरक्षण पर जोर है। उनके अनुसार, सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें उद्योग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिल सके।
उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ भी प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने, कारोबारी माहौल को बेहतर करने और निवेशकों को सुविधा देने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में बताती है।
तुष्टिकरण की जगह टेक्नोलॉजी पर जोर: सीएम
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में तकनीक को भी विकास की नई प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब तुष्टिकरण की जगह टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ी और इसके बाद उत्तर प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े नए क्षेत्रों के लिए आधार तैयार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब केवल तकनीक का बाजार नहीं, बल्कि तकनीक का निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने के लिए कार्यक्रमों पर काम कर रही है। उनके मुताबिक, एआई और अन्य उभरती तकनीकों से युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे रोजगार, उद्यमिता और तकनीकी कौशल के नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
विकास को लेकर सियासी बहस जारी
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 2017 से पहले और वर्तमान शासन की तुलना करना इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
एक ओर मुख्यमंत्री अपनी सरकार की उपलब्धियों को कानून-व्यवस्था, निवेश, तकनीक और विकास से जोड़कर पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष इन दावों पर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया देता रहा है।
फिलहाल मुख्यमंत्री का ताजा बयान एक बार फिर परिवारवाद, माफियाकरण, निवेश, तकनीक और विकास को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस को सामने लाता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार की प्राथमिकता अब परिवार के बजाय प्रदेश का विकास, माफिया के बजाय निवेशक का संरक्षण और तुष्टिकरण के बजाय तकनीकी प्रगति है।

